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शिमला संसदीय सीट पर विनय के नाम की चर्चा पर लगा विराम

Shailesh Saini | 20 दिसंबर 2023 at 10:11 am

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भाजपा, कांग्रेस में.. सुरेश कश्यप, रीना, अमित नंदा, विनोद फिलहाल चर्चा में

HNN/शिमला

श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनय कुमार के विधानसभा उपाध्यक्ष बनने के बाद उनका नाम 2024 की चर्चाओं से अब बाहर हो गया है। हालांकि विनय कुमार पूर्व में रही कांग्रेस सरकार के दौरान सीपीएस भी रह चुके हैं। लिहाजा उनकी वरिष्ठता को देखते हुए इस बार उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने अपने किले को मजबूत किया है। जबकि भाजपा ने इस विधानसभा क्षेत्र को आज तक हाशिए पर ही रखा।

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ऐसे में भाजपा के नाराज चल रहे वरिष्ठ लोगों और विधायक को दिए गए अधिमान के बाद 2024 रेणुका विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की हवा का इस्तकबाल करता नजर आता है। विनय कुमार का नाम लोकसभा चुनाव के लिए बतौर प्रत्याशी काफी चर्चा में चल रहा था। गरिमा पूर्ण पद पर आसीन होने के बाद विनय कुमार खुद भी नहीं चाहेंगे कि वह लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे। ऐसे में शिमला संसदीय सीट पर कांग्रेस की ओर से दयाल प्यारी, अमित नंदा और विनोद सुल्तानपुरी के नाम पर अटकलों की चौपाल खूब सज रही है।

अब यदि गंगू राम मुसाफिर पार्टी से बगावत कर विधानसभा चुनाव में न उतरने और दयाल प्यारी के सर पर हाथ रखकर उसको अपना आशीर्वाद देते तो आज वह कांग्रेस का न केवल सरकार में बल्कि भावी प्रत्याशी के रूप में भी दमदार चेहरा होते। अब यदि बात की जाए भाजपा की तो संभवत कांग्रेस वेट एंड वॉच के बाद अपने प्रत्याशी की घोषणा करेगी। रणनीति के अनुसार तो यह माना जा सकता है कि यदि बीजेपी रीना कश्यप को मैदान में उतरती है तो उसकी टक्कर में दयाल प्यारी को कांग्रेस मैदान में उतार सकती है।

ऐसे में यदि दयाल प्यारी के समर्थन में मुसाफिर गिले शिकवे भुला कर दयाल प्यारी का समर्थन करते हैं तो निश्चित ही वह पार्टी में अपनी खोई हुई निष्ठा को फिर से दमदार तरीके से पा सकते हैं। ऐसे में दयाल प्यारी के आगे रीना कश्यप काफी कमजोर साबित रहेगी। अभी-अभी बात की सुरेश कश्यप की तो वह ईमानदार स्पष्टवादी मिलनसार और सैनिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति हैं। अपने गृह क्षेत्र को छोड़कर बाकी 17 विधानसभा क्षेत्र में वह आज भी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि केंद्र सरकार हाल ही में हुए तीन राज्यों के चुनाव में जीत के बाद जातीय समीकरण के संतुलन के फायदे की बात भी करती है।

मगर प्रदेश में यह स्थिति बिल्कुल भी नजर नहीं आती। क्योंकि चारों पार्लियामेंट्री सीटों में पक्ष विपक्ष दोनों बेहतर है। समीकरणों के साथ दोनों ही प्रमुख दल अच्छा खासा दमखम रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिंदुत्व कार्ड और उनका नाम कुछ परसेंट हवा को बनाने में कामयाब होगा बावजूद इसके दोनों पार्टियों की तरफ से कैंडिडेट कौन है जानता उसको लेकर भी काफी ज्यादा सजग और सहज है।

कांग्रेस की ओर से अमित नंदा का नाम काफी चर्चा में चल रहा है तो वही मोदी लहर के आधार पर एक बार फिर से सुरेश कश्यप के नाम पर 2024 की मोहर लगा सकती है। संगठनात्मक नजरिए से देखा जाए तो प्रदेश में भाजपा की स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। पुराने भाजपाई और प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल गुट आज भी हाशिए में नजर आता है।

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