दो सत्रों में हुए इस समारोह में साहित्यकारों ने उनके राष्ट्रभक्ति साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर विचार साझा किए। प्रदेशभर से जुटे साहित्यकारों ने काव्यपाठ और व्याख्यानों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी।
चंबा
विरासत केंद्र भूरी सिंह संग्रहालय में हुआ आयोजन
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मुख्य अतिथि ने किया प्रेरक विचारों को साझा
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बाबा काशीराम को सच्चा राष्ट्रभक्त बताया और कहा कि ऐसे नायकों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के संघर्षों से सीख लेकर हम राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभा सकते हैं।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता पद्मश्री विजय चम्बयाल ने की
इस सत्र में विजय चम्बयाल ने बाबा काशीराम के पहाड़ी साहित्य और राष्ट्रभक्ति पर उनके योगदान को रेखांकित किया। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुआ।
द्वितीय सत्र में हुआ बहुभाषी कवि सम्मेलन
इस सत्र में डॉ. मस्तराम शर्मा की अध्यक्षता में बहुभाषी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। पीपी सिंह विशिष्ट अतिथि रहे। कवि सम्मेलन में साहित्यकारों ने काव्यपाठ और विचार प्रस्तुति के माध्यम से बाबा काशीराम के व्यक्तित्व को उकेरा।
साहित्यकारों और विद्वानों की रही सक्रिय भागीदारी
डॉ. शंकर वसिष्ठ, रमेश चंद्र मस्ताना, युद्धवीर टंडन सहित प्रदेशभर के साहित्यकारों ने काव्यपाठ, व्याख्यान और प्रस्तुति के माध्यम से बाबा काशीराम की साहित्यिक यात्रा और योगदान को साझा किया। इस अवसर पर पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई।
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