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  • वन विभाग का कारनामा, नाबालिग को दे दी मल्टी पर्पस वर्कर की नौकरी

    वन विभाग का कारनामा, नाबालिग को दे दी मल्टी पर्पस वर्कर की नौकरी

    फर्जी एक्सपीरियंस लेटर की नहीं की जांच, पात्र व्यक्ति को जानबूझकर किया बाहर

    HNN / नाहन

    वन विभाग द्वारा वन मंडल नाहन के अंतर्गत की गई अनुबंध के आधार पर मल्टी पर्पस वर्कर्स भर्ती के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। वन विभाग हिमाचल प्रदेश के द्वारा वर्ष 2016-17 में अभिषेक कुमार पुत्र जयराम को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी दी गई थी। तो वही पात्र व्यक्ति अमरनाथ पुत्र तेजराम के द्वारा जुटाई गई आरटीआई की जानकारी से यह भी खुलासा हुआ है कि जिस व्यक्ति को वन विभाग के द्वारा नौकरी दी गई है, वह उस दौरान नाबालिग था।

    हैरानी तो इस बात की है कि जिस दौरान यानी 1 अप्रैल 2014 से लेकर अगस्त 2016 तक जो हाउस मैन कम माली का एक्सपीरियंस लेटर आमोद रिजॉर्ट मनाली से प्राप्त किया था वह भी फर्जी बनाया गया है। रिजॉर्ट के मालिक हरीश के द्वारा साफ तौर से मना कर दिया गया है कि जो एक्सपीरियंस लेटर दर्शाया गया है वह उनकी कंपनी का नहीं है।

    इससे भी हैरान कर देने वाला तथ्य यह भी है कि अभिषेक पुत्र जयराम को वर्ष 2016-17 में वन विभाग में कुकिंग के आधार पर चयनित किया गया। उनके द्वारा दिए गए अनुभव पत्र में 1 मार्च 2011 से 31 मार्च 2014 तक किचन हेल्पर का फुल टाइम कार्य दर्शाया गया है। जबकि उम्मीदवार की जन्मतिथि 9 अक्टूबर 1997 है और इसकी आयु 13 वर्ष 5 महीने बनती है। 2012 में इसने खलीनी शिमला से दसवीं और 2015 में लालपानी शिमला से 12वीं की है।

    ऐसे में युवक को किस आधार पर चयनित किया गया यह चर्चा का विषय बना हुआ है। इतना ही नही युवक को प्रैक्टिकल में 23 नंबर दिए गए थे और तीन साल के अनुभव के आधार पर उसको 6 अंक बिना किसी दस्तावेजों की जाँच के दिए गए। उधर, नाहन वन वृत्त की पाल सरिता कुमारी ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है जिस पर जांच चल रही है। जो भी दोषी होगा उसकी विरुद्ध उचित कार्यवाही की जाएगी।

  • शिक्षा पर सफर की मार, सरकार के पास नहीं शिक्षकों के लिए आवासीय सुविधा

    शिक्षा पर सफर की मार, सरकार के पास नहीं शिक्षकों के लिए आवासीय सुविधा

    HNN/ नाहन

    हिमाचल प्रदेश में जहां अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सरकारी आवासीय सुविधा का प्रावधान है तो वही शिक्षा विभाग के किसी भी कर्मचारी को आवासीय सुविधा है ही नहीं। प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत करीब 80000 कर्मचारी आज भी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। आवासीय सुविधा ना होने के कारण जहां शिक्षक का अधिकतर समय सफर में ही बीत जाता है तो वही शिक्षक भी केवल ड्यूटी बजाने तक ही सीमित रह गया है।

    हालांकि शहरों में शिक्षकों को आवासीय सुविधा किराए पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है मगर दूरदराज क्षेत्र में स्कूल स्टाफ को किराए पर भी कमेंडेशन नहीं मिल पाती है। राज्य एसजीटीयू यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान तथा जिला सिरमौर प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि भले ही वित्तीय स्थिति के चलते हर स्कूल के साथ आवासीय सुविधा बना पाना फिलहाल मुश्किल होगा मगर हर जिला में बनाए जाने वाले आदर्श विद्यालयों में स्टाफ के लिए आवासीय सुविधा भी बनाए जाने का प्रावधान होना चाहिए।

    उन्होंने मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में गुरुकुल योजना शुरू की गई थी मगर अभी भी कई ऐसे गुरुकुल भवन है जो बनकर तैयार नहीं हुए हैं। जिला सिरमौर में बोधार में केवल एक ही गुरुकुल है जिसका नाम यशवंत गुरुकुल है। हैरानी का विषय तो यह भी है कि प्रदेश के हर जिला में शिक्षा विभाग के हायर एजुकेशन तथा एलिमेंट्री विभाग के उपनिदेशकों के लिए भी जिला मुख्यालयों में गवर्नमेंट अकोमोडेशन नहीं है। दूरदराज क्षेत्रों में गांव से कई किलोमीटर दूर बने स्कूलों में अध्यापकों को आने जाने के लिए बसों पर निर्भर रहना पड़ता है।

    ऐसे में यदि बस छूट जाए तो स्कूल पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। देरी के कारण बच्चों को सिलेबस कंप्लीट करवा पाने में भारी परेशानी भी उठानी पड़ती है। अब यदि बनाए गए स्कूलों में अथवा नए बनाए जाने वाले स्कूलों में आवासीय सुविधा का भी प्रावधान रखा जाएगा तो ना केवल शिक्षा गुणवत्ता परक होगी बल्कि अध्यापक के कैंपस में ही उपलब्ध रहने पर अतिरिक्त क्लास का फायदा भी बच्चों को मिल सकेगा।

    उधर, इस विषय पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से जब बात की गई तो उन्होंने खुद इच्छा जताते हुए कहा कि प्रदेश के हर स्कूल में आवासीय सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने कहा प्रदेश में करीब 80000 शिक्षक है और 18000 स्कूल है। ऐसे में इस पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि वह इस सुविधा को लेकर जल्द ही एक बैठक भी रखेंगे। यही नहीं उन्होंने कहा कि भविष्य में नए बनाए जाने वाले स्कूलों में आवासीय सुविधा रखने का प्रावधान भी रखे जाने के प्रयास किए जाएंगे।

  • प्रदेश में डिस्टलरी उद्योग इन्वेस्टर्स को सरकार देगी टाइमबॉन्ड समय में सभी क्लीयरेंस- हर्षवर्धन चौहान

    प्रदेश में डिस्टलरी उद्योग इन्वेस्टर्स को सरकार देगी टाइमबॉन्ड समय में सभी क्लीयरेंस- हर्षवर्धन चौहान

    HNN/ शिमला

    प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने जहां इन्वेस्टर्स के लिए सिंगल विंडो को खत्म कर उद्योग स्थापित करने को लेकर अधिकारियों की टाइमबॉन्ड जिम्मेवारी सुनिश्चित की है तो वही डिस्टलरी उद्योग को प्रदेश में बढ़ावा देने के लिए फ्रेंडी माहौल देने का वायदा भी किया है। असल में प्रदेश में स्थापित करीब 19 बॉटलिंग प्लांट अधिकतर शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली ईएनए बाहरी राज्यों से लेते हैं। जिसके चलते सरकार को एक हेल्दी राजस्व नहीं मिल पा रहा था। यही नहीं प्रदेश में डिस्टलरी प्लांट लगाने को लेकर इन्वेस्ट अभी कोई खास रूचि नहीं दिखा पा रहे थे।

    यहां बताना जरूरी है कि प्रदेश में करीब 19 बॉटलिंग प्लांट है जिनमें अधिकतर जिला सिरमौर में लगे हुए हैं। इन बॉटलिंग प्लांट में जो ईएनए बाहरी राज्यों से लाई जाती है उस पर 9 रूपए प्रति प्रूफ्रीडर इंपोर्ट फीस लगती है। जबकि यदि यह बॉटलिंग प्लांट हिमाचल की डिस्टलरी से ईएनए लेते हैं तो उन्हें 9 रूपए प्रति प्रूफ लीटर इंपोर्ट फीस नहीं देनी होगी। बॉटलिंग उद्योग से जुड़े उद्योग पतियों का कहना है कि प्रदेश में पीएपीएल कांगड़ा की डिस्टलरी उनकी आपूर्ति पूरी नहीं कर पाती है। यही नहीं दूसरी डिस्टलरी भी पर्याप्त नहीं पढ़ पा रही है।

    जिसको लेकर उन्हें मजबूरन बाहर से इंपोर्ट फीस देकर अल्कोहल लेना पड़ता है। गौरतलब हो कि प्रदेश में चार डिस्टलरीज है जिनमें से दो फंक्शनिंग में है जबकि नालागढ़ तथा ऊना में दो नए डिस्टलरी उद्योग लगभग बनकर तैयार होने वाले हैं। अब यदि इस वर्ष के अंत तक यह दोनों डिस्टलरी फंक्शनिंग में आ जाती है तो सरकार को 50 से 60 करोड़ रुपए तक का राजस्व भी मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि प्रदेश में बॉटलिंग प्लांट पर्याप्त है मगर इन बॉटलिंग प्लांट की आपूर्ति को लेकर पर्याप्त डिस्टलरीज नहीं है। ऐसे में सरकार ने डिस्टलरी उद्योग को प्रदेश में आकर्षित करने के लिए अपने दरवाजे भी खोल दिए हैं।

