HNN / नाहन
शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुके हैं और आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है -नौ रातें। इन नौ रातों और दस दिन के दौरान, शक्ति देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है और दसवां दिन दशहरा मनाया जाता है। माँ दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरुप देवी ब्रह्मचारिणी का हैं। यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या हैं।
ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण करने वाली। कहा भी हैं-वेदस्तत्वं तपो ब्रह्म-वेद,तत्व और तप ब्रह्म शब्द के अर्थ हैं। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य हैं। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता हैं।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा पीले या सफेद वस्त्र धारण करके करनी चाहिए चाहिए। इस दिन देवी को सफेद वस्तुएं अर्पित करने से भाग्य चमक सकता है। ब्रह्मचारिणी को आप मिसरी, शक्कर या पंचामृत का भोग लगा सकते हैं।पूजा के समय ज्ञान और वैराग्य का कोई भी मंत्र जपा जा सकता है। मां ब्रह्मचारिणी के लिए “ॐ ऐं नमः” का जाप करें। जलीय आहार और फलाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां को लगाएं यह भोग, करें ये उपाय
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों के साथ चंद्रमा के मंत्रों का जाप करना बहुत उत्तम माना जाता है। इस दिन माता को चांदी की वस्तु भी अर्पित की जाती हैं। इस दिन शिक्षा या ज्ञान के लिए आप मां सरस्वती की भी पूजा कर सकते हैं। भोग लगाने के बाद घर के सभी सदस्यों को दें। ऐसा करने से घर के सभी सदस्यों को लंबी आयु का वरदान मिलता है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाएं।
पूजा का लाभ-
देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना से अनंत फल की प्राप्ति एवं तप,त्याग,वैराग्य,सदाचार,संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती हैं।जीवन के कठिन संघर्षों में भी व्यक्ति अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होता। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती हैं।लालसाओं से मुक्ति के लिए माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान लगाना अच्छा होता हैं।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group





