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सूरज लॉकअप हत्याकांड : हिमाचल पुलिस के 8 अफसरों को मिली उम्रकैद

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 27 Jan 2025 • 1 Min Read

सुरक्षा के रखवाले बने दोषी , अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

सूरज लॉकअप हत्याकांड : शिमला के बहुचर्चित गुड़िया कांड में बड़ा मोड़
चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट ने हिमाचल के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में जांच के लिए गठित एसआईटी (विशेष जांच टीम) के आठ पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषियों में पूर्व आईजी आईपीएस जहूर हैदर जैदी, तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी समेत अन्य पुलिस अधिकारी शामिल हैं। कोर्ट ने इन्हें सूरज हत्याकांड में दोषी पाया, जिसमें कोटखाई थाने के लॉकअप में हिरासत में लिए गए नेपाली नागरिक सूरज की पुलिस पिटाई से मौत हो गई थी।

कोर्ट का सख्त रुख
सीबीआई कोर्ट ने दोषी अधिकारियों को आईपीसी की कई धाराओं, जैसे 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक साजिश), 201 (सबूत नष्ट करना), और अन्य संबंधित धाराओं के तहत सजा सुनाई। दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

कैसे खुला सच?
मामले में कोटखाई थाने के संतरी दिनेश की गवाही और डीएसपी मनोज जोशी के मोबाइल में रिकॉर्ड की गई पिटाई की वीडियो ने अहम सबूत के तौर पर काम किया। सीबीआई ने इस मामले में 52 गवाहों को पेश किया। संतरी ने खुलासा किया कि पुलिसकर्मियों ने सूरज को रातभर प्रताड़ित किया, जिसके कारण उसकी मौत हुई।

गुड़िया केस का इतिहास
4 जुलाई 2017 को शिमला के कोटखाई इलाके में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा का शव जंगल में निर्वस्त्र हालत में मिला था। इस मामले में तत्कालीन आईजी जहूर हैदर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई, जिसने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें नेपाली युवक सूरज भी शामिल था। पुलिस ने सूरज से गुनाह कबूल करवाने के लिए उसे प्रताड़ित किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

जनाक्रोश और CBI जांच
इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कोटखाई थाने और गाड़ियों में आगजनी की घटनाएं हुईं। मामला सीबीआई को सौंपा गया, जिसने जांच के दौरान यह पाया कि सूरज की मौत पुलिसकर्मियों की पिटाई से हुई थी।

पहली बार SIT को सजा
यह पहली बार है जब हिमाचल पुलिस की किसी एसआईटी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। यह फैसला हिमाचल में कानून व्यवस्था और जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।