    बड़ी बात तो यह है कि यदि कोई इन्वेस्टर प्रदेश में डिस्टलरी लगाना चाहता है तो सरकार की ओर से उद्योग को स्थापित करने में जो एनओसी लेनी पड़ती है वह सारी जिम्मेवारी एक टाइमबॉन्ड के साथ सरकार बना कर देगी। यानी उद्योगपति को केवल उद्योग के लिए अप्लाई करना है बाकी तमाम कागजी कार्रवाई सरकार द्वारा स्थापित किए जाने वाला लीगल डिपार्टमेंट निश्चित समय पर करेगा। बता दें कि आई एन ए ना केवल शराब उद्योग बल्कि दवा उद्योग में भी इस्तेमाल होता है।

    दोनों एल्कोहल अलग-अलग तरीके के होते हैं एक एल्कोहल खाने योग्य और दूसरा खाने योग्य नहीं होता। प्रदेश में दोनों तरह के अल्कोहल की अच्छी खासी डिमांड भी है। उधर, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यदि कोई प्रदेश में डिस्टलरी उद्योग में इन्वेस्टमेंट करना चाहता है तो उसको सरकार की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    वही राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त यूनुस खान ने कहा कि प्रदेश में चार डिस्टलरी है जिनमें से एक फिलहाल बंद है जबकि पीएपीएल फंक्शनिंग में है। उन्होंने कहा इस वर्ष के अंत तक दो नई डिस्टलरीज नालागढ़ और ऊना में फंक्शनिंग में आ जाएंगी। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि प्रदेश की डिस्टलरी से जो ईएनए लिया जाता है उस पर इंपोर्ट फीस नहीं है जबकि बाहर से लाई जाने वाली ईएनए पर 9 रूपए प्रति 5 लीटर इंपोर्ट फीस देनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 19 बॉटलिंग प्लांट, चार डिस्टलरी तथा दो ब्रूवरी हैं।

  • 150 करोड़ में इंडियन टेक्नॉमैक की नीलामी पर बड़ा सवाल

    150 करोड़ में इंडियन टेक्नॉमैक की नीलामी पर बड़ा सवाल

    HNN/ नाहन

    18 जनवरी को नीलाम होने जा रही 6000 करोड़ के घोटाले वाली सिरमौर स्थित इंडियन टेक्नॉमैक की नीलामी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। कंपनी पर 2008 से 2014 तक करीब 2175 करोड रुपए की वैट चोरी के आरोप लगे थे। जबकि सोलह सौ करोड से भी अधिक के लोन झूठे दस्तावेजों के साथ कई बैंकों से भी लिए गए थे। इसके साथ-साथ बिजली बोर्ड के बिल व अन्य विभागों की लायबिलिटीज के साथ करीब 6000 करोड़ का फर्जीवाड़ा तथा देनदारियां सामने आई थी।

    राज्य कर एवं आबकारी विभाग की इकोनामिक इंटेलिजेंस यूनिट के द्वारा मामला उठाया गया था। जिसके बाद राज्य सीआईडी के द्वारा इसकी जांच भी की गई। मामला अभी भी माननीय अदालत में विचाराधीन चला हुआ है। बावजूद इसके 2175 करोड़ रुपए सरकार की टैक्स चोरी की रिकवरी के लिए इस वाइट एलीफैंट को 150 करोड रुपए में नीलाम किए जाने की तैयारी हो रही है। नीलामी की यह तारीख माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा सुनिश्चित की गई है।

    मगर यहां बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि जब यह घोटाला पकड़ा गया था तो उस समय कंपनी के मालिक राकेश शर्मा पर 2175 करोड़ रुपए का जुर्माना देय सुनिश्चित किया गया। जिसके बाद राकेश शर्मा अपील में गया। मगर अपील में भी उस पर 1000 करोड़ के आसपास का कंडीशनर अमाउंट लगाया गया।

