HNN / काँगड़ा
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन भी मां के जयकारों से हिमाचल के शक्तिपीठ गूंज उठे। सुबह जैसे ही शक्तिपीठों में मां की आरती हुई और श्रद्धालुओं के लिए मां का दरबार खोला गया अचानक भारी संख्या में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हिमाचल ही नहीं बल्कि बाहरी राज्यों से भी भारी तादाद में श्रद्धालु सुबह सवेरे माता के दरबार में नमस्ते होने पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है और सीसीटीवी कैमरों के द्वारा निगरानी की जा रही है।
नैना देवी में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, यहाँ गिरे थे माता सती के नेत्र
बिलासपुर जिला में स्थित मां नैना देवी का मंदिर भी देश के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ है। जिसके चलते यहाँ हजारो की तादात में भक्त माता रानी के दर्शन करने पहुंचते है। मान्यता है कि यहां पर माता सती की आंख गिरी थी। जिसके बाद के स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया। यहां पर भी साल भर भक्तों का आना लगा रहता है और नवरात्र पर्व पर भक्तों की खासी भीड़ जुटती है।
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ज्वाला जी 51 शक्तिपीठों में से 1 शक्ति पीठ
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में स्थापित मां ज्वाला जी का मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां पर भगवती सती की जीभ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर गिरी थी। मंदिर में भगवती के दर्शन नवज्योति रूपों में होते हैं। उत्तर भारत के प्रसिद्ध नौ देवियों के दर्शन के दौरान चौथा दर्शन मां ज्वाला जी का ही होता है। यहां पर सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है और नवरात्र पर्व पर यहां उत्सव सा माहौल होता है।
मां चिंतपूर्णी मंदिर में गिरे थे पार्वती के पांव
ऊना जिला के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक मां चिंतपूर्णी का मंदिर छिन्नमस्तिका के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर मां पार्वती के पांव गिरे थे। यहां पर साल में 3 बार मेलो का आयोजन होता है। पहला चैत्र मास के नवरात्रे ,दूसरे श्रवण मास के नवरात्रे और तीसरे शारदीय नवरात्र।
चामुंडा मंदिर में गिरे मां शक्ति के पैर
हिमाचल का प्रसिद्ध एक और शक्ति पीठ मां चामुंडा देवी का मंदिर कांगड़ा के पालमपुर के पास स्थित है। यह मंदिर धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में काफी विकसित है। 51 शक्तिपीठों में से मां चामुंडा का मंदिर भी एक शक्तिपीठ है। मान्यता है कि यहां पर माता के चरण गिरे थे जिसके बाद यह शक्तिपीठ के रूप में स्थापित हो गई। नवरात्र पर पर यहां विषय पूजा अर्चना की जाती है। सुबह के समय यहां पर सप्तचंडी का पाठ किया जाता है।
बृजेश्वरी मंदिर में गिरा था मां सती का बाया वक्षस्थल
बृजेश्वरी देवी मंदिर को कांगड़ा देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भी 51 शक्तिपीठों में से एक शक्ति पीठ है। यहां पर भी साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्र पर्व पर यहां मां दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि यहां पर मां सती का बाया वक्ष यहां गिरा था और यह स्थान मां ब्रजेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। इन मंदिरों में भक्तों खुले दिल से चढ़ाते हैं सोना-चांदी बाजार में भले ही सोने चांदी की कीमतें आसमान छू रही हो, लेकिन इन मंदिरों में भक्त खुले दिल से सोना और चांदी चढ़ाते हैं।
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