सरकार ने हटाया डिजास्टर एक्ट, अब हिमाचल में पंचायत और नगर निकाय चुनाव की राह साफ

By हिमांचलनाउ डेस्क नाहन Published: 5 Mar 2026, 7:25 PM | Updated: 5 Mar 2026, 7:25 PM 1 min read

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी वह आदेश वापस ले लिया है, जिसके कारण पंचायत और शहरी निकाय चुनाव स्थगित हुए थे। इस निर्णय के बाद राज्य में लंबित स्थानीय निकाय चुनाव कराने की प्रक्रिया अब आगे बढ़ सकेगी।

शिमला

डीएमए आदेश वापस, चुनाव का रास्ता साफ

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम (DMA) के तहत जारी उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसके चलते राज्य में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव टाल दिए गए थे। यह आदेश 08 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था बाधित होने का हवाला दिया गया था।

छह महीने बाद सामान्य हुए हालात

राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अनुसार अब प्रदेश में हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं। इसी के चलते लगभग छह महीने बाद सरकार ने उक्त आदेश को वापस लेने का निर्णय लिया है, जिससे लंबित पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

अदालती निर्देशों के बाद लिया गया निर्णय

यह फैसला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद लिया गया है। अदालत ने राज्य सरकार को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के पुनर्गठन से जुड़ी प्रक्रियाएं 28 फरवरी 2026 तक पूरी करने और इसके आठ सप्ताह के भीतर चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।

उच्चतम न्यायालय ने भी दिए निर्देश

यह मामला उच्चतम न्यायालय तक भी पहुंचा था। 13 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग, शहरी विकास विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को 31 मार्च 2026 तक सभी लंबित प्रक्रियाएं पूरी करने का निर्देश दिया था। साथ ही चुनाव प्रक्रिया 31 मई 2026 तक पूरी करने को कहा गया था।

पंचायत और नगर निकायों का कार्यकाल हो चुका समाप्त

उल्लेखनीय है कि राज्य में पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो चुका है, जबकि 47 नगर निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 17 जनवरी को खत्म हो गया था। चुनाव में देरी के कारण सभी पंचायतों और 47 से अधिक शहरी निकायों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर उठे सवाल

पर्यवेक्षकों का मानना है कि लंबे समय तक प्रशासकों के माध्यम से स्थानीय निकायों का संचालन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जाता। उच्चतम न्यायालय ने भी हाल में राज्य की विशेष अनुमति याचिका पर आंशिक राहत देते हुए 31 मई से पहले पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।