100 बोरी से अधिक सेब देने वाले बागवानों को नोटिस पर भड़के चेतन बरागटा, बोले- अपराधी समझना बंद करे सरकार
हिमाचल नाऊ न्यूज़ | शिमला
भाजपा नेता एवं जुब्बल-कोटखाई से प्रत्याशी चेतन बरागटा ने सेब बागवानों के मुद्दों को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बागवानों को राहत देने के बजाय उन्हें जांच और कागजी कार्रवाई में उलझाकर परेशान कर रही है। बरागटा ने वर्ष 2025 में एमआईएस के तहत 100 से अधिक बोरी सेब देने वाले बागवानों को भेजे जा रहे सत्यापन नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है।
चेतन बरागटा ने कहा कि नोटिस में बागवानों से आधार कार्ड, जमाबंदी, ततीमा, आढ़ती की पर्चियां और बैंक स्टेटमेंट तक मांगे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एचपीएमसी ने बागवानों से सेब खरीदा था, तब इन दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। भुगतान के समय बागवानों को अधिकारियों के सामने खड़ा करना उचित नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में करीब 45 हजार बागवानों ने एमआईएस के तहत सेब दिया था, जिनमें 7 हजार से अधिक बागवानों की आपूर्ति 100 बोरियों से ज्यादा थी। बरागटा ने सरकार से श्वेत पत्र जारी कर स्पष्ट करने की मांग की कि 100 बोरी से अधिक सेब देने वाले कुल कितने बागवान हैं, कितनों को नोटिस जारी किए गए और किन आधारों पर जांच की जा रही है।
कांग्रेस नेताओं के लिए अलग और बागवानों के लिए अलग नियम क्यों?बरागटा ने आरोप लगाया कि आम बागवानों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों में सरकार अलग रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि यदि नियम है तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। सरकार जिले और विधानसभा क्षेत्रवार पूरा आंकड़ा सार्वजनिक करे।उन्होंने कहा कि यदि एमआईएस खरीद में किसी तरह की गड़बड़ी का संदेह है तो जांच सिर्फ बागवानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
कलेक्शन सेंटरों, एचपीएमसी के रिकॉर्ड, तैनात कर्मचारियों, परिवहन व्यवस्था और पूरी खरीद प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।बरागटा ने एचपीएमसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह संस्था भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है। उन्होंने पिछले सीजन में बड़ी मात्रा में सेब नष्ट किए जाने के मामले की भी निष्पक्ष जांच की मांग की और सरकार से इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने को कहा।
एमआईएस का 100 करोड़ से अधिक बकाया तत्काल दे सरकार
चेतन बरागटा ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एमआईएस के तहत बागवानों का 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले बागवानों का बकाया जारी करे, क्योंकि यह किसी प्रकार की खैरात नहीं बल्कि उनका हक है।उन्होंने कहा कि एक ओर बागवान भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं और दूसरी ओर सरकार उनसे नए-नए दस्तावेज मांग रही है। यह व्यवस्था बागवानों के साथ अन्याय है।
सेब सीजन शुरू, कई कलेक्शन सेंटर अब भी धरातल से गायब
बरागटा ने कहा कि सेब सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन कई अधिसूचित कलेक्शन सेंटर अभी तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हुए हैं। उन्होंने सरकार से सभी सेंटर तत्काल खोलने तथा उनकी सूची, स्थान और खरीद शुरू होने की तारीख सार्वजनिक करने की मांग की।उन्होंने कहा कि सी-ग्रेड सेब समय पर नहीं खरीदा गया तो बड़ी मात्रा में फल खराब हो सकता है और इसका नुकसान सीधे बागवानों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने एचपीएमसी के साथ हिमफेड को भी पर्याप्त संख्या में कलेक्शन सेंटर देने तथा दोनों संस्थाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की मांग की।
25 प्रतिशत की शर्त पर भी सरकार से जवाब मांगा
बरागटा ने कहा कि मौसम, ओलावृष्टि, फंगल अटैक और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण कई बागवानों की बड़ी मात्रा में फसल एमआईएस श्रेणी में जा सकती है। ऐसे में कुल उत्पादन के 25 प्रतिशत तक खरीद की शर्त व्यावहारिक नहीं है।उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि किसी बागवान की 50, 60 या 80 प्रतिशत फसल मौसम की मार के कारण एमआईएस श्रेणी में आ गई तो वह अपना सेब कहां बेचेगा। सरकार इस सीमा का वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार स्पष्ट करे।
सब्सिडी, दवाइयों और इनपुट की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
बरागटा ने आरोप लगाया कि बागवानों को खाद, स्प्रे ऑयल और अन्य जरूरी सामग्री सही समय पर उपलब्ध नहीं हो रही है। उन्होंने एंटी हेलनेट, स्प्रे मशीन और पावर टिलर सहित विभिन्न योजनाओं की लंबित सब्सिडी तत्काल जारी करने की मांग की।उन्होंने कहा कि पीपी सेंटरों में गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। स्प्रे का समय निकल जाने के बाद सामग्री उपलब्ध कराने का कोई औचित्य नहीं है।
सरकार नहीं जागी तो सड़कों पर उतरेगी भाजपा
चेतन बरागटा ने कहा कि भाजपा बागवानों के मुद्दों को लेकर पहले भी ठियोग, कोटखाई और रोहड़ू सहित सेब उत्पादक क्षेत्रों में आवाज उठाती रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बागवानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने मांग की कि 100 बोरी से अधिक सेब देने वाले बागवानों को जारी नोटिस वापस लिए जाएं, पूरी खरीद प्रक्रिया की जांच हो, एमआईएस का लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए, सभी कलेक्शन सेंटर खोले जाएं, सी-ग्रेड सेब की पर्याप्त खरीद सुनिश्चित की जाए और बागवानों की लंबित सब्सिडी बहाल की जाए।
बरागटा ने कहा कि बागवानों का पैसा और उनका हक रोककर सरकार उन पर कोई एहसान नहीं कर रही है। यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो भाजपा बागवानों के साथ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।