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हिमाचल में नई उद्योग नीति से लघु उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 21 Sep 2025 • 1 Min Read

एमएसएमई क्षेत्र नवाचार व रोजगार का इंजन – हर्षवर्द्धन चौहान

शिमला

उद्योग, संसदीय कार्य और श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और रोजगार सृजन में इनकी भूमिका अहम है। वह एक क्षेत्रीय कॉन्क्लेव में बोल रहे थे, जिसे एक प्रमुख हिन्दी दैनिक द्वारा आयोजित किया गया था।

नई उद्योग नीति पर काम जारी
हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार नई उद्योग नीति तैयार कर रही है, जिसमें एमएसएमई संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे ताकि नीति अधिक प्रभावी और उद्योग हितैषी बन सके। उन्होंने कहा कि इस नीति में छोटे उद्योगों को विशेष रियायतें और सुविधाएं देने पर जोर होगा।

नियम 118 का सरलीकरण और नई टाउनशिप
उन्होंने कहा कि सरकार हिमाचल प्रदेश काश्तकारी एवं भूमि सुधार अधिनियम 1972 के नियम 118 के सरलीकरण पर विचार कर रही है, जिससे नए उद्योग स्थापित करने में आसानी होगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाली टाउनशिप विकसित करने के लिए भूमि चयनित की जा रही है।

एमएसएमई समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर
उद्योग मंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश स्तर पर एमएसएमई की समस्याओं का समाधान किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में एमएसएमई प्रतिनिधियों के साथ विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।

केंद्र की सहायता में कमी से चुनौतियां
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता में कटौती के कारण राज्य को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये कम प्राप्त हुए हैं, जिससे कई विकासात्मक योजनाओं पर असर पड़ा है। बावजूद इसके, सरकार हिमाचल को आदर्श राज्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।