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सफाई व्यवस्था की कड़ी में बढ़ती चुनौतियां : दोहरी मार झेल रहे सफाई कर्मी, अब जनसहयोग और बेहतर सिस्टम की जरूरत

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 51 Mins Ago • 1 Min Read

बड़ा चौक के विवाद के बाद सफाई कर्मियों का गुन्नूघाट पुलिस चौकी के बाहर प्रदर्शन, कचरा डालकर जताया रोष

नाहन

नाहन शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों ऐसी चुनौतियों से जूझ रही है, जिनका खामियाजा सबसे अधिक सफाई कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। नगर परिषद की व्यवस्था में समयबद्ध समन्वय की कमी, सीमित संसाधन और आम लोगों के अपेक्षित सहयोग का अभाव मिलकर ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं, जहां मेहनत करने वाले सफाई कर्मी ही विवादों और शिकायतों के केंद्र में आ जाते हैं।

शनिवार को बड़ा चौक में इसी तरह की परिस्थितियों के बीच एक मामूली घटना ने विवाद का रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक महिला सफाई कर्मी सड़क पर सफाई कार्य कर रही थी। इसी दौरान मंडी से सब्जियां लेकर आया एक वाहन चालक अपनी गाड़ी पीछे कर रहा था। महिला सफाई कर्मी ने पीछे सफाई कार्य होने की जानकारी देते हुए चालक को आवाज लगाई, जिस पर उसने वाहन रोक दिया। इसके बाद किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया। एक महिला सफाई कर्मी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किए जाने का आरोप भी लगाया है। सफाई कर्मियों का आरोप है कि मामले में उनकी बात को पूरी गंभीरता से नहीं सुना गया।

घटना से आक्रोशित बड़ी संख्या में सफाई कर्मी गुन्नूघाट पुलिस चौकी पहुंच गए। उन्होंने विरोध स्वरूप शहर से एकत्र किया गया कचरा पुलिस चौकी के बाहर डालकर प्रदर्शन किया और पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई।

दरअसल, शहर की मौजूदा सफाई व्यवस्था में घर-घर से कचरा एकत्र करने वाले सफाई कर्मी और कचरा उठाने वाले वाहनों के बीच समय का पूरा तालमेल नहीं बन पाता। सफाई कर्मी घरों से कचरा एकत्र कर निर्धारित स्थान पर पहुंचा देते हैं, लेकिन कई बार कचरा उठाने वाले वाहन वहां पहुंचने में समय ले लेते हैं। इस दौरान कचरा कुछ समय के लिए वहीं पड़ा रहता है और बेसहारा पशु व बंदर थैलियां फाड़कर उसे चारों ओर फैला देते हैं। बाद में इसी बिखरे कचरे को देखकर आसपास के लोग शिकायत करते हैं, जबकि इसमें न तो सफाई कर्मियों की लापरवाही होती है और न ही कचरा उठाने वाले वाहनों की। यह स्थिति केवल दोनों व्यवस्थाओं के बीच समय के बेहतर समन्वय की मांग करती है।

समस्या का दूसरा पक्ष आम नागरिकों से भी जुड़ा है। शहर में आज भी कुछ लोग निर्धारित व्यवस्था का पालन करने के बजाय खुले स्थानों पर कचरा फेंक देते हैं। ऐसे में सफाई कर्मियों को घर-घर से कचरा एकत्र करने के साथ-साथ सड़कों और बाजारों में बिखरे कचरे को भी साफ करना पड़ता है। इससे उनका कार्यभार बढ़ जाता है और सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे में सफाई कर्मी दोहरी जिम्मेदारी और मानसिक दबाव के बीच काम करने को मजबूर हैं।

नगर परिषद नाहन के कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने माना कि वर्तमान व्यवस्था में कुछ व्यावहारिक कमियां हैं। उन्होंने बताया कि कचरा संग्रहण और कचरा उठाने वाले वाहनों की समयबद्ध व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि दोनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों।

उन्होंने कहा कि खुले में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ नगर परिषद सख्त कार्रवाई करेगी। इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

यह पूरा घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है कि स्वच्छ शहर की जिम्मेदारी केवल नगर परिषद या सफाई कर्मियों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है। यदि व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और लोग भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालें तथा सफाई कार्य के दौरान सफाई कर्मियों का सहयोग करें, तो ऐसे विवादों से बचा जा सकता है। शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रशासन, सफाई कर्मियों और आम जनता—तीनों की समान भागीदारी और जिम्मेदारी आवश्यक है।

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