बिजली व रेलवे के निजीकरण पर लगाम लगाने की करी मांग
HNN/ शिमला
बिजली व रेलवे के निजीकरण, स्मार्ट प्री पेड मीटर नीति व बिजली विधेयक 2022 के खिलाफ सीटू राज्य कमेटी ने सभी जिला मुख्यालयों, बिजली कार्यालयों व रेलवे स्टेशनों पर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किए। रेलवे स्टेशन शिमला पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशन शिमला पर एकत्रित हुए व दो घंटे तक मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
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प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने स्मार्ट प्री पेड मीटर योजना को वापिस लेने की मांग की। उन्होंने बिजली व रेलवे के निजीकरण पर लगाम लगाने की मांग की। उन्होंने बिजली विधेयक 2022 को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों को बेचने पर आमदा है।
बिजली विधेयक 2022 इसी का नतीजा है। केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र में स्मार्ट प्री पेड मीटर लगाने का फैसला कर चुकी है। हिमाचल सरकार ने भी इन मीटरों को लगाने के लिए टेंडर आमंत्रित कर लिए हैं। स्मार्ट मीटर लगाने व बिजली प्रदान करने के लिए निजी कंपनियों को लाइसेंस दिए जाएंगे। इस तरह बिजली बोर्ड का स्वयं निजीकरण शुरू हो जाएगा।
रेलवे भारत में यातायात का सबसे सस्ता साधन है। केंद्र सरकार रेलवे का निजीकरण कर रही है। रेलवे स्टेशनों को निजी कम्पनियों को कौड़ियों के भाव बेचा जा रहा है। रेल यात्रा लगातार महंगी हो रही है। कई निजी रेल गाड़ियों को चलाने की इजाज़त दे दी गयी है। इन निजी रेल गाड़ियों का किराया बहुत ज़्यादा है।
निजीकरण से आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा तथा रोज़गार कम हो जाएंगे। भारी भरकम किराए से रेलवे का सफर बहुत महंगा हो जाएगा। रेलवे विश्रामालयों के निजीकरण से जनता पर सैंकड़ों रुपयों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। निजीकरण से रेलवे का सस्ता सफर हवाई यात्राओं की तरह महंगा हो जाएगा व बुकिंग टाइम स्लॉट के हिसाब से रेल टिकटों के आरक्षण व किराए में पहले की अपेक्षा दिन रात का अंतर आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्री पेड बिजली स्मार्ट मीटर लगने से मोबाइल फोन की तरह पैसे खत्म होने पर स्मार्ट मीटर काम करना बन्द कर देगा व घर में बिजली आपूर्ति बाध्य हो जाएगी। स्मार्ट मीटर का रेट बहुत ज़्यादा है जिसकी कीमत ग्राहकों से ही वसूली जाएगी। मीटर की लाइफ भी अधिकतम सात से आठ वर्ष होगी।
स्मार्ट मीटर योजना के लागू होने से बिजली क्षेत्र का अपने आप ही निजीकरण हो जाएगा क्योंकि बिजली का वितरण निजी कंपनियों कद हाथों में चला जाएगा। निजी बिजली कंपनियां अपने मुनाफे के लिए सरकारी बिजली बोर्डों द्वारा बनाए गए सब स्टेशनों व अन्य ढांचे का इस्तेमाल करेंगी। इस से बिजली बोर्ड के दफ्तरों व फील्ड में तैनात तकनीकी कर्मचारियों की स्वतः ही नौकरी से छुट्टी हो जाएगी।
जब बिजली बोर्ड के अस्तित्व ही नहीं रहेगा तो फिर पेंशनभोगियों को पेंशन कहां से मिलेगी। स्मार्ट मीटर लगने से उभोक्ताओं का बिजली बिल हज़ारों रुपये आएगा जिस से गरीब जनता व मध्यम वर्ग बिजली से वंचित हो जाएगा। स्मार्ट मीटर लगने से गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों की सब्सिडी बन्द हो जाएगी व उन्हें मुफ्त बिजली नहीं मिलेगी।
कम्पनियां मुनाफा अथवा लाभ कमाने के लिए बहुत ज़्यादा दरों पर बिजली बेचेंगी। कम स्मार्ट मीटर लगने से दिन व रात के समय के बिजली की दरें अलग – अलग हो जाएंगी। बिजली खराब होने पर उसे ठीक करने के दाम जनता से ही वसूले जाएंगे। लघु उद्योगों, दुकानदारों, आटा चक्की व आरा मशीन संचालकों, गरीब व मध्यम वर्ग के लिए स्मार्ट मीटर योजना विनाशकारी साबित होगी।
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