संगड़ाह / बुरास की बहार से दहके संगड़ाह के जंगल
Himachalnow / कुल्लू
संगड़ाह क्षेत्र में बुरास के लाल फूलों से सजे पहाड़ इन दिनों सैलानियों के लिए प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और सोशल मीडिया पर भी इनकी खूब चर्चा हो रही है। वहीं स्थानीय महिलाएं और किसान बुरास से जूस, जैम व अन्य उत्पाद बनाकर आजीविका के नए अवसर तलाश रहे हैं, हालांकि इस पहल को मजबूत करने के लिए बेहतर बाजार और सरकारी सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।
संगड़ाह
उपमंडल संगड़ाह के जंगल इन दिनों बुरास की बहार से दहक उठे हैं। ऊंची पहाड़ियों पर दूर-दूर तक फैले लाल फूलों ने पूरे इलाके को ऐसा रंग दिया है कि जंगल किसी विशाल गुलाब वाटिका जैसे दिखाई दे रहे हैं। सड़कों के किनारे और पहाड़ी ढलानों पर खिले बुरास के फूल न केवल स्थानीय लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानियों के लिए भी यह नजारा खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।समुद्र तल से करीब 5500 से 11500 फुट की ऊंचाई वाले संगड़ाह क्षेत्र के सदाबहार हिमालयी जंगलों में इन दिनों बुरास पूरी शान के साथ खिला हुआ है। संगड़ाह से गत्ताधार, नौहराधार, हरिपुरधार और राजगढ़ की ओर जाने वाले मार्गों पर सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में फैले बुरास के पेड़ों ने पहाड़ों की तस्वीर ही बदल दी है। दूर से देखने पर यह पूरा इलाका लाल चादर ओढ़े दिखाई देता है।
इन दिनों क्षेत्र में आने वाले सैलानियों के कदम इन जंगलों की ओर खुद-ब-खुद खिंच रहे हैं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली सहित आसपास के राज्यों से आने वाले पर्यटक बुरास के फूलों के बीच रुककर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। कई लोग फूलों के साथ सेल्फी और फोटो शूट कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी संगड़ाह के बुरास वन लगातार छाए हुए हैं और इनकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ बुरास स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी उम्मीद का फूल बनता जा रहा है। हिमाचल का राज्य पुष्प बुरांश, जिसे क्षेत्र में बुरास कहा जाता है, औषधीय गुणों के कारण लंबे समय से खास महत्व रखता है। इसी कारण अब यह केवल जंगल की शोभा भर नहीं रहा, बल्कि कई परिवारों के लिए आय का जरिया भी बन रहा है।
संगड़ाह क्षेत्र के कुछ किसान हर साल वन विभाग की अनुमति के बाद जंगलों से बुरास के फूल एकत्र करते हैं। इन फूलों का उपयोग जूस, जैम, स्क्वैश और चटनी जैसे उत्पाद बनाने में किया जाता है। क्षेत्र की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भी इस दिशा में सराहनीय पहल की है। वर्ष 2021 से विकास खंड संगड़ाह के करीब दो दर्जन समूहों की महिलाएं बुरास आधारित उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजार में बेच रही हैं।हालांकि शुरुआत उत्साहजनक रही, लेकिन बाजार और सरकारी प्रोत्साहन के अभाव ने इस पहल की रफ्तार को कमजोर कर दिया। कई महिलाएं अच्छी पहल के बावजूद आगे नहीं बढ़ सकीं। इसके बावजूद जो समूह अब भी काम कर रहे हैं, वे स्थानीय स्तर पर बुरास को आजीविका से जोड़ने की मिसाल बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 में संगड़ाह क्षेत्र की महिलाओं को बुरास से जूस, जैम और चटनी तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद कई महिलाओं ने इस काम को अपनाया और स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाए। पंचायत समिति स्तर पर महिलाओं के लिए बिना किराये की दुकान भी उपलब्ध करवाई गई थी, ताकि वे अपने उत्पाद बेच सकें।ग्रामीणों का मानना है कि यदि संगड़ाह क्षेत्र में रोडोडेंड्रॉन और फलों पर आधारित कोई छोटा प्रसंस्करण उद्योग स्थापित हो जाए तो यह क्षेत्र के लिए बड़ी आर्थिक संभावना बन सकता है। इससे जंगल की यह प्राकृतिक नेमत सैकड़ों परिवारों के लिए स्थायी आजीविका का साधन बन सकती है। साथ ही पर्यटन को भी बड़ा सहारा मिलेगा।
सेवानिवृत्त उद्यान विशेषज्ञ डॉ. यू.एस. तोमर के अनुसार राजगढ़ स्थित जूस संयंत्र में हर साल बड़ी मात्रा में बुरास के फूलों की जरूरत रहती है। ऐसे में यदि संगड़ाह क्षेत्र में संगठित स्तर पर संग्रहण और प्रसंस्करण की व्यवस्था हो तो यह किसानों और महिलाओं दोनों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।फिलहाल बुरास की बहार ने संगड़ाह के जंगलों को फिर सुर्खियों में ला दिया है। लाल फूलों से सजे ये पहाड़ जहां प्रकृति प्रेमियों को लुभा रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों के लिए यह मौसम उम्मीद, सुंदरता और संभावनाओं का संदेश भी लेकर आया है।