बहुचर्चित केसी ओवरसीज नकली रॉ मैटीरियल मामले में विभाग की कार्यवाही सवालों के घेरे में

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लगभग तीन महीने पहले हुई थी आरोपियों की जमानत रद्द, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं

HNN/ बद्दी/ ओम शर्मा

हिमाचल प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़े नकली रॉ मैटीरियल स्कैम जिसने हिमाचल से दिल्ली तक संबंधित विभागों की नींद उड़ा रखी है यह मामला अभी तक सवालों के घेरे में ही चल रहा है। वहीं अब इस मामले में आरोपियों की अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है और विभाग बिना गिरफ्तारी के ही चार्जशीट पेश करने की तैयारी कर रहा है। जिससे इस मामले में विभाग की कार्यप्रणाली जहां समझ से परे है वहीं सवालों के घेरे में भी है।

हैरानी इस बात की है कि लगभग तीन महीने पहले आरोपियों की जमानत कोर्ट ने रद्द कर दी थी, लेकिन बाबजूद इसके अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई जो कि खुद में एक बड़ा सवाल है और कहीं न कहीं जांच एजेसियों की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाता नजर आ रहा है। ऐसे कौन से आकाश या पाताल में आरोपी छुपे हैं जिनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई। इस मामले में अंकित सिंगला व अंकुश सिंगला दोनों भाई इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड हैं।

जब तक यह विभाग के आगे तलब नहीं होते तब तक विभागीय जांच भी अधूरी है और सवालों के घेरे में है। ऐसे में आधी अधूरी जांच के बीच विभाग क्या चार्जशीट पेश करेगा समझ से परे है।
एक तरफ तो केंद्र व प्रदेश सरकार दवाओं की गुणवत्ता को लेकर नीतियां बनाने और टीमों का गठन कर दबिशें दी जा रही हैं ताकि दवा उत्पादों की गुणवत्ता को सुधारा जा सके। वहीं दूसरे और नकली दवा मैटीरियल मार्केट में बेचकर दवा उत्पादों की साख पर बट्टा लगाने वाले अभी तक भी खुले घूम रहे हैं।

यह मामला कोई छोटा मामला है, जब रॉ मैटीरियल ही नकली था तो उससे बनने वाली दवाओं की गुणवत्ता कहां से मानकों पर सही उतरेगी। यह जीवन रक्षक दवाएं मानव को बचाने के लिए हैं न कि मानव जाति का संहार करने के लिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इस पूरे मामले में ड्रग विभाग द्वारा जांच में ढील कहां छोड़ी जा रही है। जब कोर्ट ने आरोपियों की जमानतें रदद कर दी थीं तो उसी समय विभाग को दोनों मुख्य सरगनाओं की धड़पकड़ के लिए जाल बिछा लेना चाहिए था।

ताकि दोनों धरे जाते और जांच में सारी सच्चाई सामने आ पाती। लेकिन हैरानी इस बात की है कि अभी तक आरोपी खुले घूम रहे हैं। वहीं इस मामले में यह भी पता चला है कि आरोपियों द्वारा ड्रग विभाग पर अनाधिकृत तरीके से दबाब बनाया जा रहा है ताकि आरोपियों को ढील मिल सके। आज प्रदेश का सबसे बड़ा फार्मा हब बीबीएन नकली दवाओं, सैंपल फेल होने को लेकर सुर्खियों में है। वहीं इस सबके पीछे यह भी बजह मानी जा रही है जब रॉ मैटीरियल की गुणवत्ता ही सही नहीं तो सैंपल पास कहां से होंगे। गुणवत्ता तो छोड़े मैटीरियल की नकली बेचा जा रहा था तो उससे बनने वाली दवाईयां पास कैसे हो सकती थीं।

ऐसे में अब यह नकली रॉ मैटीरियल मामला जहां ड्रग विभाग के गले की फांस बना हुआ है वहीं बाहर खुले घूम रहे आरोपी जांच और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि आरोपी कब गिरफ्तार होते हैं और कब ड्रग विभाग चार्जशीट पेश करता है। सूत्रों की मानें तो इस पूरी जांच में कहीं न कहीं पैसे का खेल भी जांच और अन्य चीजों को प्रभावित कर रहा है।

हालांकि हम इसकी पुष्टि नहीं करते लेकिन तीन महीने से अगर आरोपी खुले घूम रहे हैं तो निष्पक्ष जांच को कहीं न कहीं किसी न किसी तरीके से प्रभावित जरूर किया जा रहा है। लेकिन इस मामले में बिना आरोपियों की गिरफ्तारी के चार्जशीट पेश करना जहां समझ से परे है वहीं विभाग की जांच और कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है। उधर, स्टेट ड्रग कंट्रोलर नवनीत मारवाह का कहना है के मामले में जांच और कार्रवाई चल रही है। आईओ से बात करके आगामी जो भी होगा उसकी जानकारी जरूर सांझा की जाएगी।