शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया में देवाज्ञा से टूटा आमरण अनशन, ‘नौ तबीन’ एकता को मिली नई दिशा
शाया में ‘नौ तबीन’ की एकता के लिए चल रहा आमरण अनशन देवाज्ञा के साथ समाप्त हो गया। देवगुर द्वारा जल पिलाकर व्रत खुलवाए जाने को क्षेत्र में आस्था और एकता की जीत माना जा रहा है।
संगड़ाह/शाया
देवाज्ञा से समाप्त हुआ अनशन
शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया में ‘नौ तबीन’ की एकता के लिए थानाधार गांव निवासी देवा रविंद्र कंवर का आमरण अनशन तीसरे दिन देवाज्ञा के साथ समाप्त हो गया। देवता के देवा (गुर) ने स्वयं जल पिलाकर उनका व्रत खुलवाया, जिसे क्षेत्र में धर्म, आस्था और विश्वास की विजय के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक के निर्देश और देवाज्ञा
स्थानीय देवस्थल में महाराज की हवा के दौरान पुजारी को शावगियों को बुलाकर बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद गुर वेद प्रकाश के माध्यम से देवाज्ञा हुई, जिसके उपरांत देवा रविंद्र कंवर ने अनशन समाप्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास था कि महाराज किसी स्थानीय माध्यम से उनके प्रयास का समर्थन अवश्य करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवता के आदेश के अनुसार ही उन्होंने अन्न-जल ग्रहण किया।
भजन-कीर्तन और कृतज्ञता
अनशन समाप्ति के बाद रात्रि में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके पश्चात देवा रविंद्र कंवर ने महाराज के सेवकों के साथ हरिद्वार जाकर गंगा स्नान कर कृतज्ञता व्यक्त करने की बात कही।
एकता की दिशा में सकारात्मक संकेत
इस पहल के बाद ‘नौ तबीन’ को एक मंच पर लाने की दिशा में सकारात्मक वातावरण बना है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि देवाज्ञा से समाप्त हुआ यह अनशन सामाजिक समरसता और पारंपरिक एकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।