Category: Editor’s Pick

  • नाहन एमसी ने पागल के हवाले किया यशवंत विहार

    नाहन एमसी ने पागल के हवाले किया यशवंत विहार

    खुद को विधायक अजय सोलंकी का चहेता बताकर शिकायत करने वालों को देता है धमकी

    HNN/ नाहन

    नाहन शहर की यशवंत विहार कॉलोनी को एमसी के द्वारा एक पागल के हवाले कर दिया है। एमसी के द्वारा इस पागल व्यक्ति को सफाई की जिम्मेवारी दी गई है। मगर दुखद बात यह है कि सफाई के साथ-साथ यह व्यक्ति लोगों के समान पर भी हाथ साफ कर जाता है।

    ऐसे में यदि इसकी शिकायत एमसी से कर देने बात की जाए तो यह खुद को अजय सोलंकी का खास बताकर लोगों को धमकाता भी है। यही नहीं तरह-तरह के कारण बताकर यह पागल सफाई कर्मी लोगों से पैसे भी वसूलता है। हैरानी तो इस बात की है कि म्युनिसिपल कमिटी वाले खुद इसका खौफ खाते हैं।

    एमसी वालों का कहना है कि यह विधायक अजय सोलंकी का खास चाहता है और यह उनसे शिकायत भी करता है। एमसी कर्मियों का कहना है यदि इस पर हम कोई कार्यवाही करते हैं तो यह विधायक से फोन करवाता है। बरहाल बड़ा सवाल यह उठता है कि जहां शहर को साफ स्वच्छ रखने की बात की जाती है।

    वहीं इस प्रकार के कर्मचारियों को यदि विधायक भी संरक्षण देने लग जाएंगे तो निश्चित ही विधायक की छवि को भी ऐसे व्यक्ति कभी भी खराब कर सकते हैं। यह कथित सफाई कर्मचारी खुद को स्वर्ण जाति का बताता है मगर कॉलोनी से गुजरने वाले गाय बैल आदि पशुओं को सरिए की मोटी रोड से पीट-पीटकर अधमरा भी कर देता है।

    बता दें कि कथित सफाई कर्मचारी के द्वारा करीब चार-पांच महीने पहले एक तंदुरुस्त बैल को जहर देकर और सर पर सरिया मारकर जान से खत्म कर दिया था। कॉलोनी के लोग इस सफाई कर्मचारी से अब तौबा कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि यदि इस सफाई कर्मचारी को यहां से जल्द ना बदला गया तो वह किसी तरह का सफाई टैक्स आदि नहीं जमा कराएंगे जिसके जिम्मेदार खुद एमसी होगी।

  • काला अंब के दो उद्योगों पर एक्साइज विभाग ने की छापेमारी

    काला अंब के दो उद्योगों पर एक्साइज विभाग ने की छापेमारी

    300 करोड़ के लगभग टैक्स चोरी का अंदेशा, विभाग ने कब्जे में लिया रिकॉर्ड

    HNN/काला अंब

    राज्य कर एवं आबकारी विभाग जिला सिरमौर के द्वारा काला अंब स्थित 2 उद्योगों पर एक बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग के जिला उप आयुक्त हिमांशु पंवार की अगुवाई में शिमला सोलन की एक टीम का गठन कर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पूरी टीम एक ही समय में 2 उद्योगों में करीब 2:00 बजे के आसपास दोपहर को धमक गई थी। टीम के द्वारा मोगिनंद तथा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इन दोनों उद्योगों के तमाम दस्तावेजों को करीब 5 घंटों से अधिक कार्यवाही करते हुए अपने कब्जे में लिया गया।

    बताया जा रहा है कि अधिकारियों को कुछ ऐसे इनपुट मिले थे जिसमें फर्जी बिलों के आधार पर जीएसटी में बड़े घोटाले की आशंका व्यक्त की गई थी। यहां यह भी बताना जरूरी है कि इससे पहले भी इसी उद्योग पर सेंट्रल एक्साइज के द्वारा सेंट्रल एक्साइज के द्वारा छापेमारी कर कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए थे।

    जिसके बाद आज शनिवार को फिर से स्टेट एक्साइज के द्वारा मिली शिकायत के बाद इस कार्यवाही को अंजाम दिया गया। कार्यवाही को अंजाम देने से पहले उप आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी विभाग जिला सिरमौर हिमांशु के द्वारा सोलन शिमला से तेज तर्रार अधिकारियों को बुलाकर पूरी रणनीति तैयार की गई थी।

