शिलाई – हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम काफोटा महाविद्यालय में देखने को मिला, जहां केंद्रीय छात्र परिषद द्वारा संस्कृत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कुलदीप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए भी युवा पीढ़ी अपनी मूलभूत पहचान से जुड़े हुए हैं, जो हमारी संस्कृति की शक्ति को दर्शाता है।
संस्कृति और कलाओं का अनूठा प्रदर्शन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस विशेष आयोजन में महाविद्यालय के छात्रों ने कविता पाठ, नृत्य, लोक नृत्य और गायन जैसी विविध प्रस्तुतियाँ देकर समां बांध दिया। कविता पाठ में सामाजिक कुरीतियों पर तीखे शब्दबाण चले, जिनमें छात्रों ने समाज में व्याप्त असमानताओं और समस्याओं को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।
नृत्य और संगीत ने मोहा मन
छात्रों ने पारंपरिक और समकालीन नृत्य शैलियों का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक नृत्य की प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की महक को जीवंत किया, वहीं गायन में छात्रों ने अपनी सुमधुर आवाज से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया।
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प्राचार्य ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम में छात्रों की प्रस्तुतियों की भरपूर सराहना की गई। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कुलदीप सिंह ने विद्यार्थियों के उत्साह की प्रशंसा करते हुए कहा कि आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए सभी को मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करना चाहिए। महाविद्यालय केंद्रीय छात्र परिषद के समन्वयक प्रो. रिंकू अग्रवाल ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को इस आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
महाविद्यालय परिवार की विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. विपिन सिंह, प्रो. सुमित्रा नेगी, प्रो. रवीना, प्रो. अनिकेत पुंडीर, दिनेश पुंडीर और राहुल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
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