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सिरमौर में एफडीआर तकनीक से सड़क निर्माण कार्य शुरू

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 7 Jan 2025 • 1 Min Read

Himachalnow / नाहन

टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल तकनीक से सड़कों की उम्र होगी 15-20 साल , पहली बार जमटा-बिरला सड़क पर हुआ ट्रायल

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-3 के तहत कम खर्च में मजबूत और टिकाऊ सड़क निर्माण के लिए एफडीआर (फुल डेफ्थ रिक्लामेशन) तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया है। इस तकनीक से सिरमौर जिले में सड़क निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। नाहन डिवीजन में 21.330 किलोमीटर लंबी जमटा-बिरला सड़क के 100 मीटर पैच का मंगलवार को ट्रायल शुरू किया गया। इस ट्रायल के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और मोहिंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी की टीम मौजूद रही।

लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ई. अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि एफडीआर तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि सड़क निर्माण को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाती है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से बनी सड़कों की उम्र 15 से 20 साल तक हो सकती है। अधिशासी अभियंता आलोक जनवेजा ने बताया कि 19.15 करोड़ रुपये की लागत से जमटा-बिरला सड़क का निर्माण शुरू हो चुका है। यह सड़क अब पहले से चौड़ी और टिकाऊ होगी। सड़क की चौड़ाई 3.05 मीटर से बढ़कर 3.75 मीटर हो जाएगी, जिससे 70 सेंटीमीटर अधिक तारकोल युक्त सड़क तैयार होगी।

इस प्रक्रिया के तहत 100 मीटर के ट्रायल पैच को सात दिन बाद कोर कटिंग के लिए तैयार किया जाएगा। 28 दिनों के भीतर सैंपल रिपोर्ट के आधार पर सड़क के अंतिम चरण में तारकोल बिछाया जाएगा। पूरी सड़क को एक से डेढ़ महीने में तैयार कर लोकार्पण कर दिया जाएगा।

मोहिंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी के सीएमडी मुकेश शर्मा और सतबीर सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी ने उत्तर प्रदेश में एफडीआर तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है। इसके बाद हिमाचल सरकार ने उन्हें यहां की सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में सड़क को मशीन से डिस्मैंटल किया जाता है और फिर उसी सामग्री को ग्रैडर मशीन और पैडफुट रोलर से समतल किया जाता है। इसके बाद सॉयल कंपेक्टर से सड़क की गहराई को मजबूत आधार में बदला जाता है और अंतिम चरण में पीटीआर मशीन से सड़क को फाइनल टच दिया जाता है। इस तकनीक से बनाई गई सड़कें 22 टन से अधिक दाब सहने में सक्षम होती हैं।

यह तकनीक हिमाचल में सड़क निर्माण के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है। पहले 2 से 5 साल में सड़कों की स्थिति खराब हो जाती थी, लेकिन एफडीआर तकनीक से सड़कों की उम्र लंबी होगी। जमटा ट्रायल पैच के साथ-साथ रामपुरघाट और शिलाई में भी इसी तकनीक से सड़कें बनाई जाएंगी। इससे हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा।