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बाल विवाह एक कानूनी अपराध एवं सामाजिक कलंक- एसडीएम

Ankita 30 Apr 2024 Edited 30 Apr 1 min read

HNN/ मंडी

एसडीएम पधर सुरजीत सिंह की अध्यक्षता में बाल विवाह रोकने व बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रति जागरूक करने को लेकर बैठक का आयोजन पंचायत समिति भवन पधर में किया गया। बैठक में एसडीएम पधर सुरजीत सिंह ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति तथा गैरकानूनी है।

इसकी रोकथाम के लिए कानूनी प्रविधानों के कार्यान्वयन के साथ-साथ समाज में जागृति लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के को नाबालिग माना जाता है और नाबालिगों द्वारा किया विवाह गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह करवाने या बढ़ावा देने में सहायक व्यक्तियों को 2 साल तक की सजा और 1 लाख रूपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। एसडीएम ने कहा कि बाल विवाह होने की सूरत में संबंधित अभिभावकों, सलिप्त मैरिज हॉल, पंडित, मौलवी, अभिभावक, रिश्तेदार, पड़ोसी, बैंडवाले, टैंटवाले , डीजे और कैटर्स भी अपराध की श्रेणी में आते हैं तथा उनको भी कड़ी सजा व जुर्माने का प्रावधान है।

बैठक में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों -कर्मचारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों, पुजारियों, केटरर, टैंट हाउस व डीजे वालों से आह्वान किया कि तुरन्त इसकी सूचना संबन्धित अधिकारियों को देकर बाल विवाह जैसी बुराई को जड़ से खत्म करने में सभी अपना सहयोग दें। उन्होंने बाल विवाह की शंका को देखते हुए लड़का-लड़की के बालिग होने की पुष्टि हेतु इनके जन्म तिथि से संबंधित कागजात अवश्य देखने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह के आयोजन से संबंधित जानकारी जिलाधिकारी, उपमण्डलाधिकारी, बाल विकास निषेध अधिकारी (सीडीपीओ), नजदीकी पुलिस थाना को देने या फिर पुलिस हेल्पलाइन नम्बर 100, चाइल्ड हेल्प लाईन नम्बर 1098 व 1090 पर सूचित करने के लिए कहा ताकि तत्काल कारवाही सुनिश्चित हो सके।