मक्की की फसल पर सुंडी(कीट)का हमला, किसानों की बढ़ी चिंता

By Ankita Published: 9 Jul 2023, 1:03 PM | Updated: 9 Jul 2023, 1:03 PM 1 min read

HNN/ ऊना/ वीरेंद्र बन्याल

चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र एवं उप तहसील जोल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चौकीमन्यार एवं ग्राम पंचायत खरयालता के गांव तलमेहडा एवं आसपास के गांवों में मक्की की फसल पर सुंडी के हमले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

इस पर कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश होने के बाद यह फसल नाशिक कीट खत्म हो जाएगा। लेकिन यह अभी तक फसलों को तवाह कर रहा है। सुंडी के हमले से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इस पर किसान रिटायर्ड मेजर रघुवीर सिंह डढवाल, पवन शर्मा ,विनोद शर्मा, मक्खन सिंह ,शिवम कुमार, जोगिंदर सिंह ,हरदीप सिंह ,रोशन लाल, जीवन मोदगिल ,डॉ.मदन लाल ने बताया कि 20 जून को जिले में बारिश होने के बाद मक्की की बिजाई की गई थी।

खेतों में पर्याप्त नमी होने के कारण पौधे भरपूर उगे हैं। इससे किसानों को अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी ,लेकिन पिछले साल की भांति इस वर्ष भी फसल पर सुंडी कीट ने हमला कर दिया है ,जो पौधों को चट कर रही है। सुंडी पौधे के तने को खा रही है। इससे अधिकतर पौधे खराब हो रहे हैं। किसानों ने बताया कि कृषि विशेषज्ञ ने बताया था कि *क्लोरपीरिफॉस* दवा का छिड़काव करने से सुंडी रोग पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन दवा भी बेअसर साबित हो रही है। इतना ही नहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर बारिश होती रही तो भी सुंडी रोग पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन उनके द्वारा लगाया गया यह अनुमान भी सही साबित नहीं हो रहा है। किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि फसल के नुकसान की भरपाई की जाए।

क्या कहते हैं कृषि विभाग अधिकारी कुलभूषण धीमान….

कृषि विभाग अधिकारी ऊना कुलभूषण धीमान ने किसानों को सलाह दी है कि कौराजेन 4 मिलीलीटर 10 लीटर, थायडीकार्व 75 डब्ल्यूपी 10 ग्राम प्रति 10 लीटर, क्लोरपीरिफॉस 20 ईसी दवा को 20 मिलीलीटर मात्रा 10 लीटर पानी में मिलाकर या सिपनोसैड 45 एससी 3 मिलीलीटर 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें फिर 15 दिन के बाद दोबारा छिड़काव करें।

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के पास कौराजेन कीटनाशक सभी विकास खंडों में उपलब्ध करवा दी गई है। कौराजेन स्प्रे को सुबह के शुरुआती घंटों में या शाम के समय करना चाहिए और सप्रे नोजल को पत्ती भंवर की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए। जिसमें लार्वा आमतौर पर फीड करते हैं। इसके उपरांत बुआई के 18 -22 दिन के बाद सप्रे को दोहराएं। जिससे मक्खी को कीटनाशक से बचाया जा सके।