सिरमौर प्रशासन की स्कूल बंद नोटिफिकेशन पर लगा सवालिया निशान
बच्चों पर आपदा का सकट मगर नोटिफिकेशन में अध्यापकों पर आपदा रहेगी बे- असर
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन
लगातार हो रही भारी वर्षा और भारतीय मौसम विज्ञान के द्वारा जारी येलो अलर्ट के चलते जहां शिक्षा मंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के आदेश दिए हैं वही प्रदेश के अधिकतर जिलों का प्रशासनिक निर्णय हास्य पद साबित हो रहा है।
जिला सिरमौर की उपयुक्त और डीडीएमए अध्यक्ष द्वारा जारी नोटिफिकेशन में बच्चों को तो आपदा से रेस्ट दिया गया है मगर शैक्षणिक संस्थानों के अध्यापकों और मिनिस्ट्रियल स्टाफ को स्कूल आना पड़ेगा।
इस नोटिफिकेशन से यह साफ जाहिर हो जाता है कि आपदा बच्चों पर तो भारी पड़ सकती है मगर अध्यापकों पर यह बेअसर साबित होगी। जाहिर है उफनती गड्ढें, नाले और नदियां अध्यापकों का रास्ता नहीं रोक पाएंगी और रास्तों में गिरते लैंडस्लाइड अध्यापकों पर और कर्मचारीयों पर बे असर साबित होंगे ।
हैरानी तो इस बात की है कि जब बच्चे ही स्कूल में नहीं होंगे तो अध्यापक किसे पढ़ाएंगे। हालांकि शिक्षा मंत्री और निदेशक के द्वारा बीते कल सभी के लिए छुट्टी के आदेश दिए गए थे मगर शिक्षा विभाग के द्वारा आदेश जारी नहीं किए गए।
ऐसे में उपायुक्त भी निर्णय लेने की क्षमता में असमर्थ साबि रहे । अब यदि जिस तरीके से मौसम का मिजाज लगातार खतरनाक साबित हो रहा है और कहीं बड़ी अनहोनी हो जाती है तो इसकी जवाबदेही सरकार की होगी या प्रशासन की यह सोचना मुश्किल होगा।
हैरान कर देने वाली बात तो यह भी है कि शिक्षा विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि यदि दोपहर तक कोई अधिसूचना आ जाती है स्टाफ की भी छुट्टी घोषित की जा सकती है। ऐसे में संभवत सरकार और प्रशासन को यह मालूम है की कोई भी आपदा प्रदेश में कहीं भी दोपहर से पहले आने वाली नहीं है।
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 30 का प्रयोग जिला अध्यक्ष कर सकते हैं मगर इस धारा के अंतर्गत जारी आदेशों के तहत शैक्षणिक विभाग के स्टाफ को शामिल नहीं किया गया है।