    यही नहीं इस कार्यवाही की जानकारी किसी को कानों कान भी ना हो इसको लेकर हर कार्यवाही को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। जानकारी यह है कि करीब 2 दर्जन से अधिक विभाग के अधिकारियों को इस टीम में शामिल किया गया था।

    उधर, राज्य कर एवं आबकारी विभाग के मुख्य आयुक्त यूनुस खान ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि इन दोनों कंपनियों पर करीब 300 करोड़ के लगभग फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया गया है। उन्होंने बताया कि कंपनी के करीब 300 के लगभग ऐसे रजिस्ट्रेशन है जो 5 राज्यों से दिखाए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि इस के संबंध में तमाम दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि अभी और रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा कि कंपनी के द्वारा बड़े स्तर पर टैक्स चोरी किया गया है।

    उधर कंपनी के मालिक अखिलेश जैन का कहना है कि विभाग की कार्यवाही में उन्होंने पूरा सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी तरह की कोई भी टैक्स चोरी नहीं की है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी उन पर सेंट्रल एक्साइज के द्वारा कार्यवाही की गई थी जिसमें कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुए थे। उन्होंने कहा कि वह व्यापारी हैं और पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके हर डॉक्यूमेंट पूरी तरह से साफ-सुथरे हैं कहीं भी किसी भी तरह का कोई गलत काम नहीं किया गया है।

  • एमसी से अपेक्षाएं ज्यादा मगर टैक्स देने की नियत में शहर के लोग पीछे

    एमसी से अपेक्षाएं ज्यादा मगर टैक्स देने की नियत में शहर के लोग पीछे

    डेढ़ करोड़ के टैक्स पर लोगों का कब्जा फिर भी एमसी ने दिया बड़ा मौका

    HNN/ नाहन

    आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया यह कहावत नाहन नगर परिषद पर बिल्कुल फिट बैठ रही है। एमसी से बेहतर सर्विसेज की अपेक्षाएं रखने वाले शहर के नागरिक टैक्स देने में नैतिकता का सबक सीखना ही भूल गए हैं।

    हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि करीब 18,000 घरों की आबादी वाले शहर के लोगों का डेढ़ करोड़ के लगभग हाउस टैक्स पेंडिंग पड़ा है। बावजूद इसके लोग इमानदारी से टैक्स देने में गुरेज कर रहे हैं।

    आज शनिवार को हुए हाउस में एक बार फिर एमसी नाहन के द्वारा लोगों को बकाया टैक्स देने के लिए कहा गया है। यही नहीं लोग इमानदारी से अपना टैक्स जमा कराएं इसको लेकर 10 परसेंट छूट देने का भी हाउस में प्रस्ताव पारित हुआ है।

    यहां यह भी बताना जरूरी है कि नाहन नगर परिषद का महीने का खर्चा एक करोड़ के आसपास रहता है। तो वही आमदनी की बात की जाए तो 25 से 30 लाख के बीच में महीने की आय होती है। एमसी नाहन शहर को ना केवल स्वच्छ बनाने में बल्कि डोर टू डोर गार्बेज कलेक्शन में भी शहर के सभी 13 वार्डों में बराबर व्यवस्था बनाए हुए हैं।

    हैरानी तो इस बात की है कि लोग इमानदारी से टैक्स देते नहीं है साथ ही गार्बेज कलेक्शन करने वाला अगर एक घंटा भी लेट हो जाता है तो एमसी की कार्यप्रणाली पर भी बड़े-बड़े सवालिया निशान लगाते हैं।

    आज शनिवार को एमसी नाहन की अध्यक्ष श्यामा पुंडीर की अध्यक्षता में हाउस का आयोजन हुआ। जिसमें न केवल हाउस टैक्स बल्कि शहर में पालतू कुत्ते रखने वालों के ऊपर जो 1000 पर रजिस्ट्रेशन शुल्क लगाया गया था उसको लेकर भी चर्चा हुई।

