सामान्य वर्ग को चुनाव लड़ने का अवसर न मिलने पर उठे सवाल, रोस्टर बदलाव की मांग
Himachalnow / नाहन
जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले जिला परिषद वार्ड नंबर-2 दानाघाटों (संगड़ाह) के पिछले 30 वर्षों से लगातार आरक्षित रहने के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में सामान्य वर्ग के लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर न मिलने का मुद्दा उठाया गया है।
सिरमौर/नाहन
जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले जिला परिषद वार्ड नंबर-2 दानाघाटों (संगड़ाह) के पिछले 30 वर्षों से लगातार आरक्षित रहने के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में सामान्य वर्ग के लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर न मिलने का मुद्दा उठाया गया है।
स्थानीय निवासी प्रताप सिंह रावत ने बताया कि यह वार्ड वर्ष 1995 में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक किसी न किसी वर्ग के लिए आरक्षित रहा है। वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव में भी यह वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, जिससे सामान्य वर्ग के पुरुषों को अब तक एक बार भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र और शिमला लोकसभा सीट भी पिछले करीब 50 वर्षों से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में सामान्य वर्ग के लोगों के पास पहले ही विधायक और सांसद चुनाव लड़ने का अवसर नहीं है, वहीं जिला परिषद स्तर पर भी पिछले 30 वर्षों से वे चुनावी प्रक्रिया से बाहर हैं।
रावत के अनुसार वर्ष 1995 से अब तक इस वार्ड का रोस्टर लगातार बदलता रहा, लेकिन हर बार यह किसी न किसी वर्ग या महिला के लिए आरक्षित ही रहा। उन्होंने रोस्टर का विवरण देते हुए बताया कि 1995 से 2000 तक ओपन महिला, 2000 से 2005 तक ओबीसी, 2005 से 2010 तक ओपन महिला, 2010 से 2015 व 2015 से 2020 तक अनुसूचित जाति महिला, 2020 से 2025 तक ओबीसी महिला और अब 2026 में भी महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब हाईकोर्ट के निर्देश पर कई स्थानों पर आरक्षण रोस्टर में बदलाव किया गया, तब भी दानाघाटों वार्ड में कोई परिवर्तन नहीं किया गया, जिससे स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को चुनाव लड़ने का समान अधिकार देता है, लेकिन इस वार्ड में सामान्य वर्ग के लोगों को लगातार इस अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि हाईकोर्ट जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस वार्ड को ओपन करने पर विचार करेगा।
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।