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हिमाचल में सब्जी उत्पादन बढ़ाने के लिए रिकार्ड 44 सिफारिशें- डा. डीके वत्स

By PARUL Published: 4 May 2024, 3:37 PM | Updated: 4 May 2024, 3:37 PM 1 min read

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में सब्जी फसलों पर आयोजित हुई एक दिवसीय कार्यशाला 

HNN/कांगड़ा

चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में शनिवार को सब्जी फसलों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान प्रदेश में सब्जी उत्पादन बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड 44 सिफारिशें की गई। इस मौके पर मुख्य अतिथि कुलपति डा. डीके वत्स ने अपने उद्घाटन भाषण में भिंडी, शिमला मिर्च, पैपरिका, मिर्च, लाल शिमला मिर्च, टमाटर, फूलगोभी और मटर की नई किस्मों के विकास और सिफारिश के लिए वैज्ञानिकों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि प्रमुख सब्जी फसलों में रोग और कीट प्रबंधन पर नई सिफारिशें सब्जी उत्पादकों को उत्पादन बढ़ाने और उनकी आय बढ़ाने में सक्षम बनाएंगी। कुलपति ने कहा कि हाइड्रोपोनिक्स में लेटयूस (पत्तेदार सलाद) की खेती अधिक लाभदायक साबित हुई है। 44 सिफारिशों में से 23 सिफारिशें मेजबान विश्वविद्यालय और 21 सिफारिशें डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी (सोलन) के वैज्ञानिकों की ओर से की गईं।

डा. वत्स ने कहा कि प्राकृतिक खेती की स्थिति में सब्जियों की खेती की नई सिफारिश से राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। कुलपति ने कहा कि दोनों कृषि विश्वविद्यालयों के सब्जी विभागों के वैज्ञानिक नई किस्मों और प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए पूर्ण सामंजस्य के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों से कृषि आय बढ़ाने के लिए किसानों के खेतों में जल्द से जल्द ऐसी नई प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित करने में मदद करने का आह्वान किया।

प्रसार शिक्षा निदेशक डा. नवीन कुमार ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों को नई विकसित किस्मों और प्रौद्योगिकियों के बारे में कृषक समुदाय को अवगत कराने का निर्देश दिया गया है। राज्य कृषि विभाग के संयुक्त कृषि निदेशक डा. पवन कुमार शर्मा ने खुलासा किया कि बेमौसमी सब्जियां राज्य की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से सब्जी उत्पादन में नई चुनौतियों का समाधान करने का आग्रह किया। प्रदेश के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यशाला में अनुसंधान के सह निदेशक डा. एके पांडा, मेजबान विश्वविद्यालय के प्रमुख और नौणी विश्वविद्यालय के लगभग 100 वैज्ञानिकों और राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।

डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डा. इंद्र देव और अनुसंधान निदेशक डा. संजीव कुमार चौहान समेत अन्य वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने ऑनलाइन मोड में कार्यशाला में भाग लिया।