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विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का किया आह्वान

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, वन विस्तार, ई-वाहनों को बढ़ावा देने और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।

शिमला

पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिया संदेश

रिज मैदान शिमला में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, वन और नदियां मानव जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधन हैं और इनके संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसे प्रत्येक नागरिक की जीवनशैली और दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते वैश्विक तापमान, मौसम में हो रहे बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती हैं। उन्होंने लोगों से जल संरक्षण, स्वच्छता, वृक्षारोपण और प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने जैसे उपायों को अपनाने का आह्वान किया।

हिमाचल की पारिस्थितिकी सेवाओं का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पूरे उत्तर भारत को स्वच्छ जल और शुद्ध वायु उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिसके कारण प्रदेश को ‘लंग्स ऑफ नॉर्थ इंडिया’ के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90 हजार करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियां, वन और प्राकृतिक संसाधन न केवल हिमाचल बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में हिमाचल की भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए और इस विषय को विभिन्न मंचों पर उठाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने, जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।

प्राकृतिक आपदाओं और वन संरक्षण पर चर्चा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 के दौरान प्रदेश ने गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हुए और सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के वन प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और राज्य सरकार वन क्षेत्र के विस्तार के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक वन आवरण को बढ़ाकर 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना के तहत बंजर पहाड़ियों पर पौधारोपण किया जा रहा है, जबकि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना और ग्रीन एडॉप्शन योजना के माध्यम से जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

प्रदेश के मुद्दे विभिन्न मंचों पर उठाने की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के हितों से जुड़े विषयों को विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर उठा रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदान की जा रही पारिस्थितिकी सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़े मुद्दों को नीति आयोग की आगामी बैठक में भी प्रमुखता से रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के लोगों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप योजनाओं को लागू करना है। उन्होंने कहा कि किसानों, महिलाओं, युवाओं और अन्य वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

ई-वाहनों और बायोचार परियोजनाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ई-वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने बताया कि हिमाचल पथ परिवहन निगम के बेड़े में शीघ्र ही 297 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग की घटनाओं को नियंत्रित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से राज्य में दो बायोचार संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन संयंत्रों में चीड़ की सूखी पत्तियों और अन्य बायोमास का उपयोग कर बायोचार तैयार किया जाएगा, जिससे वन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण दोनों को लाभ मिलेगा।

नशे के विरुद्ध अभियान पर दी जानकारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध व्यापक स्तर पर अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर तक नशा तस्करी और अवैध गतिविधियों से जुड़े मामलों की पहचान की गई है तथा संबंधित क्षेत्रों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत 174 चिट्टा तस्करों को जेल भेजा गया है और लगभग 51 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की गई हैं। उन्होंने बताया कि 76 संदिग्ध संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है तथा 17 मामलों में नशा कारोबार से जुड़ी संपत्तियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे से जुड़े मामलों में किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि नशे से संबंधित मामलों में 123 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनमें 21 पुलिस कर्मी भी शामिल हैं।

जनगणना और जनभागीदारी का किया आह्वान

मुख्यमंत्री ने लोगों से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े विकास योजनाओं और नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण और नशा विरोधी अभियान से संबंधित शपथ भी दिलाई तथा सामाजिक अभियानों की सफलता में जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

पर्यावरण उत्कृष्टता पुरस्कार किए प्रदान

कार्यक्रम में वर्ष 2025-26 के लिए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विभिन्न संस्थानों और व्यक्तियों को ‘पर्यावरण उत्कृष्टता पुरस्कार’ प्रदान किए गए। विद्यालय श्रेणी में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भलेठ, सुजानपुर टीहरा, जिला हमीरपुर को प्रथम पुरस्कार तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सरोग, जिला शिमला और पाइनग्रोव स्कूल कसौली, जिला सोलन को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। शिक्षण संस्थान श्रेणी में सेंट बीड्स कॉलेज, नवबहार शिमला को प्रथम पुरस्कार मिला, जबकि अस्पताल श्रेणी में एम्स बिलासपुर को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। व्यक्तिगत श्रेणी में ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर, रिकांगपिओ, जिला किन्नौर को सम्मानित किया गया। उद्योग श्रेणी में नेस्ले इंडिया लिमिटेड ऊना को प्रथम तथा इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बद्दी को द्वितीय पुरस्कार मिला। शहरी स्थानीय निकाय श्रेणी में नगर निगम मंडी तथा ग्राम पंचायत श्रेणी में ग्राम पंचायत शीला भुटेड़, धर्मशाला और ग्राम पंचायत चौगान, बैजनाथ को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान मिनी मैराथन के विजेताओं को भी सम्मानित किया, नगर निगम हमीरपुर को ई-वाहनों की चाबियां सौंपीं तथा जनगणना प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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