    हजार रुपए वार्षिक रजिस्ट्रेशन शुल्क को लेकर जो शहर में विरोध हो रहा था उस पर आज करीब एमसी नाम के द्वारा 900 रुपए की कटौती करते हुए यह रजिस्ट्रेशन शुल्क 100 रुपए कर दिया गया है। जानकारी तो यह भी है कि शहर में ऐसे कई लोग भी हैं जिन्होंने ना केवल एक बल्कि घर में कई कुत्ते पाल रखे हैं।

    पालतू कुत्ते पालने वाले सुबह घूमने जाने के दौरान इन कुत्तों को पार्क आदि में भी ले जाते हैं, जहां इन कुत्तों की गंदगी से आम लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है। एमसी नाहन के ऊपर ना केवल लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित है बल्कि शहर में जो सौंदर्यीकरण किया गया था उसको बनाए रखना भी एक बड़ी जिम्मेवारी है।

    एमसी की मासिक आय बहुत कम होने के बावजूद पार्क व अन्य सार्वजनिक स्थानों को मेंटेन रख पाना भी मुश्किल होता है। शनिवार को हुए हाउस में शहर में बने रेन शेल्टर को रंग रोगन आदि से सुसज्जित किया जाना साथ ही शहर के सभी सार्वजनिक शौचालयों में 22 सफाई कर्मचारियों की नियुक्तियां किए जाने का भी प्रस्ताव पारित हुआ है।

    बरहाल एमसी नाहन से बेहतर अपेक्षा रखने वाले नहान शहर के नागरिकों को अब अपनी नैतिक जिम्मेवारी का भी गंभीरता के साथ निर्वहन करना होगा। ऐसे में यदि शहर के नागरिक शहर को सुंदर बनाए रखने में अपना निजी सहयोग भी करते हैं तो निश्चित ही नाहन की मुंसिपल कमेटी और अधिक बेहतर सुविधाओं के साथ शहर को नगीना साबित करने में कामयाब हो सकेगी।

    शनिवार को आयोजित हुए हाउस में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय तोमर के अलावा सभी पार्षद भी उपस्थित रहे।

  • सरकार की व्यवस्था पर बड़ा सवाल, बिना फायर एनओसी चल रही सरकारी संस्थानों में कैंटीन

    सरकार की व्यवस्था पर बड़ा सवाल, बिना फायर एनओसी चल रही सरकारी संस्थानों में कैंटीन

    8915 टूरिज्म से मान्यता प्राप्त होटल, रेस्त्रां, होमस्टे में से केवल 127 के पास फायर एनओसी

    HNN/ शिमला

    रोम जलता रहा और नीरो बांसुरी बजाता रहा यह कहावत हिमाचल सरकार पर लगभग अब पूरी तरह से फिट बैठती नजर आ रही है। आईजीएमसी शिमला में हुए सिलेंडर ब्लास्ट के बाद बड़ा खुलासा यह हुआ है कि प्रदेश के अधिकतर सरकारी संस्थानों में चल रही कैंटीन, जलपान गृह आदि बिना फायर एनओसी के ही चल रहे हैं।

    हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि हिमाचल प्रदेश टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के तहत 4303 होटल, 904 रेस्टोरेंट्स, 3708 होमस्टे यूनिट में से केवल 127 होटलों के पास ही फायर एनओसी है। यानी कहा जा सकता है प्रदेश के अधिकतर होटलों आदि में आग से बचाव को लेकर कोई भी साधन नहीं है।

    प्रदेश की जीडीपी में करीब 40 फ़ीसदी टूरिज्म से होने वाली इनकम पर इस अव्यवस्था का सीधा सीधा असर भी पड़ सकता है। अब आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि प्रदेश अग्निशमन विभाग से जुटाई गई जानकारी में पता चला है कि केवल 127 होटल ऐसे हैं जिन्होंने फायर की एनओसी ली है। इसके अलावा 40 अपार्टमेंट हाउस है जिनके पास फायर की एनओसी है।

    अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रदेश में अधिकतर रेस्टोरेंट्स जिनकी संख्या लाखों में है उनके सुरक्षा पैरामीटर्स को जांच पाने में सरकार नाकामयाब रही है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रदेश के अधिकतर अस्पतालों में मरीजों के लिए खाना बनाने वाली किचन, दफ्तरों, कार्यालय, परिसरों में खुली हुई कैंटीन किसी के पास भी अग्निशमन यंत्र है ही नहीं।

