Loading...

स्वरोजगार / हुनर की उड़ान : स्यांज की महिलाएं बुन रहीं आत्मनिर्भरता के सपने

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 5 Jan 2025 • 1 Min Read

Himachalnow / मंडी

हथकरघा की ताकत से आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय लिख रहीं ग्रामीण महिलाएं

मंडी जिले के स्यांज क्षेत्र में महिलाएं अपने हुनर से न केवल अपने सपनों को साकार कर रही हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था में भी नया योगदान दे रही हैं। थमलाह गांव की हीरामणि, एक साधारण गृहिणी, ने अपनी मेहनत और समर्पण से हथकरघा उद्योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया। अपने इस हुनर को व्यवसाय में बदलते हुए, उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि कई महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखाई।

हीरामणि ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई दशक तक घर पर खड्डी का काम किया। 2021 में हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प और हथकरघा निगम के अधिकारियों से मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने स्यांज बाजार में दुकान किराए पर लेकर अपना काम शुरू किया और मास्टर ट्रेनर के तौर पर आठ महिलाओं को एक साल की ट्रेनिंग दी। इन महिलाओं को प्रशिक्षण के दौरान खड्डी और 2400 रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि भी दी गई।

आज हीरामणि किन्नौरी और कुल्लू शैली की शॉल व मफलर तैयार कर हर महीने 15-20 हजार रुपये कमा रही हैं। उनके साथ प्रशिक्षित महिलाएं भी घर से या दुकान पर खड्डी का काम कर रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हथकरघा योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद की है।

भूपेंद्र कुमारी, जो स्यांज गांव की निवासी हैं, ने 2023 में स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद हीरामणि के प्रोत्साहन से खड्डी का काम सीखा। प्रशिक्षण के दौरान तैयार शॉल और मफलरों से उन्होंने कमाई शुरू की। अब वह घर से काम कर हर महीने 10 हजार रुपये तक कमा रही हैं।

नीलम, एक और युवती, जिसने 2021 में स्नातक के बाद कोरोना काल में पढ़ाई छोड़ दी, ने भी इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। अगस्त 2023 में एक साल का प्रशिक्षण लेने के बाद, वह कुशल कारीगर के तौर पर हर महीने 8-10 हजार रुपये कमा रही हैं। ग्वाड़ गांव की उमा देवी भी इसी राह पर चलकर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं।

हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम के मंडी प्रभारी अक्षय सिंह डोट ने बताया कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में जिले में 90 से अधिक लोगों को हथकरघा प्रशिक्षण दिया। इसके तहत 30 लाख रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहित करने का प्रभावी माध्यम बन रही है।

हथकरघा की इस अनूठी पहल से स्यांज की महिलाएं अपने सपनों को नई ऊंचाई दे रही हैं और एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी लिख रही हैं।