नलवाड़ी मेले में “कहलूर दर्शन” प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, बिलासपुर की संस्कृति और इतिहास की झलक
Himachalnow / बिलासपुर
नलवाड़ी मेला-2026 में “कहलूर दर्शन” प्रदर्शनी लोगों के लिए खास आकर्षण बन गई है, जहां बिलासपुर की संस्कृति और इतिहास को जीवंत रूप में दिखाया गया है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोग अपनी विरासत को करीब से समझ रहे हैं और उससे जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।
बिलासपुर
मेले में “कहलूर दर्शन” प्रदर्शनी का आकर्षण
बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अवसर पर स्थापित “कहलूर दर्शन” प्रदर्शनी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से जिला बिलासपुर की प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को बेहद आकर्षक और जीवंत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यहां आने वाले दर्शक न केवल इन झलकियों को देख रहे हैं, बल्कि अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के बारे में नई जानकारियां भी प्राप्त कर रहे हैं।
लोक संस्कृति की विविध झलकियां प्रदर्शित
इस प्रदर्शनी में प्राचीन कहलूर रियासतकाल की लोक संस्कृति को सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। बांस से बनी पारंपरिक टोकरियां, मिट्टी के बर्तन और कच्चे घरों को सजाने के लिए की जाने वाली पारंपरिक चित्रकला को खास तौर पर प्रदर्शित किया गया है। साथ ही ग्रामीण परिवेश में त्योहारों के दौरान घरों की दीवारों पर की जाने वाली सजावट और लोक चित्रकला को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शकों को पुराने समय की यादों से जोड़ रही है।
विवाह परंपराएं और सामाजिक जीवन की झलक
प्रदर्शनी में बिलासपुर के पारंपरिक विवाह समारोहों के रीति-रिवाजों को भी चित्रों और मॉडलों के माध्यम से दर्शाया गया है। इससे नई पीढ़ी को अपने रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं को समझने का अवसर मिल रहा है। दर्शक इन प्रदर्शनों के माध्यम से न केवल पुराने समय के जीवन को देख पा रहे हैं, बल्कि उनकी महत्ता और सांस्कृतिक मूल्य को भी समझ रहे हैं।
धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का प्रदर्शन
प्रदर्शनी में ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिसमें बाबा नाहर सिंह मंदिर सहित कई प्राचीन मंदिरों की झलक प्रस्तुत की गई है। इसके अलावा उन धरोहरों को भी दिखाया गया है, जो गोविंद सागर झील बनने के बाद जलमग्न हो गई थीं। यह पहल दर्शकों को बिलासपुर के इतिहास के उस पहलू से परिचित कराती है, जिसे आज की पीढ़ी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाती।
ऋषि व्यास की प्रतिमा बनी खास आकर्षण
प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण ऋषि व्यास की प्रतिमा है, जिनके नाम पर बिलासपुर का नामकरण हुआ है। इस प्रतिमा के माध्यम से क्षेत्र की पौराणिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाया गया है, जो दर्शकों के लिए विशेष रुचि का विषय बनी हुई है। यहां आने वाले आगंतुक प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ-साथ सेल्फी लेकर इन यादों को अपने साथ संजो रहे हैं।
युवाओं को विरासत से जोड़ने की पहल
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि “कहलूर दर्शन” प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य मेले में आने वाले लोगों को बिलासपुर के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति, बोली और परंपराओं से रू-ब-रू करवाना है। इस पहल के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।