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रश्मि प्रकाशन ने नाहन में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन एवं पुस्तक समीक्षा बैठक का किया आयोजन

Ankita • 1 Oct 2023 • 1 Min Read

HNN/ नाहन

सफाई घर की करते हैं बड़े जतन से हम, गली में कचरा फेंकना तो गुप्तदान है.., कवि दीपचंद कौशल ने इस कविता से उन लोगों को आईना दिखाने का प्रयास किया, जो शहर को गंदा करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रहे। रश्मि प्रकाशन की ओर से नाहन में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन एवं पुस्तक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।

इसमें पेंशनर एवं वरिष्ठ कल्याण संघ के जिला अध्यक्ष राम स्वरूप चौहान ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता शबनम शर्मा ने की। मंच का संचालन दीप राज विश्वास ने किया। कार्यक्रम के दौरान रश्मि प्रकाशन के संपादक व प्रकृति पन्नों से के लेखक दीन दयाल वर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। पहले सत्र में कवि चिरआनंद व शबनम शर्मा ने दीन दयाल वर्मा द्वारा लिखे काव्य संग्रह प्रकृति पन्नों से.., पर अपने विचार प्रस्तुत किए। दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन हुआ।

सबसे पहले डा. ईश्वर राही ने हे मानव, चेत जा, वरना बहुत पछताएगा.., कविता पेश की। इसके बाद अनमोल शर्मा ने भज मन वासुकि.., डा. श्रीकांत अकेला ने अब मुझे भी चाहिए अपना आसमान.., धनवीर सिंह परमार ने गांधी जी का मूल मंत्र था.., कविता पढ़ी। दीपराज विश्वास ने हजार गम छुपे हुए हैं, इक खुशी की आड़ में.., राज कुमार सैनी ने कैसे कर दूं मैं मुल्क उसके हवाले सैनी.., शून्य विनोद ने न मां के लिए हमारे जैसा कोई था.., विकास कश्यप ने नदियां, झीलें, पेड़ पौधे इस धरती की शान हैं.., से रंग जमाया।

मीनाक्षी वर्मा ने लग जाते वर्षो आम के वृक्षों को फल देने में.., डा. शबाना सैय्यद ने न तो आके ही जा सके.., चिर आनंद ने याद रखकर भव सागर में कागज की नैया तेरी.., कविता सुनाई। इस मौके पर दीन दयाल वर्मा, मीरा वर्मा, रिश्म वर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।