लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

45 दिनों में उद्योगों को मंजूरी, निवेश आकर्षित करने को नई सिंगल विंडो व्यवस्था

Shailesh Saini | 26 फ़रवरी 2026 at 9:01 am

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय प्राधिकरण गठित, विभागीय अड़चनों को खत्म कर तेज़ होगी स्वीकृति प्रक्रिया

शिमला

प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए सरकार ने उद्योग स्वीकृति प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सिंगल विंडो क्लीयरेंस एवं मॉनिटरिंग प्राधिकरण का पुनर्गठन किया है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

नई व्यवस्था के तहत निवेश प्रस्तावों को 45 कार्यदिवस के भीतर मंजूरी देने की समयसीमा तय की गई है।प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे, जबकि उद्योग मंत्री को उपाध्यक्ष बनाया गया है।

मुख्य सचिव सहित ऊर्जा, राजस्व, पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वन, उद्योग, श्रम एवं रोजगार, नगर एवं ग्राम नियोजन तथा जल शक्ति विभागों के प्रशासनिक सचिव सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

जबकि उद्योग निदेशक सदस्य सचिव होंगे। आवश्यकता पड़ने पर राज्य विद्युत बोर्ड और पावर ट्रांसमिशन निगम के प्रबंध निदेशक विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किए जाएंगे।

10 करोड़ से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं प्राधिकरण के समक्ष

जारी अधिसूचना के अनुसार 10 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं राज्य स्तरीय प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी, जबकि 10 करोड़ रुपये तक के नए उद्योग अथवा विस्तार प्रस्ताव राज्य समीक्षा समिति स्तर पर निपटाए जाएंगे।

प्राधिकरण अंतर-विभागीय विवादों का समाधान, स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी तथा विशेष रियायतों और छूट से जुड़े मामलों पर सरकार को सिफारिशें भी करेगा।

ऑनलाइन आवेदन और समयबद्ध प्रक्रिया

बड़ी बात तो यह है कि उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट उद्योग निदेशक को भेजनी होगी।

राज्य सिंगल विंडो नोडल अधिकारी प्रारंभिक जांच के बाद प्रस्तावों को बिजली, प्रदूषण नियंत्रण, जल शक्ति, वन, आबकारी एवं कराधान तथा श्रम विभागों को भेजेंगे।

संबंधित विभागों को सात कार्यदिवस के भीतर अपनी टिप्पणियां देनी होंगी।इसके बाद उद्योग निदेशक की अध्यक्षता में उपसमिति प्रस्तावों की समीक्षा कर 15 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय हेतु प्राधिकरण को सिफारिश भेजेगी।निर्धारित समय में टिप्पणियां प्राप्त न होने की स्थिति में भी प्रस्ताव को एजेंडा में शामिल किया जाएगा।

धारा 118 की प्रक्रिया निवेशकों के लिए चुनौती

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में भूमि खरीद से जुड़ी धारा 118 नए उद्योगपतियों के लिए लंबे समय से बड़ी बाधा मानी जाती रही है। पटवारी स्तर से शुरू होकर तहसीलदार, उपायुक्त और शिमला स्तर तक फाइल की प्रक्रिया पूरी होने में ही पाँच से छह महीने का समय लग जाता है।

इस देरी के कारण उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों पर बैंक ऋण और ब्याज का वित्तीय बोझ लगातार बढ़ता जाता है।यद्यपि सिंगल विंडो प्रणाली की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन व्यवहार में फाइलों के चक्कर लगाते-लगाते महीनों गुजर जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

नई व्यवस्था से उम्मीद जताई जा रही है कि स्वीकृति प्रक्रिया तेज़ होगी और निवेशकों को वास्तविक राहत मिल सकेगी।सरकार का मानना है कि समयबद्ध स्वीकृति, विभागीय समन्वय और प्रशासनिक पारदर्शिता से प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी तथा रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]