AIIMS / एम्स बिलासपुर में स्थापित होगा आधुनिक साइकियाट्रिक थैरेपी रूम, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार
AIIMS : एम्स बिलासपुर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए आधुनिक साइकियाट्रिक थैरेपी रूम स्थापित किया जा रहा है। इस सुविधा के माध्यम से मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श, मनोचिकित्सकीय उपचार और काउंसिलिंग की सेवाएं एक व्यवस्थित एवं गोपनीय वातावरण में उपलब्ध कराई जाएंगी।
बिलासपुर
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई सुविधा
एम्स बिलासपुर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और मरीज-केंद्रित बनाने के लिए आधुनिक साइकियाट्रिक थैरेपी रूम स्थापित किया जा रहा है। संस्थान के अनुसार इस सुविधा में मरीजों को उपचार और काउंसिलिंग के लिए शांत, सुरक्षित और गोपनीय वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। यहां प्रशिक्षित मनोचिकित्सक मरीज की स्थिति का आकलन कर उपचार योजना तैयार करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को एक ही स्थान पर अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराना है।
दवा के साथ काउंसिलिंग और थैरेपी पर भी रहेगा जोर
एम्स प्रशासन के अनुसार मानसिक रोगों के उपचार में केवल दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता, इसलिए काउंसिलिंग और थैरेपी को भी उपचार प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है। इस रूम में अवसाद, चिंता, तनाव, व्यवहार संबंधी समस्याओं और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों से जुड़े मामलों का मूल्यांकन किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार मरीजों को व्यक्तिगत काउंसिलिंग और पारिवारिक काउंसिलिंग की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि उपचार को अधिक व्यावहारिक और नियमित बनाया जा सके।
मरीजों को मिलेगा अनुकूल उपचार वातावरण
संस्थान का कहना है कि इस सुविधा से मरीजों को अपनी समस्याएं विशेषज्ञों के साथ साझा करने के लिए अधिक उपयुक्त वातावरण मिलेगा। गोपनीयता और नियमित परामर्श की व्यवस्था से उपचार प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। एम्स प्रशासन के अनुसार यह पहल मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ समय पर उपचार लेने की प्रक्रिया को भी सरल बनाएगी। इससे मरीजों को प्रारंभिक स्तर पर ही परामर्श और उपचार उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
प्रदेश में ही उपलब्ध होगी आधुनिक सुविधा
एम्स बिलासपुर में साइकियाट्रिक थैरेपी रूम शुरू होने के बाद मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और मजबूत होगा। संस्थान के अनुसार इससे प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को मानसिक स्वास्थ्य उपचार के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी। आधुनिक परामर्श और उपचार सुविधा एक ही संस्थान में उपलब्ध होने से मरीजों को विशेषज्ञ सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी।
