Loading...

नाहन के बाद बड़ाबन में हाथियों का कहर, गांव में दहशत का माहौल

Ankita 26 Mar 2024 Edited 26 Mar 1 min read

गेहूं की फसल, पशुओं का चारा सहित खेतों की फेंसिंग को पहुंचा नुकसान

HNN/ नाहन

बीते सोमवार की देर रात को सती वाला पंचायत के बड़ाबन में किसानों की फसलों पर हाथियों का जमकर कहर टूटा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाथियों की संख्या दो बताई गई थी। स्थानीय निवासी आलोक, जोगिंदर, सुरेश ने बताया कि हाथी करीब रात को 12:00-12:30 बजे के आसपास गांव के साथ लगते खेतों में पहुंचे थे।

उन्होंने बताया कि अचानक कुत्तों के जोर-जोर से भौंकने के कारण गांव के लोग जब खेतों की ओर गए तो दो व्यस्क हाथी गेहूं की फसल को रौंद रहे थे। हाथियों के अचानक गांव में पहुंचने पर पूरा गांव दहशत में था। स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथी करीब 2 घंटे से भी अधिक समय तक खेतों में डटे रहे।

इस दौरान उन्होंने जोगिंदर सिंह सुरेश, आलोक, चिंतामणि आदि की गेहूं की फसल सहित पशुओं के चारे के खेत के चारों ओर लगाई गई इलेक्ट्रिकल फेंसिंग को पूरी तरह तबाह कर दिया। स्थानीय निवासी आलोक का कहना है कि हाथियों के द्वारा उनके दो स्प्रिंकलर को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

आलोक ने बताया कि रात को हाथियों का रौद्र रूप देखकर सभी अपने-अपने घरों में दुबक गए थे। सुबह खेतों में जब वह पहुंचे तो नुकसान का आकलन किया गया। स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन से वन विभाग से मांग करी है कि पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में हाथियों का आवागमन बढ़ रहा है। लिहाजा गांव और वन की सीमा के बीच ट्रेंच बनाए जाने चाहिए। बता दें कि जिला सिरमौर की पावंटा रेंज में सिंबल वाडा नेशनल पार्क का एरिया लगता है।

ठीक उत्तरांचल और हिमाचल के बीच यमुना जी से राजाजी नेशनल पार्क भी सटा हुआ है। सेवानिवृत वन अधिकारी सुच्चा सिंह जो की वन्य प्राणियों के काफी एक्सपर्ट भी माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल में हाथियों की दस्तक की बड़ी वजह जंगलों में कच्ची शराब के लिए तैयार किए जाने वाला लाहन माना जाता है।

उन्होंने बताया कि लाहन की महक हाथियों को 50 से भी अधिक किलोमीटर दूर तक आकर्षित करती है। उन्होंने यह भी बताया कि हाथी गुड़ से बनाए जाने वाली कच्ची शराब के रॉ मटेरियल के बड़े शौकीन माने जाते हैं। लिहाजा उत्तरांचल नेशनल पार्क से यह हाथी यमुना नदी को पार करते हुए हिमाचल में एंट्री करते हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि बीते वर्ष हाथी द्वारा कोलर में एक महिला को रौंद कर मार भी डाला गया था।

वहीं वन्य प्राणी एक्सपर्ट्स का कहना है कि राजाजी नेशनल पार्क से हिमाचल के सिंबल वाड़ा नेशनल पार्क में आवागमन होना अच्छा संकेत भी है। बता दें कि हाल ही में इस रेंज में टाइगर का जोड़ा भी देखा गया था। बरहाल वन्य प्राणी संपदा में लगातार हो रहे इजाफे को लेकर जहां वन्य पर्यटन के बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं तो वहीं हिमाचल प्रदेश फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के वन्य प्राणी विभाग को वन्यजीवों से आम नागरिकों की सुरक्षा का भी अब पुख्ता प्रबंध करना पड़ेगा।

उधर, वाइल्डलाइफ वन मंडल अधिकारी शिमला शाहनवाज भट्ट तथा एसीएफ वाइल्डलाइफ विनोद कुमार का कहना है कि जल्द ही वे रेणुका जी और सिंबल वाडा वाइल्डलाइफ रेंज के दौरे पर आ रहे हैं। हाथियों की समस्या को लेकर क्या बेहतर सुझाव हो सकते हैं निश्चित ही विकल्प निकल जाएगा।

Related Topics: