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सेहत की पाठशाला बना कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं

Shailesh Saini 14 Jan 2026 Edited 14 Jan Quick read

बहराल स्कूल के बच्चों ने समझा प्राकृतिक खेती और पोषण का रिश्ता

नाहन

समग्र शिक्षा अभियान के तहत राजकीय उच्च विद्यालय बहराल के छठी से आठवीं कक्षा के 59 विद्यार्थियों ने बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं का शैक्षणिक भ्रमण किया।

भ्रमण का उद्देश्य बच्चों को खेती, पोषण और स्वास्थ्य के आपसी संबंध से परिचित कराना रहा।विद्यार्थियों ने केंद्र की फसल प्रदर्शन इकाई में प्राकृतिक तरीकों से उगाई जा रही विभिन्न सब्जियों को नजदीक से देखा।

उन्होंने जाना कि खेत में उगा भोजन सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है।भ्रमण के दौरान बच्चों को प्राकृतिक खेती की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई।

उन्हें बताया गया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बिना की जाने वाली खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है। इससे भूमि, जल और पर्यावरण सुरक्षित रहता है। प्राकृतिक खेती से उगाई गई सब्जियां अधिक पौष्टिक होती हैं और लंबे समय में कई बीमारियों के खतरे को कम करती हैं।

विद्यार्थियों को वेलेटीना किस्म की बैंगनी फूलगोभी, लाल पत्ता गोभी सहित अन्य किस्मों की गोभी दिखाई गई। इन सब्जियों में मौजूद विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट के बारे में भी जानकारी दी गई, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि प्राकृतिक खेती से न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिलता है, बल्कि किसानों की लागत भी कम होती है।

उन्होंने कहा कि इस पद्धति से मिट्टी की जैविक शक्ति बढ़ती है, उत्पादन टिकाऊ रहता है और किसानों की आय में सुधार होता है।डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में फसल प्रदर्शन इकाई को एक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है।

इसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है और यह भविष्य की खेती का मजबूत आधार है।शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों के साथ शिक्षक रेणु गोस्वामी, मनवीर कौर, नरिंद्र कौर, सुदेश कुमार और सुरेंद्र कौर भी मौजूद रहे।