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नाहन हिंसक संघर्ष: दोनों पक्षों के 10 से 12 लोग पूछताछ के लिए तलब, अब नुकसान की भरपाई और गंभीर धाराओं पर उठे सवाल

Shailesh Saini • 1 Hour Ago • 1 Min Read

थाना सदर के प्रभारी भी हुए थे घायल, पुलिस की कार्रवाई पर टिकी शहरवासियों की निगाहें

हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन

नाहन में 23 अक्टूबर को वाल्मीकि और सिख समुदाय के कुछ लोगों के बीच गेट लगाने को लेकर हुए हिंसक विवाद के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मंगलवार शाम को पुलिस थाना सदर नाहन में दोनों पक्षों से संबंधित 10 से 12 लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद मामले में कई अहम सवाल भी खड़े हो रहे हैं, जिनके जवाब सामने आना बाकी हैं।

पुलिस अधीक्षक, जिला सिरमौर की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस थाना सदर नाहन में अभियोग संख्या 208/2026 दिनांक 23 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 191(3), 190, 132 और 324(4) तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और अन्वेषण के दौरान सामने आने वाले तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुरूप आगामी कार्रवाई की जाएगी।

नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

हिंसक घटनाक्रम के दौरान सार्वजनिक और अन्य संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनसे इसकी भरपाई करवाई जाएगी? यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता और नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी साबित होती है, तो क्या प्रशासन कानून के तहत क्षतिपूर्ति की कार्रवाई करेगा? शहरवासी इस संबंध में प्रशासन और पुलिस की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।

क्या वीडियो फुटेज के आधार पर होगी पहचान?

घटना के दौरान पत्थरबाजी और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरों के बीच एक अन्य अहम सवाल यह है कि क्या पुलिस घटनास्थल के वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो की जांच कर रही है? फुटेज के माध्यम से हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हालांकि, पुलिस के आधिकारिक बयान में वीडियो फुटेज की जांच को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

क्या गंभीर धाराओं में भी होगी कार्रवाई?

इस घटनाक्रम में थाना सदर के प्रभारी सहित पुलिसकर्मियों के घायल होने का मामला भी गंभीरता से जांच के दायरे में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जांच के दौरान जानलेवा हमले की आशंका से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है और क्या साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, जो हत्या के प्रयास से संबंधित है, या कोई अन्य उपयुक्त गंभीर धारा जोड़ने पर विचार होगा? फिलहाल पुलिस की ओर से जारी बयान में धारा 307 के तहत कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। गौरतलब है कि भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद हत्या के प्रयास से संबंधित प्रावधान धारा 109 में है, जबकि धारा 307 भारतीय दंड संहिता की पुरानी धारा थी।

फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। अब देखना होगा कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान के साथ-साथ नुकसान की भरपाई तथा गंभीर आरोपों को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या स्थिति स्पष्ट होती है।