    जबकि इन सभी संस्थानों में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के माध्यम से खाना पकाना आदि का काम होता है। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि जब अधिकतर होटल रेस्टोरेंट्स और कैंटीन आदि के पास फायर की एनओसी नहीं है तो वह हिमाचल प्रदेश टूरिज्म से अथवा स्थानीय प्रशासन के द्वारा उन्हें कैसे मान्यता दे दी गई है।

    जाहिर सी बात है प्रदेश सरकार को लोगों की जान से हो रहे इस खिलवाड़ को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता नजर नहीं आती है। बताना यह भी जरूरी है कि पिछले कुछ दिनों से आगजनी की घटनाएं भी बढ़ी है बावजूद इसके अभी तक सरकार की ओर से किसी भी तरह के गम भरी प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।

    उधर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आईजीएमसी में हुए अग्निकांड को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई यह अच्छी बात है मगर सरकार को चाहिए कि प्रदेश में ऐसे संस्थानों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए जहां जनता की आवाजाही ज्यादा हो।

    उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि इस अग्निकांड में करोड़ों की लागत से बनी नई बिल्डिंग जलकर खाक हो गई है मगर मुख्यमंत्री दुर्घटना स्थल पर जाने की बजाए चुनाव प्रचार में डटे रहे।

    नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि प्रदेश में अग्नि से सुरक्षा को लेकर और अधिक पुख्ता प्रबंध किए जाएं। होटल, कैंटीन, अस्पतालों आदि में अग्नि सुरक्षा को लेकर उचित कदम उठाने की भी जरूरत है।

  • सिरमौर में इस बार इतने हजार मेट्रिक टन आम की पैदावार की संभावना

    सिरमौर में इस बार इतने हजार मेट्रिक टन आम की पैदावार की संभावना

    जिला अब मिशन बागवानी किसानों और बागवानों को बनाएगा धन्ना सेठ

    HNN/ नाहन

    ऊपरी हिमाचल प्रदेश में अगर सेब एक स्थापित अर्थव्यवस्था का मुख्य जरिया है तो सिरमौर भी फल उत्पादन में पीछे नहीं है। जिला सिरमौर में इस बार आम की बंपर पैदावार होने का अंदेशा जताया गया है। जिला सिरमौर हॉर्टिकल्चर विभाग के अनुसार इस बार जिला में करीब 3000 मीट्रिक टन आम की पैदावार होने की संभावना है।

    जिला में बड़ी बात तो यह है कि करीब 18,000 हेक्टेयर जमीन पर अलग-अलग तरह के फलदार पौधे लगाए जाते हैं। जिनमें आम, लीची, नींबू, संतरा, माल्टा किन्नू और इसके अलावा स्टोबेरी भी काफी ज्यादा मात्रा में हो रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिला में 18,000 हेक्टेयर एरिया में करीब 27 से 28 हजार मैट्रिक टन फल उत्पादन होता है।

    बड़ी बात तो यह है कि जिला सिरमौर में एप्पल की भी पैदावार होती है जबकि एशिया का सबसे बेस्ट आड़ू राजगढ़ की पीच वैली में होता है। इसके अलावा पपीता और अनार के लिए भी सिरमौर की जलवायु और भूमि उपयुक्त मानी गई है। सिरमौर में अब कीवी के साथ-साथ सरकारी फार्म में ऑलिव की भी पैदावार हो रही है।

    आम और किन्नू उत्पादन में सिरमौर और अधिक बेहतर प्रदर्शन कर सकता था मगर दुर्भाग्यवश एक बहुत बड़ी उपजाऊ और कीमती जमीन का हिस्सा आईआईएम और आईआरबी को कंस्ट्रक्शन के लिए दिया गया था। जिसके चलते करीब 1000 मेट्रिक टन फल उत्पादन पर सीधे सीधे फर्क पड़ा है।

    बावजूद इसके जिला सिरमौर में हॉर्टिकल्चर विभाग किसानों को बागवानी से मालामाल करने के लिए लगातार प्रयासरत है। एचपी-ई उद्यान पोर्टल एक ऐसा जरिया भी बन कर आया है जिसके माध्यम से घर बैठे ही किसी भी फल उत्पादन के लिए अप्लाई किया जा सकता है। जिसमें 50 फीसदी का अनुदान सरकार के द्वारा दिया जाता है।

    क्षेत्र विस्तार के लिए यह योजना काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा जिला में एचपी शिवा प्रोजेक्ट के तहत भी कई किसानों ने फल उत्पादन में रोजगार की दृष्टि से अलग अलग किसम के बगीचे लगाए हैं। जिसमें पपीता को भी रोजगार का एक बड़ा जरिया बनाया गया है।

    इस प्रोजेक्ट के तहत संतरा अमरूद अनार परम जापानी फल आम पपीता नींबू आदि को भी शामिल किया गया है। बता दें कि पूरे प्रदेश में केवल जिला सिरमौर ही एकमात्र ऐसा जिला है जो लगभग 35 किस्मों के फलों की खेती करने में सक्षम है। जिला में विश्व बैंक से पोषित बागवानी विकास परियोजना, एकीकृत विकास के लिए एकीकृत बागवानी मिशन को भी प्रभावी ढंग से जिला में चलाया जा रहा है।

    इससे भी बड़ी बात तो यह है कि बागवानी को और अधिक रोजगार परक बनाने के लिए सिंचाई योजनाओं को भी जिला के लिए प्राथमिकता दी जा रही है। जिला सिरमौर का जल शक्ति विभाग जिला के लगभग सभी ब्लॉकों में 1-1 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई योग्य बनाने का लक्ष्य भी बना चुका है।

    इसके अलावा बागवानी मिशन और अधिक कारगर हो इसको लेकर तरह-तरह के प्रयोग भी विभाग के द्वारा किए जा रहे हैं। उधर, उपनिदेशक जिला सिरमौर हॉर्टिकल्चर विभाग सतीश शर्मा ने खबर की पुष्टि की है।

  • सुमित खिमटा होंगे अब सिरमौर के नए उपायुक्त

    सुमित खिमटा होंगे अब सिरमौर के नए उपायुक्त

    कौन है सुमित खिमटा और सिरमौर में किस पद पर रहे है पहले, जानने के लिए करे लिंक पर क्लिक……..

    HNN/ नाहन

    हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा एक बार फिर प्रशासनिक बदलाव करते हुए डीसी नाहन के तबादला आदेश करते हुए सुमित खिमटा को सिरमौर डीसी नियुक्ति दी गई है। तो वहीं सिरमौर के डीसी राम कुमार गौतम को कहां एडजस्ट किया गया है इसकी जानकारी फिलहाल नहीं मिल पाई है। जानकारी के अनुसार बुधवार या वीरवार तक खिमटा सिरमौर में ज्वाइनिंग दे सकते है।

    बता दें कि राम कुमार गौतम जिला सिरमौर में एक बेहतर प्रशासनिक अधिकारी साबित रहे हैं। कोविड-कॉल तथा जिला सिरमौर में हुए विधानसभा चुनाव में एक बेहतर व्यवस्था के साथ-साथ मध्य प्रतिशत शत प्रतिशत करवा पाने में भी उपायुक्त सिरमौर नंबर वन साबित रहे है।

    वहीं सुमित खिमटा नाहन एसडीएम भी रह चुके हैं इसके साथ साथ घुंवारवी में एसडीएम पद पर रहने के साथ-साथ शिमला निदेशालय में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। एक बेहतर प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर एचएस से आईएएस बने सुमित लाहौल स्पीति में भी डीसी रह चुके हैं।

    बरहाल नाहन मुख्यालय में वह कब अपनी जोइनिंग देंगे इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। खिमटा सिरमौर की तमाम भौगोलिक एवं वस्तुस्थिति से पहले से भली प्रकार परिचित है। बता दें कि सुमित खिमटा जुब्बल के मंडोल गांव के रहने वाले हैं।

    लाहौल स्पीति को एक आदर्श जिला बनाने और एक बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के तहत तमाम सुविधाओं को उपलब्ध कराने और समस्याओं को निष्पादित करने में भी उनका नाम प्रमुख रहा है। वे स्वास्थ्य विभाग में निदेशक पद पर भी रह चुके हैं।

  • डॉ. बिंदल की नियुक्ति से कांग्रेसियों में बौखलाहट- मनीष चौहान

    डॉ. बिंदल की नियुक्ति से कांग्रेसियों में बौखलाहट- मनीष चौहान

    चौहान बोले- भाजपा में पद नहीं अनुशासन को दी जाती है तवज्जो

    HNN/ नाहन

    डॉ. राजीव बिंदल की अध्यक्ष पद पर पुनः नियुक्ति के बाद प्रदेश कांग्रेस में बौखलाहट शुरू हो गई है। यह बात पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं मंडल महामंत्री मनीष चौहान ने प्रेस बयान जारी करते हुए दी। मनीष चौहान ने सीएम के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा में पद नहीं अनुशासन को प्राथमिकता दी जाती है।

    मनीष चौहान ने कहा कि डॉ. राजीव बिंदल पर जो आधारहीन आरोप लगाए गए थे उन सब में वह पाक साफ साबित हो चुके हैं। बावजूद इसके उन्होंने उसी समय पद को तवज्जो न देते हुए पार्टी के अनुशासन को प्राथमिकता दे नैतिकता के आधार पर खुद त्यागपत्र दिया था।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस भले ही विचारधाराओं की बात करती हो मगर नैतिकता और अनुशासन के मामले में कांग्रेस की परिभाषा तक नहीं जानती है। मनीष चौहान ने कहा कि भाजपा पहले अनुशासन को आगे रखती है और पीछे पद होता है। मनीष चौहान ने कहा कि कांग्रेस झूठ की गठरी सर पर रख कर घूम रही है और जनता उनसे किए गए वादों पर सवाल कर रही है।

    उन्होंने कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने सर पर रखी झूठ की गठरी को संभाले कहीं ऐसा ना हो यह गठरी यदि सर से गिर गई तो जनता सत्ता का सुख भी छीन सकती है। मनीषा चौहान ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप का कार्यकाल पूरा हो चुका था। लिहाजा अनुशासनात्मक तौर पर उन्होंने पद से इस्तीफा दिया है।

    मनीषा ने कहा कि सुरेश कश्यप के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहने का कार्यकाल संगठनात्मक तौर पर बेहतर साबित रहा है। यही नहीं मनीष चौहान ने कहा कि वर्ष 2024 में होने जा रहे संसदीय चुनाव में भाजपा चारों सीटों पर क्लीनस्वीप करेगी और केंद्र में फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनेगी।

    मनीष चौहान ने कहा कि प्रदेश में जब-जब भाजपा की सरकार रही है तब तब विकास के क्षेत्र में इतिहास लिखा गया है। उन्होंने कहा नाहन जैसे शहर में जहां दशकों तक पानी की समस्या ने लोगों को खून के आंसू रुलाए थे मगर आज ना केवल नाहन शहर बल्कि पूरे प्रदेश के हर घर में नल है और हर नल में जल है।

    उन्होंने कहा प्रदेश की कांग्रेस सरकार हताश और निराश हो रही है खजाने खाली होने का उलाहना करते हुए नए संसाधन जुटाने की जगह हाय हाय कर रही है। मनीषा ने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले कांग्रेस जितनी भी गारंटीया देकर सत्ता में आई थी पहले उनका जवाब दें।

  • बनेठी पंचायत में सड़क के किनारे मिला पूरी तरह विकसित मृत भ्रूण

    बनेठी पंचायत में सड़क के किनारे मिला पूरी तरह विकसित मृत भ्रूण

    3 माह से अधिक उम्र का मृत शरीर भ्रूण या फिर शव अब बना जांच का विषय

    HNN/ नाहन

    नाहन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बनेठी पंचायत के बोहल में एनएच के किनारे करीब 100 मीटर की दूरी पर खेत में पूरी तरह विकसित शिशु का कथित शव मिला है। बताया जा रहा है मृतक शिशु अथवा भ्रूण की उम्र लगभग 4 और 3 माह के बीच में लग रही है।

    शिशु के शव/भ्रूण मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह शव मुख्य सड़क से करीब 50 से 100 मीटर नीचे की ओर एक घर के नजदीक खेत में मिला है। गांव के लोगों ने जब सुबह 7:30 बजे के आसपास इस नवजात के शव/भ्रूण को देखा तो इसकी सूचना ग्राम प्रधान बीना शर्मा को दी गई।

    ग्राम प्रधान तत्काल मौके पर पहुंची और पुलिस को सूचना दी। थाना पुलिस घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची और शव/भ्रूण को कब्जे में लिया। मिली जानकारी के अनुसार मृतक शिशु/भ्रूण के छाती में सुराख था और कुछ कट के निशान भी है। पुलिस के द्वारा कथित भ्रूण को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।

    अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस तरीके से इस कथित भ्रूण के शरीर के सभी अंग पूरी तरह से विकसित नजर आ रहे हैं उस नजरिए से यह भ्रूण कम बल्कि 2 से 3 माह के शिशु का शव ज्यादा नजर आता है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि यदि यह भ्रूण है तो इतना विकसित भ्रूण बगैर किसी ऑपरेशन के एबॉर्शन नहीं किया जा सकता है।

    बच्चे के बड़े-बड़े पांव हैं और हाथ भी पूरी तरह विकसित हैं। ऐसे में इसे भ्रूण कहा जाना हजम नहीं होता है। पुलिस के अनुसार यह भ्रूण है जिसे किसी बड़े पक्षी के द्वारा इस जगह गिरा दिया गया। पुलिस का यह भी कहना है कि गांव वालों ने वहां पक्षियों को मंडराते देखा था। वहीं प्रत्यक्ष जाती लोगों में चर्चा यह भी है यह भ्रूण ना होकर किसी नवजात का शव है।

    उधर, एडिशनल एसपी से कई बार फोन पर संपर्क किया गया मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया। डीएसपी मैडम छुट्टी पर हैं। जिला पुलिस कप्तान को भी फोन पर संपर्क किया गया। जिसके बाद प्रदेश पुलिस प्रमुख को खबर के लिए पुष्टि हेतु मैसेज भी किया गया है। पुलिस से प्राप्त सूत्रों के अनुसार बरामद किया गया 5 माह का भ्रूण है।

    पुलिस सूत्र का कहना है कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के अनुसार सिर पर एबॉर्शन किए जाने के चिन्ह भी है। बरहाल मामला आईपीसी 315 के तहत दर्ज कर लिया गया है। भ्रूण का रक्त सैंपल डीएनए जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।बरहाल अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा कि बरामद हुआ शव किसी विकसित बच्चे का था या फिर यह 5 माह का भ्रूण था।

  • पच्छाद भाजपा में घमासान की आहट स्टेज

    पच्छाद भाजपा में घमासान की आहट स्टेज

    समीक्षा बैठक में चंद्रमोहन ठाकुर सहित इनके निष्कासन की हुई थी सिफारिश

    HNN/ पच्छाद

    संसदीय चुनाव से पहले ही पच्छाद भाजपा में घमासान के आसार तेज होते नजर आने लग पड़े हैं। रीना कश्यप की जीत के बाद पच्छाद में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रतन पाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में 3 भाजपा के दिग्गजों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे।

    जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैठक में रतनपाल से कहा था कि भाजपा के तीन दिग्गज चुनावों में पूरी तरह निष्क्रिय रहे। जिनमें जिला सिरमौर के दिग्गज भाजपाइयों में शुमार करने वाले प्रदेश भाजपा प्रवक्ता व महामंत्री रहे चंद्र मोहन ठाकुर ओबीसी सेल के जिला अध्यक्ष चक्रधर भंडारी जिला भाजपा महामंत्री बलदेव कश्यप का नाम शामिल था।

    पुष्ट सूत्रों की माने तो इन तीनों के पार्टी से निष्कासन को लेकर उपाध्यक्ष से सिफारिश भी की गई थी। अब इस पर मंडल का प्रस्ताव भी शामिल था या नहीं इस बारे में कहा नहीं जा सकता। जानकारी तो यह भी है कि भले ही यह तीनों बाजपाई निष्क्रिय रहे हो मगर पार्टी विरोधी कोई गतिविधि इन्होंने की हो ऐसा कोई संकेत नजर नहीं आया था।

    हालांकि इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की आपसी फूट के चलते भाजपा को जीत हासिल हुई थी मगर इसके लिए ना केवल प्रदेश अध्यक्ष बल्कि विपणन बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष को भी एड़ी चोटी का जोर लगाते हुए कूटनीतिक दांव खेलने पड़े थे। सूत्रों की माने तो जयराम सरकार के 5 वर्ष के कार्यकाल में यह तीनों दिग्गज भाजपाई अपने भारी समर्थकों के साथ पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार भी हुए थे।

