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रूपी वैली की किस्मत बदलेगी 24.4 किमी सड़क, पहाड़ की चुनौती को इंजीनियरिंग से मिलेगी मात

Shailesh Saini • 53 Mins Ago • 1 Min Read

हिमाचल नाऊ न्यूज़ किन्नर |

किन्नौरकिन्नौर की ऊंची और दुर्गम पहाड़ियों के बीच सड़क बनाना महज निर्माण कार्य नहीं, बल्कि हर मोड़ पर प्रकृति से मुकाबला करने जैसा है। इसी चुनौती के बीच चौरा (निगुलसरी) से मझगांव तक 24.400 किलोमीटर लंबी सड़क अब रूपी वैली के लिए नई लाइफलाइन बनने जा रही है।

पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम चरण में शिमला जोन को मिली परियोजनाओं में इसे सबसे लंबी और दुर्गम क्षेत्र की सड़कों में शामिल किया गया है।करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क कच्चे मार्ग को पक्की सड़क में बदलने तक सीमित नहीं है।

पहाड़ी भूगोल को ध्यान में रखते हुए परियोजना में सुरक्षा और जल निकासी के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सड़क के साथ 1319 पैरापिट, 40 पुलियां और 12 कलवर्ट बनाए जाएंगे। बारिश के पानी को सड़क से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए 3624 मीटर लंबी वी-आकार की नालियां भी तैयार होंगी।

इसके अलावा सड़क का चौड़ीकरण, टारिंग और डंगों का निर्माण किया जाएगा।पहाड़ के खिलाफ नहीं, पहाड़ के साथ सड़क निर्माण की चुनौतीकिन्नौर जैसे संवेदनशील और दुर्गम इलाके में सड़क निर्माण की असली परीक्षा तब होती है, जब खड़ी ढलानों, गहरी घाटियों, बारिश के पानी और बर्फबारी के बीच सड़क को टिकाऊ बनाया जाना हो।

यही वजह है कि इस परियोजना में सिर्फ सड़क की सतह नहीं, बल्कि उसके दोनों ओर सुरक्षा और पानी की निकासी की व्यवस्था पर भी खास जोर दिया गया है।चौरा से मझगांव तक मौजूदा कच्चा मार्ग अब पक्की सड़क में तब्दील होगा।

सड़क तैयार होने के बाद रूपी वैली के दो पंचायत क्षेत्रों के सैकड़ों लोगों को सीधे एनएच-05 से बेहतर संपर्क मिलेगा। इससे अस्पताल, स्कूल, बाजार और रोजमर्रा की आवाजाही के साथ कृषि-बागवानी उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी।

बागवानों और किसानों के लिए भी खुलेगा आसान रास्ताकिन्नौर की अर्थव्यवस्था में बागवानी और कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में सड़क का बेहतर होना ग्रामीणों के लिए केवल यात्रा सुविधा नहीं, बल्कि उनकी उपज को समय पर बाजार तक पहुंचाने से भी जुड़ा है।

बेहतर सड़क संपर्क से परिवहन की मुश्किलें कम होने और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।दुर्गम क्षेत्र में सड़क निर्माण का जिम्मा संभालने वाले लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरिंग टीम को प्रदेश में सड़क निर्माण के ‘विश्वकर्मा’ के रूप में भी देखा जाता है।

चौरा-मझगांव जैसी परियोजना में यह चुनौती और बड़ी है, क्योंकि यहां सड़क को पहाड़ की परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षित और टिकाऊ बनाना सबसे अहम पहलू है।

2028 तक पूरा करने का लक्ष्यलोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता विजय कुमार चौधरी के अनुसार सड़क को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि यह शिमला जोन में पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम चरण में अवार्ड हुई सड़कों में सबसे लंबी और दुर्गम क्षेत्र की सड़क है। निर्माण कार्य विभाग की निगरानी में किया जा रहा है और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

परियोजना का टेंडर एसएस एसोसिएट्स को अवार्ड हुआ है, जबकि सड़क निर्माण का ठेका संजय सिंघल को दिया गया है।24.4 किलोमीटर की यह सड़क पूरी होने के बाद रूपी वैली के लिए बदलाव सिर्फ इतना नहीं होगा कि कच्चा रास्ता पक्का हो जाएगा।

असली बदलाव यह होगा कि पहाड़ों के बीच बसे गांवों को सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग-05 से जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी तैयार होगी। किन्नौर की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बनने वाली यह सड़क आने वाले वर्षों में क्षेत्र की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों के लिए अहम आधार बन सकती है।