अत्री बोले बच्चे सिनेमा के माध्यम से मनोरंजन के रूप में सीखते हैं जल्द
HNN/नाहन
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में एक शिक्षक ने शिक्षा को रूचिपूर्ण और सरल बनाने के लिए एक अनोखा प्रयास किया है। डा. संजीव अत्री ने विज्ञान विषय के शिक्षण में सिनेमा को एक सफल उपकरण और प्रभावी पद्धति के रूप में प्रयोग किया है। उन्होंने स्वयं बहुत सी शैक्षणिक फिल्मों का निर्माण किया और पहले बनी फिल्मों को शिक्षण कक्ष से जोड़ा।
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डा. अत्री का मानना है कि सिनेमा के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया बहुत मनोरंजक और रूचिपूर्ण हो जाती है। उन्होंने विद्यालयों में बाल फिल्म क्लब गठित किए हैं और विद्यार्थियों को शैक्षणिक सिनेमा निर्माण की तकनीकों का प्रशिक्षण भी देते हैं।
उनके निर्देशन में उनके विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिले हैं। डा. अत्री का कहना है कि सिनेमा को शिक्षण से जोड़कर शिक्षा प्रक्रिया से विद्यार्थियों की संज्ञात्मक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। रचनात्मकता भी बढ़ती है। विषय की समझ बढ़ने के साथ-साथ आलोचनात्मक और विश्लेषणात्मक क्षमता में वृद्धि होती है।
वर्तमान में डा. संजीव अत्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल टोकियो में बतौर प्रधानाचार्य तैनात हैं। इसी वर्ष उनकी एक फिल्म ‘सोधी धरती मीठा गुड़’ को भी हैदराबाद में राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।
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