हिंसक प्रदर्शन के बाद केंद्र ने छह अक्तूबर को प्रतिनिधियों को बुलाया बातचीत के लिए
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर कल लेह में भड़के छात्रों के आंदोलन का असर आज भी महसूस किया जा रहा है। ताज़ा अपडेट के अनुसार हिंसा में चार लोगों की मौत हो चुकी है और 72 लोग घायल हैं। सीआरपीएफ की गाड़ियों व भाजपा दफ्तर को फूंकने के बाद हालात बिगड़े तो पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और फायरिंग का सहारा लिया। फिलहाल स्थिति प्रशासन के नियंत्रण में है और इलाके में रैली-प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।
लेह
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कल का प्रदर्शन हिंसा में तब्दील
बुधवार को सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में बुलाए गए लेह बंद के दौरान छात्र और स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे थे। मांग थी कि लद्दाख को राज्य का दर्जा मिले और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। लेकिन माहौल अचानक बिगड़ गया और आंदोलन हिंसक हो उठा।
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सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन
घटनाओं के बाद पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने अपना 15 दिन का अनशन तोड़ दिया और युवाओं से हिंसा छोड़कर शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लद्दाख के लिए दुख का दिन है, क्योंकि शांति का संदेश असफल होता दिखाई दे रहा है।
केंद्र और नेताओं की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि लेह जैसे शांतिपूर्ण क्षेत्र में भी अब जनता का सब्र टूटता दिख रहा है। उन्होंने केंद्र से पूछा कि 2019 के बाद वास्तव में क्या बदला है। इस बीच केंद्र सरकार ने छह अक्तूबर को लद्दाख के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाने का निर्णय लिया है।
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