    सवाल यह उठता है कि यदि यह कंडीशनल अमाउंट 400-500 करोड़ के आसपास लगाया जाता तो कुछ अमाउंट के साथ टैक्स भी जमा होता रहता और करीब 3000 लोगों का रोजगार भी ना जाता। खुद को चारों तरफ से घिरता देख कंपनी का मालिक और उनकी टीम फरार हो गई। बता दे इस दौरान फैक्ट्री में इनकम टैक्स की भी रेड हुई थी। उसमें क्या हुआ था इसकी जानकारी हमें नहीं मिल पाई है मगर इनकम टैक्स की रेड हुई थी यह कंफर्म था।

    अब सवाल यह भी उठता है कि 150 करोड रुपए में कुल लगे देनदारी के आरोप में सबसे ज्यादा लायबिलिटी बैंक की बनती है। सूत्रों का कहना है कि बैंक और इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड भी अपना हिस्सा मांग सकता है। अब यदि इन दोनों की लायबिलिटी के बाद राज्य कर एवं आबकारी विभाग यानी सरकार को 20 -25 करोड़ ही मिल पाए तो उसका क्या फायदा होगा। जबकि इतना तो वह सालाना टैक्स भी सरकार को दे रहा था।

    उधर, इंडियन टेक्नॉमैक की नीलामी प्रक्रिया देखने वाले अधिकारी जीडी ठाकुर से उनके मोबाइल नंबर 86796 68 000 तथा 8 894230005 पर बात करनी चाही तो पहला नंबर 3 दिन से अंगेज टोन दे रहा है और दूसरा नंबर बंद दिखा रहा है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त युसूफ खान से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

  • ओपीएस राज्य स्तरीय आभार रैली में सिरमौर से 20 हजार की उपस्थिति होगी दर्ज- पुंडीर

    ओपीएस राज्य स्तरीय आभार रैली में सिरमौर से 20 हजार की उपस्थिति होगी दर्ज- पुंडीर

    “आश्रय श्री योजना” के लिए प्रदेश का कर्मचारी वर्ग अपने वेतन से मुख्यमंत्री को करेगा सहयोग

    HNN / नाहन

    ओल्ड पेंशन स्कीम को यथावत बहाल करने को लेकर जिला सिरमौर एनपीएस कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है। राज्य स्तरीय आभार रैली को ऐतिहासिक बनाने के उद्देश्य से जिला कार्यकारिणी के द्वारा रविवार को प्रेस क्लब नाहन में एक बैठक का भी आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता एनपीएस कर्मचारी संघ जिला सिरमौर के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर की अध्यक्षता में हुई।

    जिसमें राज्य उपाध्यक्ष सुनील तोमर, राज्य सलाहकार जोगीराम कन्याल, राज्य कार्यकारिणी सदस्य हृदय उर्फ हनी ठाकुर, जिला महिला विंग अध्यक्ष प्रीतिका, राज्य प्रवक्ता ओम प्रकाश शर्मा, उपाध्यक्ष जगदीश परमार, कोषाध्यक्ष जगदीश ठाकुर, महासचिव एनके कौशल, खंड अध्यक्ष जितेंद्र चौहान, संदीप कश्यप, प्रवीण शर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

    बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि पूर्व सरकार के द्वारा ओपीएस बहाली को लेकर कर्मचारियों के साथ दमनकारी नीतियां अपनाई गई। उन्होंने कहा कि संघ के द्वारा शांतिपूर्वक ढंग से तथ्यों के साथ यह बताने की कोशिश भी की गई थी कि सरकार बगैर किसी आर्थिक दबाव के ओपीएस बहाल कर सकती है। बावजूद इसके प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर झूठे मुकदमे बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया गया।

    सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और राज्य कांग्रेस के द्वारा अपने चुनावी घोषणा पत्र में ओपीएस बहाली को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जो वादा किया था वह पूरा करके दिखाया है। प्रदेश सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सबसे पहले ओपीएस बहाल कर अपना वायदा पूरा करके दिखाया है। सुरेंद्र पुंडीर ने कहा, प्रदेश का हर कर्मचारी वर्ग प्रियंका गांधी, प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित समस्त कांग्रेस का दिल से आभार व्यक्त करते हैं।

    उन्होंने कहा प्रदेश का कर्मचारी वर्ग सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा। यही नहीं, उन्होंने कहा कि प्रदेश का हर कर्मचारी अब पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम भी करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही राज्य स्तर पर ओपीएस बहाली को लेकर आभार रैली का आयोजन किया जाएगा। जिसमें करीब 1 लाख कर्मचारी शिमला में मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करेंगे।

    सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि इस आभार रैली में जिला सिरमौर से कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों सहित 20,000 की संख्या में रैली में शरीक होंगे। सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि मुख्यमंत्री कर्मचारी हितैषी हैं, तो वही कर्मचारी वर्ग भी उनके द्वारा चलाई गई आश्रय श्री योजना में अपने मासिक वेतन से इच्छा अनुसार अनुदान भी करेंगे। यह जानकारी उन्होंने बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी।

  • नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए बहुत जल्द बना दिया जाएगा अल्टरनेट रोड- सोलंकी

    नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए बहुत जल्द बना दिया जाएगा अल्टरनेट रोड- सोलंकी

    HNN/ नाहन

    सरकार के बनते ही नाहन के नवनिर्वाचित विधायक अजय सोलंकी ने विकास कार्यों का बिगुल भी फूंक दिया है। विधायक के द्वारा मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं में नासूर साबित हो रहे ट्रैफिक जाम समस्या से निजात दिलाने के लिए एक जटिल समस्या का हल निकाल लिया है। एनएच-907ए से मेडिकल कॉलेज तक एक अल्टरनेट रोड बनाए जाने को लेकर योजना को अमलीजामा पहनाया जाना शुरू भी कर दिया गया है।

    तो वही लोक निर्माण विभाग के द्वारा नाहन-शिमला एनएच से मेडिकल कॉलेज तक के लिए सड़क की एलाइनमेंट फाइनल कर ली गई है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ दलवीर सिंह राणा के द्वारा इस सड़क के लिए दो प्रपोजल तैयार किए गए हैं। जिसमें एक प्रपोजल करीब 1200 मीटर की है जबकि दूसरी प्रपोजल 900 तैयार की गई है। इस वैकल्पिक मार्ग की सबसे अच्छी बात तो यह है कि इसकी चौड़ाई 8 मीटर से 10 मीटर तक रखी जानी तय की गई है।

    इस वैकल्पिक मार्ग को बनाए जाने में वेटरनरी एग्रीकल्चर तथा रेवेन्यू विभाग की जमीन का कुछ हिस्सा बीच में आ रहा है। विधायक अजय सोलंकी के द्वारा आश्वस्त करते हुए कहा गया कि इस वैकल्पिक मार्ग के लिए उपायुक्त के माध्यम से विभागों से अनापत्ति पत्र लिया जाएगा। विधायक सोलंकी ने यह भी कहा कि नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए एक सेफ पैसेज का होना उनकी पुरानी समस्या थी।

    उन्होंने कहा कि इसके लिए कई बार पूर्व सरकार और प्रशासन को भी अवगत कराया गया मगर कोई समाधान नहीं निकल पाया था। विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार एक बेहतर व्यवस्था के साथ जन सेवा के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान बहुत जल्द कर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।

    वही लोक निर्माण विभाग के एसडीओ दलबीर सिंह राणा ने बताया कि इस वैकल्पिक मार्ग के लिए एलाइनमेंट फाइनल हो गई है। मेडिकल प्रबंधन से जमीन का रेवेन्यू रिकॉर्ड मांगा गया है। वहीं मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ श्याम कौशिक ने कहा कि वैकल्पिक मार्ग के समाधान हेतु विधायक अजय सोलंकी ने पूरी तरह से आश्वस्त किया है कि अन्य विभागों की जमीन संबंधी एनओसी के लिए समाधान भी कर लिया जाएगा।

  • हाउस टैक्स डिफॉल्टर्स का एमसी पर एक करोड़ बकाया

    हाउस टैक्स डिफॉल्टर्स का एमसी पर एक करोड़ बकाया

    फ्लैट विक्रेता की पौ बारह जुगाड़ बाजी कर टैक्स और पानी के बिलों पर लगा रहे सरकार को चूना

    HNN / नाहन

    नाहन नगर परिषद के अंतर्गत शहर की डिवेलपमेंट पर हाउस टैक्स डिफॉल्टर्स भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। नाहन एमसी के अंतर्गत करीब 10,000 घर एनरोल है। बावजूद इसके अधिकतर घरों के द्वारा हाउस टैक्स जमा नहीं करवाया गया है। इन डिफाल्टर में ना केवल हाउ ऑनर बल्कि ऐसे कारोबारी भी है जिन्होंने एमसी की संपत्तियां किराए पर ली हुई है। अब यदि बात की जाए बकाया टैक्स की तो करीब 1 करोड से अधिक का हाउस व अन्य टैक्स एमसी के बकाया पड़े हुए हैं।

