Loading...

Census 2026 / मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जनगणना 2026 के लिए 15 जून तक स्वगणना पोर्टल पर जानकारी दर्ज कराने की अपील की

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Jun 2026 • 1 Min Read

Census 2026 : 1 जून से 15 जून 2026 तक नागरिक स्वगणना पोर्टल के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेशवासियों से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और संबंधित अधिकारियों को सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े विभिन्न विकास योजनाओं, संसाधनों के आकलन और नीतिगत निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

शिमला

जनगणना प्रक्रिया में सहभागिता की अपील

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेशवासियों से निदेशालय जनगणना द्वारा उपलब्ध कराए गए स्वगणना विकल्प का अधिक से अधिक उपयोग करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि भारत की जनगणना देश की सबसे व्यापक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से जनसंख्या, परिवारों, आवासीय स्थिति और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की जाती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आम नागरिक 1 जून से 15 जून 2026 तक स्वगणना पोर्टल पर जाकर अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वगणना सुविधा का उद्देश्य नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना तथा आंकड़ों के संग्रहण को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाना है।

विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है जनगणना

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार है। इसके माध्यम से जनसंख्या की संख्या, परिवारों की संरचना, आवासीय सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार, संसाधनों की उपलब्धता तथा नागरिकों को प्रदान की जा रही मूलभूत सुविधाओं से संबंधित आंकड़े प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विभिन्न विकास योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करती हैं। जनगणना से प्राप्त जानकारी प्रशासनिक इकाइयों के बेहतर प्रबंधन और संसाधनों के प्रभावी वितरण में भी सहायक होती है।

दो चरणों में होगी जनगणना

मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी। प्रथम चरण के तहत 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का कार्य किया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक भवन, आवासीय इकाई और परिवार से संबंधित बुनियादी जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी, जिसमें परिवार के प्रत्येक सदस्य से संबंधित निर्धारित विवरण दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दोनों चरणों के माध्यम से राज्य की जनसंख्या और आवासीय स्थिति का व्यापक डाटाबेस तैयार किया जाएगा।

डिजिटल माध्यम से एकत्र होगी जानकारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल मोड में की जाएगी। प्रगणक और पर्यवेक्षक मोबाइल आधारित एप्लीकेशन का उपयोग करते हुए मकानों और परिवारों से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से आंकड़ों के संग्रहण, सत्यापन और संकलन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से डेटा की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा जानकारी को तेजी से संसाधित किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्वगणना पोर्टल नागरिकों को स्वयं जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी उपलब्ध कराएगा।

हिमाच्छादित और अन्य क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम

मुख्यमंत्री ने बताया कि भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश में जनसंख्या गणना का कार्यक्रम अलग-अलग चरणों में संचालित किया जाएगा। राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों में द्वितीय चरण का कार्य 11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच किया जाएगा, ताकि मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके। वहीं प्रदेश के शेष क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का कार्य 9 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संचालित होगा। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयावधि के भीतर सभी क्षेत्रों को जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

सही जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना से जुड़े प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और कर्मचारियों को सही, पूर्ण और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, आवास, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों का सहयोग जनगणना प्रक्रिया की सफलता के लिए आवश्यक है और सटीक आंकड़े भविष्य की नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे।

Related Topics: