बीबीएन में श्रमिकों की कमी और गैस सिलिंडर महंगाई से उद्योग प्रभावित, उत्पादन में गिरावट दर्ज
Himachalnow / सोलन
बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की कमी के साथ गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों का असर उद्योगों के संचालन पर देखा जा रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार प्रवासी मजदूरों के लौटने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है और स्थिति में सुधार के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
सोलन/बद्दी
श्रमिकों की कमी से उत्पादन पर प्रभाव
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) में श्रमिकों की कमी का असर विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में देखा जा रहा है। क्षेत्र के हजारों उद्योगों में उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और कई इकाइयों में दैनिक संचालन में व्यवधान आ रहा है। उद्योगपतियों के अनुसार पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध न होने से कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन लक्ष्य प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
मजदूरों को आकर्षित करने के प्रयास
उद्योगों द्वारा श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। बद्दी क्षेत्र में लेबर चौक और अन्य स्थानों पर श्रमिकों की तलाश की जा रही है। फैक्ट्री मालिकों और ठेकेदारों ने 8 घंटे की दिहाड़ी बढ़ाकर 800 से 900 रुपये तक कर दी है और साथ में भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद श्रमिकों की उपलब्धता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है, जिससे उत्पादन प्रभावित बना हुआ है।
प्रवासी मजदूरों की वापसी के कारण
ठेकेदारों के अनुसार वर्तमान समय में गेहूं की कटाई का सीजन होने और गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों की ओर लौट गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर श्रमिकों की कमी बढ़ गई है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो आने वाले समय में उत्पादन और अधिक प्रभावित हो सकता है।
नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता
उद्योगपतियों ने सरकार से क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने और स्थायी श्रमिक नीति तैयार करने की मांग की है। उनका कहना है कि श्रमिकों के लिए आवास, आवश्यक सेवाओं और प्रोत्साहन योजनाओं की व्यवस्था से स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
उद्योग संगठनों के सुझाव
उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि छोटे और मझोले उद्योगों पर इस स्थिति का अधिक प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि उनके पास अतिरिक्त खर्च वहन करने की सीमित क्षमता है। उन्होंने श्रमिक प्रोत्साहन योजना लागू करने और श्रमिकों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता बताई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो उत्पादन स्तर में गिरावट का असर व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।