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मोदी सरकार ने रसोई पर डाला महंगाई का नया बोझ, घरेलू गैस सिलेंडर ₹29 महंगा

Shailesh Saini • 46 Mins Ago • 1 Min Read

तीन महीने में दूसरी बढ़ोतरी, हिमाचल के लाखों परिवारों का बिगड़ा मासिक बजट

हिमाचल नाऊ न्यूज़शिमला/नाहन

देश में महंगाई को लेकर पहले से परेशान आम जनता को केंद्र की मोदी सरकार ने एक और झटका दे दिया है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई बढ़ोतरी के बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹942 तक पहुंच गई है।

तीन महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब घरेलू गैस के दाम बढ़ाए गए हैं।इस फैसले का सबसे ज्यादा असर हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य पर पड़ने वाला है, जहां लाखों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं।

पहले से बढ़ती महंगाई, महंगे राशन, बिजली और अन्य घरेलू खर्चों के बीच गैस सिलेंडर की कीमत में हुई नई वृद्धि ने परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है।लोगों का कहना है कि आय में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हो रही, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।

ऐसे में हर कुछ महीनों बाद गैस सिलेंडर के दाम बढ़ना सीधे तौर पर घरेलू बजट पर हमला है। गृहिणियों का कहना है कि महीने का खर्च संभालना पहले से अधिक मुश्किल होता जा रहा है।ग्रामीण हिमाचल में भी स्थिति अलग नहीं है।

केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत लाखों परिवारों को गैस कनेक्शन तो उपलब्ध कराए, लेकिन अब लगातार बढ़ती कीमतों के कारण कई गरीब परिवारों के लिए सिलेंडर भरवाना चुनौती बनता जा रहा है। कई क्षेत्रों में लोग गैस की बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहे हैं।

राजनीतिक तौर पर भी इस फैसले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि महंगाई पर नियंत्रण के दावे करने वाली सरकार आम आदमी को राहत देने में विफल रही है। उनका कहना है कि पेट्रोल, डीजल, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के बाद अब रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

जानकारों के अनुसार तेल विपणन कंपनियों की अंडर रिकवरी की भरपाई के लिए कीमतों में वृद्धि की गई है। हालांकि आम उपभोक्ता इसे सरकारी नीतियों का सीधा असर मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में रसोई का खर्च कई परिवारों की क्षमता से बाहर हो सकता है।

महंगाई के इस दौर में रसोई गैस की नई कीमतों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर राहत की उम्मीद कर रही जनता को बढ़ती कीमतों से कब राहत मिलेगी।

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