नाहन में सामाजिक न्याय यात्रा के तहत बैठक, हर घर दस्तक अभियान और विधानसभा घेराव की रणनीति तैयार
सामाजिक न्याय यात्रा के तहत नाहन में आयोजित बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निधि विशेष कानून बनाने की मांग को लेकर आगामी रणनीति तैयार की गई। बैठक में प्रत्येक पंचायत में कमेटियां गठित करने, “हर घर दस्तक” अभियान चलाने, हस्ताक्षर अभियान शुरू करने और विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान धरना देने का निर्णय लिया गया।
नाहन
हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निधि विशेष कानून बनाए जाने की मांग को लेकर चल रही सामाजिक न्याय यात्रा सोमवार को नाहन पहुंची। इस दौरान राज्य गठबंधन की नाहन विधानसभा इकाई की महत्वपूर्ण बैठक प्रभारी जीत सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में आगामी जनजागरण अभियान की रूपरेखा तय करते हुए प्रत्येक पंचायत में कमेटियां गठित करने, “हर घर दस्तक” अभियान चलाने तथा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मांग के समर्थन में धरना देने का निर्णय लिया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से शांति देवी को नाहन विधानसभा इकाई की संयोजिका नियुक्त किया गया। साथ ही निर्णय लिया गया कि विधानसभा क्षेत्र की प्रत्येक पंचायत में लोगों को प्रस्तावित कानून की आवश्यकता और उससे मिलने वाले संभावित लाभों की जानकारी दी जाएगी तथा अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।बैठक में यह भी तय किया गया कि 26 जुलाई को नाहन में एक विस्तृत बैठक आयोजित कर आगामी चरण की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। अभियान के तहत गांव-गांव जाकर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा और संबंधित विधायकों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर कांग्रेस के चुनावी वादे के अनुरूप हिमाचल में अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निधि विशेष कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की जाएगी।
बैठक में दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार पंवार, हिमाचल प्रदेश कोली समाज के वरिष्ठ राज्य उपाध्यक्ष संजय पुडीर, भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डी.पी. चंद्रा, सुखदेव विश्व प्रेमी तथा शहर के प्रख्यात कवि एवं कहानीकार दीनदयाल वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि देशभर में अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निधि कानून की मांग लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि जिन राज्यों में उसकी सरकार है, वहां इस कानून को लागू करने की पहल की जाए। साथ ही हिमाचल सरकार से भी प्रदेश में इस कानून को शीघ्र लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई गई।बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प भी लिया।
