Himachalnow / धर्मशाला
धर्मशाला, 03 दिसंबर: जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग कांगड़ा द्वारा बीएड कॉलेज द्रोणाचार्य रैत में गद्दी जनजातीय लोक संस्कृति के उत्थान पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
गद्दी संस्कृति की महत्वता
जिला भाषा अधिकारी अमित गुलेरी ने बताया कि संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए भाषा कला संस्कृति विभाग नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता है। उन्होंने कहा कि गद्दी संस्कृति हिमाचल की अमूल्य धरोहर है, और इसे जीवित रखने के लिए सभी की सहभागिता अनिवार्य है। गद्दी जनजातीय लोक संस्कृति का हिमाचल के पारंपरिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है और इसे आगामी पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
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युवाओं को दिया संदेश
इस कार्यक्रम में बीएड कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रवीण शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे हमेशा अपनी संस्कृति से जुड़े रहें। उनका कहना था कि संस्कृति के माध्यम से ही संस्कारों का निर्माण होता है, और यह युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वे अपनी परंपराओं को बनाए रखें।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के दौरान, वंशिका युवा कला मंच सुक्कड़ और धौलाधार सांस्कृतिक मंच बड़ोल ने शानदार लोक गीतों और लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मोहित कर दिया और सभी को गद्दी संस्कृति की महक और उसकी समृद्ध परंपराओं से परिचित कराया।
संस्कृति के संरक्षण में सभी का योगदान
यह कार्यक्रम केवल गद्दी जनजातीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने का एक मंच था, बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाता है कि संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन सभी का कर्तव्य है। इस तरह के आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और अपनी धरोहर को संरक्षित करने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के आयोजन से यह साबित हुआ कि यदि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को महत्व देंगे तो न केवल हम अपनी पहचान बनाए रखेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेंगे।
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