सिरमौर की अदालत ने फिर दिए श्रीरेणुकाजी बांध प्रबंधन की प्रॉपर्टी अटैच करने के आदेश
इतने मार्च तक बांध प्रबंधन ने राशि कोर्ट में नहीं करवाई जमा तो होगी कड़ी कार्यवाही
HNN / सिरमौर
जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी ने प्रस्तावित राष्ट्रीय महत्व के 40 मेगावाट बांध परियोजना की एक बार फिर सभी संपत्तियों को अटैच करने के आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिरमौर की अदालत ने शुक्रवार को जारी किए है। श्रीरेणुकाजी बांध विस्थापितों मौजा बोंगली बयालक की सुनवाई करते हुए अदालत ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के 2020 के फैसले के अनुसार विस्थापितों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि ना दिए जाने के फैसले पर शुक्रवार को यह आदेश जारी किए हैं। मौजा बोंगली बयालक के करीब 80 विस्थापितों ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में मुआवजे के लिए केस दायर किया हुआ था।
विस्थापितों की ओर से केस की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता एमपी कंवर कर रहे थे। विस्थापितों की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एमपी कंवर ने बताया कि अदालत ने 25 मार्च तक मौजा बोंगली बयालक के विस्थापितों के 22 करोड़ की मुआवजा राशि कोर्ट में जमा करने के आदेश दिए हैं। यदि श्रीरेणुकाजी बांध प्रबंधन कोर्ट में 25 मार्च तक मुआवजे के 22 करोड रुपए जमा नहीं करवाता है, तो 25 मार्च की सुनवाई में बांध प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्यवाही भी की जाएगी।
बता दें कि इससे पहले भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 2 दिसंबर 2022 को मौजा दीद बगड़ के करीब 100 विस्थापितों को 42 करोड़ का मुआवजा राशि ना दिए जाने पर श्रीरेणुकाजी बांध प्रबंधन की प्रॉपर्टी अटैच करने के आदेश दिए थे। साथ ही बांध प्रबंधन को 1 माह की 42 करोड़ रुपए की राशि कोर्ट में जमा कराने के निर्देश दिए थे, जिसकी एवज में बांध प्रबंधन 54.18 करोड़ रुपए की राशि 2 जनवरी से पहले जमा करवा दी थी। विदित रहे कि श्रीरेणुकाजी बांध निर्माण से हिमाचल को 40 मेगावाट निशुल्क बिजली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को 23 लाख क्यूसेक पानी तथा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड को सिंचाई के लिए पानी मिलना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्रीरेणुकाजी बांध का शिलान्यास 27 दिसंबर 2021 को किया गया था। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी बांध निर्माण से संबंधित कार्य शुरू नहीं हुआ है। उधर विस्थापितों के अधिवक्ता एमपी कंवर ने बताया कि मौजा बोंगली बयालक के विस्थापितों के मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने 22 करोड रुपए की राशि 25 मार्च तक कोर्ट में जमा करने के निर्देश दिए हैं। यदि बांध प्रबंधन राशि जमा नहीं करवाता है, तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
उधर, इस संदर्भ में एचपीपीसीएल के सिविल डायरेक्टर सुरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि श्रीरेणुकाजी बांध प्रबंधन में हिमाचल की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तथा केंद्र व अन्य राज्यों की 90 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश सरकार अपनी हिस्सेदारी से अधिक राशि खर्च कर चुकी है। जैसे ही केंद्र सरकार से राशि मिलेगी, कोर्ट के निर्णय के अनुसार मुआवजा राशि कोर्ट में जमा करवा दी जाएगी।