    जिसको लेकर एमसी के द्वारा किए जाने वाले शहर के विकासात्मक कार्यों को लेकर आर्थिक कमी आडे भी आ रही है। जहां इस समय सरकार के समक्ष फाइनेंस एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं नाहन शहर के अंतर्गत बने दर्जनों फ्लैट सरकार को चूना भी लगा रहे हैं। हैरानी तो इस बात की है कि बिल्डर द्वारा फ्लैट तो बना दिए गए, मगर रेवेन्यू रिकॉर्ड में जमीन ऑनर बिल्डर ही दर्शाए गए हैं।

    ऐसे में नियमानुसार जिन लोगों को फ्लैट बनाकर अलॉट किए गए हैं वहां पर सोसायटी बनाया जाना जरूरी होता है। मगर यहां पर बिल्डर के द्वारा फ्लैट की रजिस्ट्री करवा कर उन्हें डोमेस्टिक वाटर कनेक्शन का राइट दिलवा दिया गया है। जबकि फ्लैट ओनर जब तक जमीनी अधिकार नहीं रखता तब तक उस भूखंड पर बनाये गए भवनों में कमर्शियल वॉटर कनेक्शन और व्यवसायिक हाउस टैक्स ही देय होता है। इस प्रकार अधिकतर फ्लैट ओनर सरकार को मोटा चूना भी लगा रहे हैं।

    अब यदि जिन लोगों को फ्लैट बेचे गए हैं उन्हें यदि जमीनी अधिकार भी मिलता है तब उन्हें डोमेस्टिक कनेक्शन और घरेलू हाउस टैक्स ही देना पड़ेगा। नाहन शहर में केवल विला राउंड में ही बन रहे फ्लैट रेरा के द्वारा परमिशन लेकर बनवाए जा रहे हैं जो कि सारे पैरामीटर्स को पूरा भी करते हैं। इसके अलावा अधिकतर ऐसे फ्लैट हैं जो ना केवल सरकार को जुगाड़ बाजी कर टैक्स में चूना लगा रहे हैं बल्कि इनके निर्माण भी नियमों को ताक पर रख कर किए गए हैं।

    यहां यह भी बताना जरूरी है कि डोमेस्टिक यानी निजी घर पर एमसी के द्वारा 7.2 परसेंट पर स्क्वायर मीटर हाउस टैक्स निर्धारित किया गया है। जबकि कमर्शियल रेट 10 परसेंट रखा गया है। यह टैक्स साल में एक बार जमा करवाना होता है। उधर, जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय तोमर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शहर में कितने फ्लैट बने हैं उसका उनके पास फिलहाल कोई रिकॉर्ड नहीं है।

    उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि डिफॉल्टर्स का करीब एक करोड रुपए हाउस टैक्स पेंडिंग पड़ा हुआ है। वही, जल शक्ति विभाग के एसडीओ मनीत भारद्वाज का कहना है कि शहर के कुछ ऐसे फ्लैट हैं जिनके द्वारा कमर्शियल कनेक्शन लिया गया है उनके लिए विभाग के द्वारा अलग से लाइन और पानी की मात्रा भी ज्यादा दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि इनके अलावा फ्लैट के निजी मालिक के द्वारा एमसी से अनापत्ति पत्थर लाकर डोमेस्टिक कनेक्शन लिया जाता है।

    वहीं, उपायुक्त जिला सिरमौर आरके गौतम ने बताया कि शहर में कितने ऐसे फ्लैट हैं जो नियमों की अनदेखी कर रहे हैं इसके बाबत संबंधित विभाग से जानकारी ली जाएगी।

  • एनसीसी से मिलता है देश को बेहतर जवान और बेहतर नागरिक- कर्नल राजीव शर्मा

    एनसीसी से मिलता है देश को बेहतर जवान और बेहतर नागरिक- कर्नल राजीव शर्मा

    इस बार एनसीसी सीएटी-C231 प्रशिक्षण शिविर में 368 कैडेट्स देंगे ए सर्टिफिकेट के लिए परीक्षा

    HNN / नाहन

    देश को एक बेहतर सोल्जर और एक बेहतर अनुशासित नागरिक देने में एनसीसी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बात आज मंगलवार को जेएनवी में चल रहे आठ दिवसीय एनसीसी कंबाइंड एनुअल ट्रेनिंग कैंप के दौरान कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजीव शर्मा ने कहीं। बता दें कि फस्ट एचपी इंडिपेंडेंट कंपनी एनसीसी नाहन के द्वारा एनसीसी में कैडेट्स के लिए ए, बी और सी सर्टिफिकेट के लिए कंबाइंड एनुअल ट्रेनिंग कैंप आयोजित किया जा रहा है। आयोजित कैंप में जिला सिरमौर के 21 शैक्षणिक संस्थानों के 478 कैडेट हिस्सा ले रहे हैं।

