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प्राचीन तकनीक और जलशक्ति के उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है ग्राम पंचायत मैहला के गांव चुराड़ी में बना घराट

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 23 Mar 2025 • 1 Min Read

Himachalnow / चंबा

अपने पिता द्वारा वर्ष 1960 में शुरू किए गए घराट को आज भी चला रहे हैं गांव चुराड़ी निवासी बृजलाल


जलशक्ति से चलता है चुराड़ी का ऐतिहासिक घराट

जिला चंबा की ग्राम पंचायत मैहला के गांव चुराड़ी में स्थित घराट एक प्राचीन तकनीक और जलशक्ति के उपयोग का जीवंत प्रतीक है। इस घराट की शुरुआत वर्ष 1960 में मट्टू राम ने की थी, जिसे आज उनके बेटे बृजलाल निरंतर चला रहे हैं। यह घराट आज भी सीमावर्ती ग्राम पंचायतों के लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।


आटा पिसाई की पारंपरिक तकनीक

घराट द्वारा नदी-नालों की जलधारा की शक्ति से आटा पीसने की प्रक्रिया न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि यह ऊर्जा की बचत भी करती है। शीतल पिसाई के कारण अनाज के छिलके और रेशे सुरक्षित रहते हैं, जिससे आटे की पौष्टिकता बनी रहती है।


तकनीक के युग में भी बनी हुई है घराट की अहमियत

वर्तमान समय में बिजली से चलने वाली चक्कियों का प्रचलन अधिक हो गया है, लेकिन कुछ स्थानों पर आज भी लोग घराट से पिसा हुआ आटा ही पसंद करते हैं। इसकी गुणवत्ता और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण यह अब भी भरोसेमंद माध्यम बना हुआ है।


65 वर्षों से सेवा में जुटा एकमात्र घराट

बृजलाल बताते हैं कि उनका घराट आज भी लगभग 10,000 की आबादी को सेवा दे रहा है। उनके घराट पर आसपास की ग्राम पंचायतों – जैसे बंदला, बागड़ी बांग्ला, मैहला – से लोग आकर मक्की, गेहूं, चावल, चना, हल्दी इत्यादि की पिसाई करवाते हैं। प्रतिदिन यह घराट तीन किवंटल गेहूं और दो किवंटल मक्की तक पीसने में सक्षम है।


स्थानीय लोगों की बनी हुई है प्राथमिकता

स्थानीय निवासी दीक्षा ठाकुर, संदीप कुमार, संत राम, सुभाष कुमार, बुधिया राम, बूटा राम, राजेंद्र कुमार, परस राम, मनो राम, तिलक, करम चंद, पृथ्वी चंद, कमल और विकास ने बताया कि उनका परिवार वर्षों से इसी घराट का आटा उपयोग कर रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया और कहा कि आधुनिक चक्कियों की बजाय घराट का आटा स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।

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