HNN / सिरमौर
हालांकि जिला सिरमौर में कांग्रेस की 4 सीटें जीत की होती, मगर विरोधियों की चाल को ना समझते हुए जीआर मुसाफिर भाजपा के झांसे में आ गए। तो वहीं, अब पूरे प्रदेश भर में कांग्रेस जहां प्रचार-प्रसार से लेकर चुनावों तक और अब मंत्रिमंडल के गठन में स्लो एंड स्टेडी विंस थे, रेस का फार्मूला लगातार जारी रखे हुए है। जाहिर सी बात है, कांग्रेस ने एक बड़ी नसीहत लेते हुए अपनी पूर्व में रही तमाम रणनीतियों को काफी हद तक बदलने का प्रयास किया है। इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि कांग्रेस आगे भी लंबी पारी खेलने की तैयारी में है।
हिमाचल से हुई शुरुआत पूरे देश भर में कांग्रेस के लिए एक मिसाल बनी है। एक बात तो कांग्रेसी भी साफ तौर से समझ चुके हैं कि अपना घर छोड़कर जो भी भाजपा में गया है, उसकी बाद में फजीहत ही हुई है। ऐसा दल बदलू भाजपा में जब नजरअंदाज होना शुरू होता है तो वह ना घर का रहता है ना घाट का। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी तक इक्का-दुक्का को छोड़कर किसी ने भी मंत्री पद के लिए सरकार पर दबाव नहीं बनाया है। हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू यह पूरी तरह स्पष्ट कर चुके हैं कि वह हर जिला को सरकार में तवज्जो देंगे।
ऐसे में कांग्रेसी यह देख रही है कि आने वाले समय में लंबी पारी खेलने के लिए युवा वर्ग को ही मंत्रिमंडल में शामिल कर फायदा उठाया जा सकता है। जाहिर है सोलन से जहां धनीराम शांडिल्य की मंत्रिमंडल में मजबूत एंट्री मानी जा रही थी, वही अब संभवत उनकी जगह युवा नेता विनोद सुल्तानपुरी को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। धनीराम शांडिल पार्टी के कर्मठ सिपाही रहे हैं, ऐसे में वे किंग की जगह किंग मेकर की भूमिका ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। उधर, यदि साथ लगते जिला सिरमौर की बात की जाए तो यह जिला कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करता था।
मगर अब भाजपा इस जिला में पूरे प्रदेश भर के ऊपर भारी पड़ी है। सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप सिरमौर जिला से ताल्लुक रखते हैं। ऊर्जा मंत्री रहे सुखराम चौधरी भाजपा का मजबूत चेहरा है। तो वही, नाहन विधानसभा क्षेत्र में सोलन से आने के बाद डॉ. राजीव बिंदल मजबूत साबित हुए थे। डॉ. बिंदल स्वास्थ्य मंत्री भी रहे, विधानसभा अध्यक्ष भी रहे, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रहे, कुल मिलाकर कहा जाए भाजपा के चाणक्य के रूप में उनकी पहचान बनी हुई थी। डॉ. राजीव बिंदल को गेम चेंजर के रूप में जाना जाता है।
मगर इस बार अजय सोलंकी कांटे की टक्कर देते हुए उन्हें पछाड़कर महाबली साबित हुए हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि अगले विधानसभा चुनाव तक भाजपा के बलवान चेहरों को कैसे निर्बल बनाया जाए, इसको लेकर कांग्रेस को अपनी रणनीतियां अभी से बनानी पड़ेगी। एक ओर जहां हर्षवर्धन चौहान को वरिष्ठता और तजुर्बे के आधार पर मंत्रिमंडल में मंत्री पद मिलना लगभग तय है। तो वही, जिला मुख्यालय में अजय सोलंकी को और अधिक मजबूत बनाए जाने की भी कांग्रेस को जरूरत रहेगी। जाहिर सी बात है सरकार के निगम अथवा बोर्ड में सोलंकी को शामिल किया जाना जरूरी भी हो सकता है।
यदि सूत्रों की मानी जाए, तो अजय सोलंकी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अथवा खाद्य आपूर्ति निगम की कमान सौंपी जा सकती है। वही, पच्छाद में कांग्रेस नेत्री दयाल प्यारी को हार के बावजूद कांग्रेस पहले से ज्यादा मजबूत करने की तैयारी में जुट चुकी है। दयाल प्यारी भले ही चुनाव हार गई हो, मगर पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा अपनों के द्वारा घेराबंदी करने के बावजूद भी बनी रहे। यही नहीं, दयाल प्यारी प्रियंका गांधी की भी लाडली साबित हुई है, ऐसे में दयाल प्यारी की ताजपोशी बोर्ड अथवा निगम में किया जाना तय माना जा सकता है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो अगले दो-चार दिन के अंदर अंदर सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए उन चेहरों को भी तवज्जो देगी, जो पार्टी की मजबूती में आने वाले समय में निर्णायक साबित होंगे।