    इन शैक्षणिक संस्थानों में 3 डिग्री कॉलेज और 18 विद्यालय पार्टिसिपेट कर रहे हैं। कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजीव शर्मा और सूबेदार उधम सिंह, सीएचएम जुल्फिकार अली, हवलदार इरशाद, हवलदार बादल, हवलदार ओम दत्त आदि के मार्गदर्शन में चल रहे इस ट्रेनिंग कैंप में कैडेट्स को साधारण तथा विशेष दोनों तरह के विषयों सहित हथियार चलाना, मैप रीडिंग सहित अन्य सैनिक गतिविधियों के बारे में ट्रेनिंग दी गई।

    यहां आप यह भी जानकर हैरान हो जाएंगे कि कंपनी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजीव शर्मा, कारगिल वॉर हीरो भी रहे हैं। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने एनसीसी कैडेट्स को दुश्मन का आमना-सामना होने पर कैसे खुद को सुरक्षित रखते हुए दुश्मन की चाल को भागते हुए कैसे उनके दांत खट्टे करने हैं यह भी जानकारी दी। कर्नल राजीव शर्मा ने बताया कि इस बार 13 जनवरी को ए सर्टिफिकेट के लिए 368 कैडेट्स परीक्षा देंगे। सबसे बड़ी बात उन्होंने यह बताई कि जिला सिरमौर से एनसीसी के 58 पासआउट कैडेट्स बिना किसी रिटर्न टेस्ट के अग्निवीर चयनित हुए हैं।

    यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि जिस एनसीसी कैडेट को ए सर्टिफिकेट मिलता है वह आर्मी में ऑफिसर रैंक के लिए बिना किसी रिटर्न परीक्षा के भर्ती दे सकता है। कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजीव शर्मा ने तमाम शिक्षण संस्थानों से अपील करते हुए कहा कि छात्रों को एक बेहतर अनुशासित नागरिक बनाने और एक अच्छा सोल्जर बनाने में मदद करने हेतु एनसीसी की ट्रेनिंग के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि एनसीसी एक ऐसा जरिया है जो ना केवल देश सेवक का जज्बा देता है बल्कि युवा पीढ़ी को अनुशासन और एकता के साथ जीने का सलीका भी सिखाता है।

  • सिरमौर के बॉर्डर एरिया पेट्रोल पंप से हो रही डीजल की तस्करी पर अब नकेल

    सिरमौर के बॉर्डर एरिया पेट्रोल पंप से हो रही डीजल की तस्करी पर अब नकेल

    राज्य कर एवं आबकारी विभाग के ध्यान में आया मामला, कमिश्नर ने दिए यह आदेश…

    HNN/ पांवटा साहिब

    बीते 3 सालों में कालाअंब तथा पांवटा साहिब बॉर्डर एरिया पेट्रोल पंप से हो रही डीजल तस्करी पर अब नकेल लग जाएगी। राज्य कर एवं आबकारी विभाग के कमिश्नर यूनुस खान के द्वारा इसके लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। हालांकि इस योजना के तहत बद्दी-बरोटीवाला के एक पेट्रोल पंप से करीब 9 करोड़ से अधिक डीजल दूसरे राज्य में वैट चोरी के मामले का विभाग पर्दाफाश कर चुका है। यही नहीं, विभाग के द्वारा एक करोड़ से अधिक का जुर्माना भी पेट्रोल पंप पर लगाया जा चुका है। तो वही जिला सिरमौर के साथ सटी हिमाचल-उत्तरांचल की सीमा पर भी डीजल और पेट्रोल वैट बचाकर बेचा जा रहा है।

    कालाअंब और पांवटा साहिब में सारा दिन ड्रम और जुगाड़ कर बनाए गए छोटे-छोटे टैंकरों में डीजल बेचा जा रहा है। हालांकि नियमानुसार डीजल अथवा पेट्रोल केवल वाहन में ही डाला जाना चाहिए। मगर कालाअंब में तो इससे भी अधिक आगे बढ़कर जुगाड़ किए जा रहे हैं। हालांकि जिला सिरमौर राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अधिकारी बराबर सर्विलांस पर रहते हैं, मगर पेट्रोल पंप डीजल का कारोबार करने वाले हरियाणा के व्यवसायी अपने कुछ व्यक्ति मोबाइल के साथ जीएसटी भवन नाहन और दोसड़का में खड़े कर देते हैं। जैसे ही किसी अधिकारी की मूवमेंट पांवटा साहिब-कालाअंब की और होती है तो इसकी सूचना तुरंत आगे दे दी जाती है।

