Himachalnow / शिमला
शिमला स्थित IGMC अस्पताल में सफाई कर्मचारियों ने एक बार फिर अपने वेतन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। शनिवार को कर्मचारियों ने आईजीएमसी अस्पताल के एमएस ऑफिस का घेराव किया, जिससे अस्पताल में सफाई व्यवस्था लगभग दो घंटे तक पूरी तरह से ठप हो गई। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण वे परेशान हैं।
सफाई कर्मचारियों की वेतन की समस्या
सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें वेतन समय पर नहीं मिल रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। सार्वजनिक क्षेत्र ट्रेड यूनियन (सीटू) के बैनर तले, कर्मचारियों ने यह विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र ने कहा, “अगर अस्पताल प्रबंधन का रवैया ऐसा ही रहा, तो हम सभी मिलकर अपने हक के लिए संघर्ष करेंगे। हमने कई बार एमएस से बात की, लेकिन हमें अब तक वेतन नहीं मिला।”
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प्रबंधन और ठेकेदारों पर आरोप
सीटू के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि ठेकेदारों द्वारा न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया जा रहा है, साथ ही ईपीएफ, ईएसआई, छुट्टियों, आठ घंटे का कार्य दिवस, वेतन भुगतान, बोनस, चेंजिंग रूम और वर्दी सेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार श्रम कानूनों की खुली अवहेलना कर रहे हैं और चेतावनी दी कि अगर श्रम कानून लागू नहीं किए गए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
आईजीएमसी प्रबंधन की प्रतिक्रिया
आईजीएमसी अस्पताल के एमएस डॉ. राहुल राव ने सफाई कर्मियों के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जल्द ही कर्मचारियों का वेतन जारी कर दिया जाएगा।” हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि मैनेजमेंट की ओर से यह आश्वासन बार-बार दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सफाई कर्मियों की आर्थिक स्थिति
आईजीएमसी अस्पताल में सफाई कर्मियों और वार्ड अटेंडेंट को दो कंपनियों के माध्यम से सैलरी दी जाती है। अस्पताल में 80 वार्ड अटेंडेंट और 60 सफाई कर्मी हैं। जब ये कर्मी अपनी सैलरी मांगते हैं, तो दोनों कंपनियों का एक ही जवाब होता है कि मैनेजमेंट द्वारा सैलरी अभी जारी नहीं की गई है। नतीजतन, इन कर्मचारियों को अपने घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि दिवाली के दौरान उन्हें सैलरी नहीं मिली थी और उन्होंने उधारी लेकर त्योहार मनाया।
कर्मचारियों का नाराजगी और चेतावनी
कर्मचारियों का कहना है कि जब वे पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, तो अस्पताल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका वेतन हर महीने समय पर दिया जाए। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि अगर प्रबंधन का यही रवैया रहा, तो उन्हें नौकरी छोड़ने तक की नौबत आ सकती है।
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