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नाबालिग को देह व्यापार में धकेलने वाली सगी मां समेत तीन दोषियों को 10-10 साल का कठोर कारावास

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

कुल्लू की विशेष न्यायाधीश (सत्र न्यायाधीश) अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म, मानव तस्करी और जबरन देह व्यापार से जुड़े बहुचर्चित मामले में पीड़िता की सगी मां समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने मुख्य आरोपियों को विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी मानते हुए प्रमुख अपराधों के लिए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।

कुल्लू

विशेष न्यायाधीश प्रकाश चंद राणा की अदालत ने शिव शंकर उर्फ सिकंदर, नितिन जैन उर्फ मन्नू तथा पीड़िता की सगी मां को भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। मुख्य आरोपी शिव शंकर उर्फ सिकंदर को दुष्कर्म, मानव तस्करी, आपराधिक षड्यंत्र और अनैतिक व्यापार से जुड़े प्रमुख अपराधों में प्रत्येक के लिए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त अन्य धाराओं में भी अलग-अलग अवधि के कठोर कारावास और जुर्माने का आदेश दिया गया है।

सगी मां ने बेटी को धकेला देह व्यापार में

अदालत ने पाया कि पीड़िता की सगी मां ने ही अपनी नाबालिग बेटी को इस अवैध कारोबार में धकेलने में भूमिका निभाई। इसी आधार पर उसे मानव तस्करी, आपराधिक षड्यंत्र तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। साथ ही पॉक्सो अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत भी अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई गई है। सहआरोपी नितिन जैन उर्फ मन्नू को भी मानव तस्करी, पॉक्सो अधिनियम और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए प्रमुख धाराओं में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई। अदालत ने आदेश दिया कि यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।

2018 में दर्ज हुआ था मामला

जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम ने बताया कि यह मामला 29 अप्रैल 2018 को सामने आया था, जब कंसुलर चाइल्ड हेल्प लाइन मनाली की टीम पीड़िता को लेकर पुलिस थाना मनाली पहुंची थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नाबालिग सहित अन्य युवतियों को जान से मारने की धमकी देकर जबरन देह व्यापार में धकेला जाता था। पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया था कि उसकी सगी मां ने ही उसे इस अवैध धंधे में शामिल किया था, जिसके बदले मुख्य आरोपी शिव शंकर उर्फ सिकंदर उसकी मां को प्रति माह 40 हजार रुपये देने वाला था। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने 14 महत्वपूर्ण गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध किए, जिसके बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।

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