    जिसके बाद अधिकारी खाली हाथ लौट आते हैं। मगर अब हेड ऑफ द डिपार्टमेंट यूनुस खान के द्वारा रेंडम चेकिंग के लिए दूसरे जिला से टीम तैयार की जाएगी। इस टीम की भनक अवैध कारोबारियों को लग पाना मुश्किल हो जाएगा। बावजूद इसके अधिकारी सेल पर चेंज को लेकर भी जांच कर सकते हैं। वही एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि सरकार के द्वारा वैट बढ़ाकर सही निर्णय लिया गया है। बावजूद इसके उत्तराखंड और हरियाणा तथा पंजाब में अभी भी डीजल महंगा है। कालाअंब में जुगाड़ बाजी के तहत हरियाणा के अधिकतर बड़े ट्रक एक दिन में कई-कई चक्कर डीजल भराने में लगाते हैं। यह वाहन यहां से डीजल ले जाकर पड़ोसी राज्य में दो और तीन के मार्जिन पर बेच देते हैं।

    तो वही बहुत सारी ऐसी इंडस्ट्रीज भी है जो डीजल ड्रम तथा छोटे टैंकरों में लेकर जाते हैं। जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं किया जा सकता है। हैरानी तो इस बात की है कि फैक्ट्री संचालकों के द्वारा प्रशासन अथवा विभाग से भी किसी प्रकार की परमिशन नहीं ली गई है। उधर, राज्य कर एवं आबकारी विभाग कमिश्नर यूनुस खान ने बताया कि विभाग अब इस तरह के कारनामों पर नकेल लगाने के लिए रैंडम चेकिंग विशेष योजना के तहत करेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत कोई भी पेट्रोल पंप संचालक यदि वैट चोरी कर दूसरे राज्य में डीजल बेचता हुआ पाया गया तो उस पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

  • जान है तो जहान है, धुंध में सुरक्षा को लेकर जागरूक करती नाहन ट्रैफिक पुलिस

    जान है तो जहान है, धुंध में सुरक्षा को लेकर जागरूक करती नाहन ट्रैफिक पुलिस

    HNN/ नाहन

    चालान के खौफ से नहीं जीवन की सुरक्षा और घर पर कर रहे परिवार के सदस्यों के इंतजार को ध्यान में रखकर ट्रैफिक नियम अपनाने चाहिए। यह संदेश आज रविवार को नाहन ट्रैफिक पुलिस के द्वारा वाहन चालकों को दिया गया। हेड कांस्टेबल ट्रैफिक पुलिस खेमराज और ट्रैफिक कॉन्स्टेबल मोहिंदर सिंह ने आते-जाते वाहन चालकों को बताया कि धुंध के दौरान कौन से सुरक्षा नियम अपनाने चाहिए। उन्होंने बताया कि धुंध के दौरान माननीय न्यायालय के द्वारा पारित आदेशों के अनुसार वाहन के आगे और पीछे रिफ्लेक्टर लगाना जरूरी है।

    उन्होंने लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि धुंध के दौरान वाहनों को लो- बीम के साथ रात को तथा दिन में सड़क पर लगी रिफ्लेक्टर लाइनों के अनुसार ही चलना चाहिए। उन्होंने बताया कि धुंध के दौरान सड़क के बीच या सड़क के किनारे गाड़ी पार्क करने के दौरान गाड़ी में रखें रिफ्लेक्टर सिग्नल को गाड़ी के आगे और पीछे सड़क पर रखना चाहिए। इसका सबसे बड़ा फायदा उन्होंने बताया कि आने-जाने वाले वाहनों को रिफ्लेक्टर से पार्किंग की हुई गाड़ी की जानकारी मिलेगी। जिससे खड़ी हुई गाड़ी और सड़क पर चल रही गाड़ी दोनों को सुरक्षा भी मिलेगी।

    एनएच-907 ए आईटीआई के समीप लगाए गए इस जागरूकता नाके के दौरान ट्रैफिक पुलिस के द्वारा अन्य ट्रैफिक नियमों के बारे में भी वाहन चालकों को जागरूक किया। ट्रैफिक पुलिस हेड कांस्टेबल हेमराज ने बताया कि रविवार के दिन लगाए गए इस नाके पर लोगों को वाहन चलाते हुए मोबाइल का इस्तेमाल ना करना दो पहिया वाहन पर हेलमेट का इस्तेमाल करना वगैरा-वगैरा नियमों के बारे में जानकारी भी दी गई।