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मेडिकल कॉलेज नाहन में रैगिंग के मामले में 9 प्रशिक्षु एमबीबीएस डॉक्टर निलंबित

PARUL • 7 Mar 2024 • 1 Min Read

HNN/नाहन

डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में रैगिंग के एक मामले में कॉलेज प्रबंधन ने 9 एमबीबीएस प्रशिक्षु डाक्टरों को 45 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। साथ ही इन पर  50,000-50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जांच के बाद ये कार्रवाई अमल में लाई है। बता दें कि अब तक मेडिकल कॉलेज में इस तरह का बड़ा मामला सामने नहीं आया था।

लिहाजा, 2016 में खुले इस कॉलेज में इस तरह का पहला मामला हो सकता है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव तुली ने बताया कि वर्ष 2022 बैच के 9 छात्र 4 मार्च को मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के हॉल में 2023 बैच के जुनियर छात्रों की रैगिंग में शामिल पाए गए हैं। प्रबंधन के अनुसार जूनियर छात्रों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।

लिहाजा, मामले की गंभीरता को देखते हुए इन्क्वायरी कमेटी (छात्र कल्याण सलाहकार कमेटी) ने इसकी जांच की। इसके बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पर विचार किया और इन 9 छात्रों को 45 दिनों के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया है। साथ ही जुर्माना भी लगाया गया है।

कमेटी की ओर से लिए गए निर्णय के अनुसार अब इन छात्रों को एक वर्ष की अवधि के लिए किसी भी खेल या साहित्यिक समारोह में भाग लेने की भी अनुमति नहीं दी जाएगी। कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. राजीव तुली ने मामले की पुष्टि की है।

किराए के भवन में चल रहा है मेडिकल कॉलेज का हॉस्टल

कॉलेज से 4 किलोमीटर दूर है गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल

दोनों हॉस्टल केवल दो सुरक्षा गार्ड्स के हवाले रहता है। बड़ी बात तो यह है कि यह गार्ड भी कोई प्रशिक्षित गार्ड नहीं है बल्कि निजी कंपनी द्वारा रखे गए युवा हैं। ऐसे में शहर से दूर बनाए गए इस निजी भवन में चल रहे हॉस्टल में प्रशिक्षू फ्रेशर छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

हैरान कर देने वाली बात तो यह भी है कि ऑल इंडिया मेडिकल काउंसिल के अनुसार मेडिकल कॉलेज बनाए जाने से पहले हॉस्टल और प्रशासनिक भवन कॉलेज परिसर में ही होना चाहिए। यही नहीं इसका निर्माण मेडिकल कॉलेज के शुरू किए जाने के साथ ही होना जरूरी होता है। ऐसे में रैगिंग जैसा मामला सामने आने को लेकर कहीं ना कहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन भी जिम्मेवार माना जा रहा है।

बता दें कि अव्यवस्थाओं को लेकर भी मेडिकल कालेज नाहन कई बार सुर्खियों में रहा है। अब इस तरह का मामला सामने आने के बाद कालेज प्रबंधन को किरकरी का सामना करना पड़ा है। हालांकि ऐसा मामला पहली मर्तबा सामने आया है और मेडिकल कालेज ने तुरंत इस मामले में संज्ञान लेकर कड़ा संदेश भी दिया है। ताकि इस तरह के मामले की पुनरावृत्ति न हो।

बताया जा रहा है कि इस मामले में कालेज प्रबंधन ने बीते बुधवार शाम एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक को आनन-फानन में बुलाया। इसमें एसी टू डीसी, डीएसपी, मेडिकल काॅलेज के संयुक्त निदेशक के अलावा कालेज प्रधानाचार्य व सदस्य मौजूद रहे। मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की घटना को लेकर खासी हलचल थी। 2023 बैच के प्रशिक्षु भी काफी घबराए हुए थे।

क्षेत्रीय अस्पताल से स्तरोन्नत हुए मेडिकल कालेज को सात साल का वक्त बीत चुका है, लेकिन यहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए के लिए हास्टल समेत जैसी कई सुविधाओं का भी अभाव है।

मेडिकल कालेज प्रबंधन ने एक निजी हास्टल को रेंट पर लिया है, जिस पर प्रतिमाह किराये और खाने पर खर्च कर रही है। किराये पर लिया हास्टल भवन भी शहर से तीन किलोमीटर दूर है। कई तमाम सुविधाएं जो प्रशिक्षुओं को मिलनी चाहिए, वो भी आज तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।