शिमला में दुकान कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद, हाथापाई के बाद भारी पुलिस बल तैनात
Himachalnow / शिमला
शिमला में दुकान कब्जे के आरोप को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
शिमला
दुकान कब्जे को लेकर बढ़ा विवाद
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दुकान कब्जे को लेकर दो पक्षों के बीच बड़ा विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक महिला की दुकान पर कब्जा करने के आरोप के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई, जिससे माहौल और भी गंभीर हो गया।
समिति के लोगों ने तोड़ा ताला, बाहर फेंका सामान
जानकारी के अनुसार विवाद के दौरान देवभूमि संघर्ष समिति से जुड़े लोग भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने दुकान का ताला तोड़कर अंदर रखा सामान बाहर निकाल दिया। इस कार्रवाई के बाद स्थिति और अधिक बिगड़ गई और दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ गया। मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे हालात को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया।
महिला ने लगाए दुर्व्यवहार के आरोप
दुकान संचालित करने वाली महिला ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ भाभी के निधन के कारण बाहर गई हुई थीं। वापस लौटने पर उन्होंने देखा कि उनकी दुकान पर किसी और का ताला लगा हुआ था। जब उन्होंने ताला खोलने की कोशिश की तो कुछ लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इस घटना के बाद महिला भावुक हो गईं और उन्होंने न्याय की मांग की है।
समिति का पक्ष भी आया सामने
वहीं देवभूमि संघर्ष समिति के संयोजक विजय शर्मा ने कहा कि संबंधित परिवार वर्ष 1947 से इस दुकान का संचालन कर रहा है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने दुकान खरीदी है, उन्हें कब्जा लेने से पहले कानूनी प्रक्रिया और नोटिस का पालन करना चाहिए था। बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के दुकान पर कब्जा करना गलत है और इससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई है।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, स्थिति नियंत्रण में
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने भीड़ को हटाकर दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और पूरे मामले की जांच की जा रही है, ताकि विवाद का समाधान कानूनी तरीके से किया जा सके।