    5 सालों तक पार्टी में हुई अनदेखी के चलते इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा में रीना कश्यप की जीत को लेकर मंडल के समक्ष चुनौती बन गई थी। बताया तो यह भी जा रहा है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे जीआर मुसाफिर को चुनाव में डटे रहने के लिए जोड़-तोड़ सहित कूटनीतिक दांव भी खेले गए थे।

    भाजपा रणनीतिकार यह अच्छी तरह से जानते थे कि यदि जीआर मुसाफिर मैदान से हट गए तो निश्चित ही कांग्रेस की प्रत्याशी दयाल प्यारी भारी मतों से जीत सकती है। बताया जाता है कि समीक्षा बैठक में कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी।

    जिसमें निष्क्रिय और पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर इन तीन दिग्गजों को निष्कासित किए जाने की सिफारिश भी की गई थी। सूत्रों की माने तो 2024 से पहले पहले भाजपा मंडल एक बाधारहित मैदान तैयार कर रहा है। जिसके चलते अब एक बार फिर से इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के अंदर घमासान छिड़ने के आसार पैदा हो गए हैं।

  • सिरमौर में बारिश और तूफान के बावजूद गेहूं की पैदावार गत वर्ष से ढाई गुना ज्यादा

    सिरमौर में बारिश और तूफान के बावजूद गेहूं की पैदावार गत वर्ष से ढाई गुना ज्यादा

    कृषि विभाग ने इस बार इतने हजार हेक्टेयर भूमि के लिए की है बीज की तैयारी……

    HNN/ नाहन

    भारी बारिश और तूफान के बावजूद गेहूं उत्पादन में जिला सिरमौर का कृषि विभाग बेहतर साबित हुआ है। बीते वर्ष जहां जिला में एमएसपी के अनुसार केवल 17 अट्ठारह हजार क्विंटल गेहूं ही पैदा हो सकी थी। वहीं इस बार 45 से 50 हजार क्विंटल के बीच पैदावार होने की पूर्ण संभावना है।

    इसकी बड़ी वजह किसानों को सही समय और बेहतर बीज कृषि विभाग के द्वारा उपलब्ध कराया जाना माना जा रहा है। हालांकि खड़ी फसल पर भारी बारिश के असर के चलते केवल 10 सीड उत्पादन पर फर्क पड़ सकता है मगर बीते वर्ष की तुलना में इस बार का उत्पादन ढाई गुना से अधिक होने की उम्मीद है।

    तूफान और बारिश के चलते गेहूं की ग्रेडिंग में फर्क पड़ सकता है जिसके लिए किसान पहले से तैयार है। बता दें कि जिला सिरमौर में करीब 24,000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं उगाई जाती है। यहां सबसे बड़ा किसानों और कृषि विभाग का दुर्भाग्य यह कहा जा सकता है कि जो उपजाऊ जमीन सीड मल्टीप्लाई के लिए उपलब्ध थी वह सैकड़ों बीघा जमीन आईआईएम और आईआरबी को चली गई है।

    बावजूद इसके कृषि विभाग के द्वारा इस बार 7000 हेक्टेयर बीज के लिए रणनीति तैयार की गई है। कृषि विभाग ने इसके लिए किसानों और अपने सरकारी फॉर्म को चुना है। अब यदि विभाग के पास अपनी पहले वाली जमीन उपलब्ध होती तो ना केवल जिला सिरमौर में उगाई जाने वाली गेहूं बेहतर होती बल्कि ब्रीडर सीड को मल्टीप्लाई करने की भी कोई परेशानी ना होती।

    बताना जरूरी है कि पिछले से पिछले वर्ष 36,000 क्विंटल पिछले वर्ष 17 से 18,000 क्विंटल गेहूं का उत्पादन ही हो पाया था। पिछले वर्ष गेहूं के उत्पादन कम होने की बड़ी वजह मौसम को माना गया है। पिछले वर्ष समय से पहले ही अधिक गर्मी के चलते गेहूं पक गया था। मगर गेहूं में समय से पहले तैयार होने पर उसमें वजन नहीं रहा था।

    मगर इस बार अनुकूल परिस्थितियों के चलते और लोकल जलवायु के आधार पर तैयार किया गया बीज किसानों के निराश चेहरों पर उम्मीद की लौ बनकर चमक रहा है। उधर, जिला सिरमौर कृषि विभाग उपनिदेशक राजेंद्र ठाकुर ने खबर की पुष्टि भी की है।