Asian Games 2026 / नंगे पैर दौड़ने से एशियन गेम्स के पदक तक, चंबा की सीमा ने संघर्ष से लिखी कामयाबी की कहानी, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दी बधाई
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रेटा गांव से निकली एथलीट सीमा कुमारी ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। सीमित संसाधनों और कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ीं सीमा ने 32:50.05 का समय लेकर कांस्य पदक अपने नाम किया। अब उनकी नजर 28 सितंबर को होने वाली 5,000 मीटर दौड़ पर है, जहां वह एक बार फिर भारत के लिए पदक जीतने के इरादे से ट्रैक पर उतरेंगी।
चंबा
12 साल की उम्र में पिता को खोया, नंगे पैर दौड़कर शुरू किया सफर
चंबा जिले के रेटा गांव की सीमा कुमारी का एशियन गेम्स के पदक तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। सीमित संसाधनों के बीच सीमा गांव में मवेशी चराने के साथ दौड़ का अभ्यास करती थीं। हालात ऐसे थे कि शुरुआती दौर में उनके पास दौड़ने के लिए जूते तक नहीं थे, लेकिन उन्होंने एथलेटिक्स में आगे बढ़ने का सपना नहीं छोड़ा।
खेल के प्रति जुनून के चलते सीमा ने सातवीं कक्षा के दौरान बेहतर प्रशिक्षण के लिए घर छोड़कर धर्मशाला के साई हॉस्टल का रुख किया। गांव से निकलकर खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के उनके फैसले पर सवाल भी उठे, लेकिन उनकी मां बेटी के साथ मजबूती से खड़ी रहीं। यही संघर्ष धीरे-धीरे सीमा की ताकत बनता गया और उन्होंने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।
बेटी के सपने के लिए मां ने तुड़वा दी थी एफडी
सीमा के संघर्ष में उनकी मां केसरी देवी की भूमिका भी अहम रही। वर्ष 2017 में एशियन यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए सीमा के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। बेटी का सपना अधूरा न रहे, इसके लिए उनकी मां ने अपनी एफडी तुड़वाकर उन्हें थाईलैंड के बैंकॉक भेजा। सीमा ने भी मां के इस भरोसे को निराश नहीं किया और प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया।
इसके बाद सीमा लगातार आगे बढ़ती गईं। वर्ष 2018 में वह खेलो इंडिया योजना से जुड़ीं। वर्ष 2024 में हांगकांग में आयोजित 17वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में उन्होंने 10,000 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। वह राष्ट्रीय स्तर पर भी कई उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं और एशियाड से पहले इस वर्ष 10,000 मीटर में 32:02.43 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज कर चुकी थीं।
आखिरी राउंड में जूते का सोल निकला, फिर भी नहीं रुकीं सीमा
एशियन गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में भी सीमा की राह आसान नहीं रही। आखिरी राउंड के दौरान उनके जूते का सोल निकल गया, लेकिन उन्होंने दौड़ जारी रखी। सीमा ने 32:50.05 का समय लेते हुए कांस्य पदक हासिल किया। उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक वह एशियन गेम्स की महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय एथलीट हैं। इससे पहले 2010 में प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण और कविता राउत ने रजत पदक जीता था।
सीमा ने अपनी 10,000 मीटर की रेस को बेहद रणनीतिक बताया। उनका कहना था कि रेस में खिलाड़ियों का ध्यान समय के बजाय पदक हासिल करने पर था। वह स्वयं भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी थीं। कांस्य पदक हासिल करने के बाद उन्होंने खुशी जताते हुए इसे अपने सपने के पूरा होने जैसा बताया।
अब 28 सितंबर को 5,000 मीटर में बदलना चाहती हैं पदक का रंग
10,000 मीटर में कांस्य जीतने के बाद सीमा का अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। वह 28 सितंबर को महिलाओं की 5,000 मीटर स्पर्धा में भी उतरेंगी। सीमा ने स्पष्ट किया है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पदक का रंग बदलने की कोशिश करेंगी।
पिछले वर्ष वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में रजत पदक जीत चुकीं सीमा ने अपनी तैयारी में कोच स्कॉट साइमन की भूमिका का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार ओलंपिक चैंपियन खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण से उनके प्रदर्शन के साथ मानसिक मजबूती में भी सुधार आया है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने दी बधाई, अगली दौड़ के लिए शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सीमा कुमारी को एशियन गेम्स में 10,000 मीटर दौड़ का कांस्य पदक जीतने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा जिले के रेटा गांव की बेटी सीमा ने इस उपलब्धि से हिमाचल और देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने सीमा को आगामी 5,000 मीटर दौड़ के लिए भी शुभकामनाएं दीं।
सीमा की सफलता पर प्रदेश के अन्य खिलाड़ियों की ओर से भी बधाइयां मिल रही हैं। भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान एवं डीएसपी अजय ठाकुर ने भी सीमा को कांस्य पदक जीतने पर बधाई देते हुए उनकी मेहनत, लगन और जज्बे की सराहना की।
कांस्य पदक पर एक करोड़ रुपये के पुरस्कार का प्रावधान
उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश की खेल नीति में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर पांच करोड़ रुपये, रजत पदक पर तीन करोड़ रुपये और कांस्य पदक पर एक करोड़ रुपये के पुरस्कार का प्रावधान है। ऐसे में सीमा कुमारी को कांस्य पदक की इस उपलब्धि पर प्रदेश सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये का पुरस्कार मिलने की बात कही गई है।
चंबा के छोटे से गांव में सीमित संसाधनों के बीच दौड़ शुरू करने वाली सीमा का सफर अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक तक पहुंच चुका है। पिता को कम उम्र में खोने, आर्थिक कठिनाइयों और शुरुआती दौर में दौड़ने के लिए जूते तक न होने जैसी परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य का पीछा जारी रखा। अब 28 सितंबर की 5,000 मीटर दौड़ में एक बार फिर सीमा के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।