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नाहन में नितिन चौहान की धमाकेदार एंट्री, लोजपा के शक्ति प्रदर्शन से भाजपा-कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल

Shailesh Saini • 50 Mins Ago • 1 Min Read

कालाअंब से नाहन तक सैकड़ों गाड़ियों का काफिला, हजारों समर्थकों ने किया स्वागत; युवा शक्ति और रोजगार को बनाया सियासी एजेंडा

हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लोक जनशक्ति पार्टी ने एक बार फिर दस्तक दी है और इस बार इस दस्तक के केंद्र में नाहन विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के पूर्व विधायक रहे स्वर्गीय सदानंद चौहान के सुपुत्र नितिन चौहान उर्फ टिंकू हैं। रविवार को नितिन चौहान ने औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब से सैकड़ों गाड़ियों और हजारों समर्थकों के काफिले के साथ हिमाचल में अपनी राजनीतिक वापसी का ऐलान किया। कालाअंब से शुरू हुआ यह काफिला जैसे-जैसे नाहन की ओर बढ़ा, समर्थकों का उत्साह और भी बढ़ता गया और जिला मुख्यालय में हुए इस शक्ति प्रदर्शन ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।

नितिन चौहान को लोक जनशक्ति पार्टी ने हिमाचल प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। नाहन पहुंचने पर उन्होंने धार्मिक स्थलों पर शीश नवाकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। कच्चा टैंक स्थित जामा मस्जिद के समीप रुकने के बाद उन्होंने गुरुद्वारा साहिब दशमेश स्थान और काली स्थान मंदिर में माथा टेका। इसके बाद शाम करीब चार बजे नाहन किसान भवन में आयोजित जनसभा में उन्होंने समर्थकों को संबोधित किया। खास बात यह रही कि शहर में काफिले की भारी मौजूदगी के बावजूद आम लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए समर्थकों ने स्वयं यातायात व्यवस्था संभाली।

राजनीतिक दृष्टि से नितिन चौहान की यह वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनके पिता स्वर्गीय सदानंद चौहान के नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी नाहन विधानसभा सीट के रास्ते हिमाचल विधानसभा तक पहुंच चुकी है। नितिन चौहान अक्टूबर 2017 में अपने परिवार सहित भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन अब एक बार फिर उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए लोजपा का झंडा उठा लिया है। प्रदेश भाजपा संगठन में उनकी राजनीतिक सक्रियता और भूमिका को लेकर लंबे समय से चली आ रही चर्चाओं के बीच उनकी लोजपा में वापसी को सियासी तौर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

हालांकि नितिन चौहान ने अभी भाजपा या कांग्रेस के खिलाफ सीधे तौर पर कोई आक्रामक राजनीतिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके रविवार के शक्ति प्रदर्शन ने दोनों प्रमुख दलों के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है। खासकर नाहन विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में भाजपा से जुड़े चेहरों और समर्थकों की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।

केंद्र में भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी के गठबंधन के बावजूद हिमाचल की राजनीति में लोजपा अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन तैयार करेगी या भविष्य में कुछ विधानसभा सीटों पर दावेदारी करेगी, इसे लेकर भी राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।

नितिन चौहान ने अपने राजनीतिक एजेंडे का संकेत देते हुए साफ किया कि उनकी प्राथमिकता प्रदेश में युवा शक्ति को संगठन की रीढ़ बनाना है। उनका लक्ष्य हिमाचल के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और युवाओं को आगे लाने का है। उन्होंने प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए युवाओं के लिए रोजगार के नए संसाधन विकसित करने तथा रोजगारपरक विजन तैयार करने की बात कही। इससे साफ है कि लोजपा की आगामी राजनीति में युवा, रोजगार और संगठन विस्तार को प्रमुख हथियार बनाया जा सकता है।

नितिन चौहान की इस राजनीतिक एंट्री का असर केवल भाजपा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। नाहन विधानसभा क्षेत्र में उनका पारिवारिक और राजनीतिक आधार होने के साथ-साथ परिवार के कई सदस्यों के अलग-अलग राजनीतिक खेमों से जुड़े होने की चर्चा भी इस घटनाक्रम को अहम बनाती है। ऐसे में उनकी सक्रियता आने वाले समय में कांग्रेस के लिए भी चुनौती खड़ी कर सकती है। यदि पुराने राजनीतिक समर्थकों और परिवार से जुड़े लोगों की लामबंदी उनके पक्ष में होती है तो नाहन की राजनीति में नए समीकरण बनना तय माना जा रहा है।

रविवार को कालाअंब से नाहन तक नजर आया समर्थकों का हुजूम फिलहाल एक राजनीतिक संदेश जरूर दे गया है कि नितिन चौहान केवल प्रदेश अध्यक्ष की औपचारिक जिम्मेदारी संभालने नहीं आए हैं, बल्कि वह लोजपा को जमीनी स्तर पर खड़ा करने की तैयारी में हैं। अब देखना यह होगा कि नाहन से शुरू हुआ यह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों तक किस रूप में पहुंचता है और नितिन चौहान की अगुवाई में लोक जनशक्ति पार्टी हिमाचल की राजनीति में अपने लिए कितनी मजबूत जगह बना पाती है।

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