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पिंकसिटी जयपुर में आसरा के कलाकारों का धमाल, लोकरंग उत्सव में सिरमौरी संस्कृति के रंग बिखेरे

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन 11 Oct 2025 Edited 11 Oct 1 min read

जयपुर में चल रहे 28वें राष्ट्रीय लोकरंग उत्सव में सिरमौर की आसरा संस्था के कलाकारों ने हाटी की नाटी, ठोडा और पारंपरिक लोकनृत्यों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। संगीत और नृत्य की अनोखी संगति ने हिमाचली लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दी।

जयपुर

हिमाचली लोकसंस्कृति का मनमोहक प्रदर्शन
गुलाबी नगरी जयपुर के जवाहर कला केंद्र में आयोजित 28वें राष्ट्रीय लोकरंग उत्सव 2025 में आसरा संस्था के कलाकारों ने हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए सिरमौर की समृद्ध लोकसंस्कृति का शानदार प्रदर्शन किया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र और जवाहर कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन सात से सत्रह अक्टूबर तक चल रहा है।

हाटी क्षेत्र के लोकनृत्य बने आकर्षण का केंद्र
आसरा संस्था के प्रभारी एवं वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने बताया कि संस्था के कलाकार सात से ग्यारह अक्टूबर तक गिरिपार क्षेत्र के प्राचीन ठोडा नृत्य, रिहाल्टी गी, मुंजरा गी, परात और रासा नृत्य की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। पद्मश्री विद्यानंद सरैक और डॉ. जोगेंद्र हाब्बी के निर्देशन में तैयार लोकनृत्यों ने दर्शकों को सिरमौर की सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू करवाया।

संगीत और नृत्य ने बांधा समां
लोकगायक गोपाल हाब्बी, सुनील चौहान और बिमला चौहान की सुरीली आवाज़ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं, संदीप की ढोल की थाप, नरेन्द्र की करनाल और बलदेव चौहान की बांसुरी की धुनों ने वातावरण को संगीत से सराबोर कर दिया। नृत्य कलाकार जोगिंद्र हाब्बी, अमीचंद, चमन, नवीन, दिनेश, सरोज, अनुजा, आरती और प्रीति ने अपनी दमदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

देशभर की लोकधाराओं का संगम
इस राष्ट्रीय उत्सव में सिरमौर के नृत्यों के साथ राजस्थान का चरी नृत्य, अंगीगैर, कालबेलिया, भपंग वादन, जम्मू-कश्मीर का रूफ, असम का बिहू, उत्तराखंड का थडिया और छपेली, मिज़ोरम का चेरो, हरियाणा का बीन सपेरा, मणिपुर का पूँगचोलम तथा पंजाब का भांगड़ा जैसे नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिनसे भारत की सांस्कृतिक विविधता एक मंच पर जीवंत हो उठी।

आसरा संस्था का उद्देश्य
डॉ. हाब्बी ने बताया कि आसरा संस्था का उद्देश्य सिरमौरी पारंपरिक लोक नृत्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाना है। संस्था लगातार युवा पीढ़ी को सिरमौरी लोकसंस्कृति से जोड़ने और उसे संरक्षित करने के लिए कार्य कर रही है। जयपुर की जनता की तालियों की गड़गड़ाहट इस बात का प्रमाण बनी कि सिरमौर की संस्कृति देशभर में अपनी अमिट छाप छोड़ रही है।