पंचायत टकोली के किसान सुरजीत सिंह ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, अन्य किसानों को भी किया प्रेरित
HNN/ऊना
चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र एवं उप तहसील जोल के अन्तर्गत ग्राम पंचायत टकोली में ड्रैगन फ्रूट की खेती अब लोगों की आय का साधन बन सकती है। टकोली के रहने वाले सुरजीत सिंह ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं और उन्होंने एक कनाल भूमि पर ड्रैगन फ्रूट की खेती की है। उनका कहना है कि वहां की मिट्टी ड्रैगन फ्रूट के लिए उपयुक्त है।
मेक्सिको, थाईलैंड, वियतनाम इसराइल, श्री लंका के अलावा चीन में पाए जाने वाला लोकप्रिय फल ड्रैगन फ्रूट की खेती अब जिला ऊना के लिए भी वरदान साबित हो रही है। टकोली निवासी सुरजीत सिंह ड्रैगन फ्रूट की खेती कर किसानों को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने प्रारंभिक खेती गेहूं, गन्ना सहित अन्य फसलों को छोड़ ड्रैगन फ्रूट की खेती कर आर्थिक स्थिति मजबूत करने की बात कही है। उनके द्वारा तैयार किए गए ड्रैगन फ्रूट स्वाद और पौष्टिकता से भरपूर हैं।
टकोली निवासी सुरजीत सिंह ने लगभग 1 साल पहले ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरू की थी। अब उस पर ड्रैगन फ्रूटिंग शुरू हो गई हैं। स्थानीय उप प्रधान टकोली पंकज रणौत ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित (एमआईडीएच) योजना के तहत एवं मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से टकोली के दो किसानों की दो कनाल भूमि पर 176 पौधे लगाए गए। और अब एक साल के बाद ड्रैगन फ्रूटिंग होने शुरू हो गई हैं।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के किसान अपने प्रारंभिक खेती तो कर रहे हैं लेकिन प्रारंभिक खेती में अधिक लागत और जंगली जानवरों से नुकसान की अधिक संभावना बनी रहती है। ऐसे में ड्रैगन फ्रूट की खेती कारगर साबित हो सकती है। क्योंकि किसी तरह का कोई जंगली जानवर इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाता है। उपनिदेशक बागवानी विभाग ऊना के. के. भारद्वाज मुनि की खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यह बंजर जमीन पर भी आसानी से की जा सकती है। इस खेती में ना तो आवारा पशुओं से कोई नुकसान होता है, और कम पानी खर्च कर इस फसल को उगाया जा सकता है। उपमंडल बंगाणा व ऊना के गांव सलोह के किसान भी इस खेती की तरफ अपना ध्यान केंद्रित करें, तो वह आगे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि बंगाणा में करीब 55 किसानों ने लगभग 7000 पौधे लगाकर इस खेती को करना प्रारंभ